'मरीजों को इस तरह तड़पते देखकर हमें भी आ रहा है रोना', डॉक्टरों ने सुनाई आपबीती
नई दिल्लीअस्पतालों में ऑक्सिजन की भारी कमी है। लोग अस्पतालों के गेट पर ऑक्सिजन और बेड के लिए तड़पते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर भी इस वक्त खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। मजबूरन मरीजों को अस्पताल से जाने के लिए कहा जा रहा है। कई अस्पतालों के डॉक्टर इस स्थिति को लेकर खुद रोते नजर आए। डॉक्टरों का कहना है कि इतनी भयावह स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई है। आज मरीजों को ऑक्सिजन की कमी से अपनी आंखों के सामने मरते हुए देख रहे हैं और दिल रो उठता है।लोग अस्पतालों के गेट पर ऑक्सिजन और बेड के लिए तड़पते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर भी इस वक्त खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। मजबूरन मरीजों को अस्पताल से जाने के लिए कहा जा रहा है। कई अस्पतालों के डॉक्टर इस स्थिति को लेकर खुद रोते नजर आए।

नई दिल्ली
अस्पतालों में ऑक्सिजन की भारी कमी है। लोग अस्पतालों के गेट पर ऑक्सिजन और बेड के लिए तड़पते नजर आ रहे हैं। डॉक्टर भी इस वक्त खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं। मजबूरन मरीजों को अस्पताल से जाने के लिए कहा जा रहा है। कई अस्पतालों के डॉक्टर इस स्थिति को लेकर खुद रोते नजर आए। डॉक्टरों का कहना है कि इतनी भयावह स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई है। आज मरीजों को ऑक्सिजन की कमी से अपनी आंखों के सामने मरते हुए देख रहे हैं और दिल रो उठता है।
खुद ऑक्सिजन के लिए दौड़ रहा हूं

रोहिणी सेक्टर 22 के धर्मवीर सोलंकी अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ पंकज सोलंकी कहते हैं कि पिछले कई घंटों से अस्पताल में ऑक्सिजन की सप्लाई नहीं की गई। ऐसे में मरीजों की जान बचाने के लिए दो दिन से मैं खुद अपनी गाड़ी में जैसे-तैसे ऑक्सिजन का बंदोबस्त करके ला रहा हूं और मरीजों तक पहुंचा रहा हूं। मेरी आंखों के सामने ऑक्सिजन की कमी से मरीज तड़प रहे हैं और लाख कोशिश के बाद भी हम उनके लिए कुछ नहीं कर पा रहे। मैंने पहले कभी ऐसा मंजर नहीं देखा था। अब खुद को यह स्थिति देखकर रोना आ रहा है। मजबूरन मुझे अपने अस्पताल से मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ रहा है। स्थिति खराब हो गई है।
आम आदमी देख ले तो कभी घर से बाहर ना निकले

शालीमार बाग के मैक्स अस्पताल में कोविड ड्यूटी कर रहे डॉ रोहित चौधरी का कहना है कि ऑक्सिजन की कमी के कारण लोग तड़प रहे हैं। अस्पताल के बाहर मरीजों की लंबी लाइन है। मैंने कई लोगों को अस्पताल में बेड और ऑक्सिजन देने के लिए गिड़गिड़ाते देखा है। यह ऐसा मंजर था कि यदि आम लोग इसे देख लें तो वह घर से बाहर जाना ही बंद कर देंगे। पिछले साल जून से कोविड मरीजों के लिए साथ ड्यूटी कर रहा हूं लेकिन जो स्थिति पिछले 15 दिनों में देखी है, ऐसी पूरे एक साथ में कभी नहीं देखी थी।
इस वक्त हम भी लाचार महसूस कर रहे हैं

हिंदूराव अस्पताल में कोविड ड्यूटी कर रहे डॉ़ मोहित चौधरी बताते हैं कि इस वक्त हम खुद लाचार महसूस कर रहे हैं। चारों तरफ मायूसी नजर आ रही है। हम मरीजों को इलाज देना चाहते हैं लेकिन जब तक हमारे पास साधन ही नहीं होंगे तो कैसे इलाज देंगे। फिलहाल अस्पताल में ऑक्सिजन की सीमित मात्रा को देखते हुए 200 बेड ही चालू हैं और इन्हीं बेड पर हम इलाज कर सकते हैं। ऑक्सिजन की सप्लाई नॉर्मल होगी तो और बेड बढ़ाए जाएंगे ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इलाज दे सकें। जब मरीज हमारे सामने रो रहे हैं तो हम बेहद असहाय और लाचार महसूस कर रहे हैं।
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