ब्लॉगः दुर्गा की पूजा के बाद ही जीतते हैं मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी
भारत की पौराणिक कथाओं को अगर उनके साथ बाद में जोड़े गए कर्मकांडों से अलग कर के देखें, तो मानव जीवन के अद्भुत रहस्य उजागर होते हैं। इस उपमहाद्वीप की प्रकृति में छह ऋतुएं हैं- ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर और वसंत। पुराणों में हर ऋतु संधि पर नवरात्र मनाने का विधान है। यानी साधना और संयम की नौ रातें। लेकिन लोक जीवन में मुख्य रूप से दो ही नवरात्र प्रचलित हुए। एक वासंतिक नवरात्र जो मार्च या अप्रैल में आता है, और दूसरा शारदीय नवरात्र, जो अक्टूबर या नवंबर में मनाया जाता है। दोनों ही नवरात्रों के दौरान हम राम की भी पूजा करते हैं और दुर्गा की भी। राम हमारे लिए मर्यादा के प्रतीक हैं, पुरुषोत्तम हैं। इसलिए भारतीय समाज के लिए पूजनीय हैं। दुर्गा स्त्री तत्व हैं। वे आदि शक्ति हैं, इसलिए नवरात्रों में उनकी भी आराधना होती है।
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