डॉक्टर रणदीप गुलेरिया बोले- पॉजिटिविटी रेट को आधार मानकर लगे लॉकडाउन
नई दिल्ली भारत में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने हाहाकार मचाया हुआ है। देश में अब तक (India Corona Cases) यानी 23 अप्रैल 2021 तक 1 लाख 89 हजार 544 लोगों की मौत कोविड-19 की वजह से हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ लॉकडाउन को लेकर राज्य असमंजस में हैं, लेकिन कुछ राज्यों ने अपने यहां लॉकडाउन की घोषणा की है। वहीं इसी बीच एम्स प्रमुख डॉ रणदीप गुलेरिया (AIIMS chief Dr Randeep Guleria) ने निजी चैनल से बातचीत में लॉकडाउन को लेकर सुझाव दिए हैं। निजी चैनल से बातचीत में डॉ रणदीप गुलेरिया ने कहा कि जिन इलाकों में कोविड पॉजिटिविटी रेट (Positivity Rate) 10 फीसदी के पार चला गया हो, वहां लॉकडाउन (Lockdown) जरूर लगाया जाए। डॉ रणदीप गुलेरिया ने यह फॉर्मूला ऐसे वक्त सुझाया है, जब कोरोना वायरस की दूसरी लहर में नए मामलों की सुनामी सी आ गई है। वहीं इससे भारत की चिकित्सा व्यवस्था धराशायी होती दिखाई दे रही है। 'संक्रमण की चेन को तोड़ना जरूरी' गुलेरिया ने माना कि देश का हेल्थकेयर सिस्टम सरकार द्वारा वायरस के फैलने का अनुमान लगा पाने में नाकामी की कीमत चुका रहा है। वायरस के ज्यादा संक्रामक वैरिएंट और म्यूटेंट तेजी से संक्रमण फैला रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तेजी से बढ़ते सक्रिय मरीजों का बोझ कम करने के लिए संक्रमण की चेन को तोड़ना जरूरी है। कोरोना के रोजाना के मामले भारत में मार्च के मध्य में 25 हजार के करीब थे, जो अब बढ़कर 3.5 लाख तक पहुंच गए हैं। कोरोना पर करना होगा दोतरफा वार- गुलेरिया डॉ रणदीप गुलेरिया ने साफतौर पर कहा कि हमें दोहरी रणनीति पर काम करना होगा। पहला ये कि जल्द से जल्द अस्पतालों और अन्य जगहों पर सभी तरह की सुविधाएं इलाज के लिए मुहैया कराई जाएं। अस्पताल में बेड, दवाएं और ऑक्सीजन की किल्लत को तेजी से दूर करना होगा। दूसरा कोरोना संक्रमण के नए मामलों को कम करने पर ध्यान देना होगा। हम लंबे समय तक इतने ज्यादा एक्टिव मरीजों का बोझ नहीं सह सकते। 'कोरोना की चेन तोड़ने से ही नए मामलों में आ सकती है कमी' डॉ रणदीप गुलेरिया ने बताया कि संक्रमण पर काबू पाने के लिए हमें ज्यादा पॉजिटिविटी रेट वाले इलाकों पर फोकस करा होगा। अगर यह सबसे ज्यादा होगा तो हमें कंटेनमेंट जोन बनाना पड़ेगा ।यहां तक कि लॉकडाउन लगाना पड़ेगा। तभी संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सकता है और नए मामलों को नीचे लाया जा सकता है। गौरतलब है कि भारत में एक्टिव केस यानी जिन मरीजों का इलाज चल रहा है, उनकी तादाद बढ़कर 25.5 लाख तक पहुंच गई है। अस्पतालों और चिकित्साकर्मियों पर जबरदस्त दबाव है। ऑक्सीजन संकट पर क्या बोले गुलेरिया? दिल्ली में पिछले तीन दिनों से अस्पताल ऑक्सीजन के लिए गुहार लगा रहे हैं। गुलेरिया ने कहा कि राजधानी में ऑक्सीजन का संकट सही मायने में गंभीर है। हमें देखना होगा कि संसाधनों का कैसे बंटवारा करना है। जिन राज्यों में ऑक्सीजन ज्यादा है, वहां से इसे मंगाया जा सकता है। 'मौत के खतरे को कम नहीं करता है रेमडेसिवीर' इन दिनों देशभर में रेमडेसिवीर इंजेक्शन को लेकर हंगामा मचा है। कई शहरों से इसकी ब्लैक मार्केटिंग की भी खबरें भी आ रही हैं। हालांकि डॉक्टर गुलेरिया का कहना है कि ये इंजेक्शन लोगों को सिर्फ हॉस्पिटल जाने से रोक सकता है, लेकिन इससे मौत की दर में कोई कमी नहीं आती है।उन्होंने कहा कि रेमडेसिवीर एक एंटी वायरल दवाई है, जिसे इबोला के लिए बनाया गया था। ये जीवन रक्षक दवा नहीं है और न ही ये मृत्यु को कम करता है।
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