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ऑक्सिजन पर सुनवाई LIVE: HC ने केंद्र से कहा- दिल्ली आ रही ऑक्सिजन को सुरक्षा दें

नई दिल्ली कोरोना की बढ़ती संख्या के बीच ऑक्सीजन की कमी की खबरें देश की राजधानी दिल्ली से भी खूब आ रही हैं। अब भी कुछ हॉस्पिटल की ओर से कहा जा रहा है कि उनके पास कुछ ही घंटे का ऑक्सीजन बचा है। ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कल केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट में याचिका पर आज भी सुनवाई चल रही है। जानिए हर अपडेट.. ऑक्सीजन सप्लाई वाली लॉरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे केंद्र- हाई कोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करे कि दिल्ली आ रही ऑक्सीजन के ट्रांसपोर्टेशन में कोई बाधा न हो। लॉरियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। हाई कोर्ट ने कहा कि हमें बताया गया है कि पानीपत में ऑक्सीजज की सप्लाई को ऑब्स्ट्रक्ट किया गया है। हाई कोर्ट ने कहा कि हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि वह डीडीएमए और हमारे 21 और 22 अप्रैल को जारी आदेशों का सख्ती से पालन करवाएं, आदेशों पर अमल न होने का नतीजा यह होगा कि हम तमाम जिंदगियों को खो देंगे और आपराधिक अपराध होगा। हम केंद्र सरकार को निर्देश देते हैं कि ऑकसीजन को लेकर आ रही लॉरियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए जिससे ट्रांसपोर्टेशन में कोई बाधा न आए, स्पेशल कॉरिडोर्स बनाए जाएं। पानीपत यहां से महज दो घंटे की दूरी पर हैं, वहां से आने में कोई देरी नहीं होनी चाहिए, ताकि जानें बचाई जा सकें। तमिलनाडु में वेदांता के प्लांट को ऑक्सीजन प्रोडक्शन के लिए दोबारा खोल सकते हैं- मेहता सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि तमिलनाडु में वेदांता के प्लांट में भी ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकता है लेकिन वह बंद पड़ा है। हम इसे मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए दोबारा खोल सकते हैं और उसे मुफ्त में उपलब्ध कराएंगे। प्लांट फिलहाल पर्यावरण मानकों के उल्लंघन को लेकर बंद है। केंद्र के भरोसे के बाद भी दिल्ली को उसका ऑक्सीजन कोटा नहीं मिल रहा: हाई कोर्ट दिल्ली हाई कोर्ट अब फैसले लिखवाना शुरू किया है। कोर्ट ने कहा कि जाहिर होता है कि केंद्र सरकार के भरोसे के बावजूद दिल्ली को ऑक्सीजन आवंटित कोटे के मुताबिक मिल नहीं पाई है। तमाम राज्यों में इसे रोका गया है जहां उसका उत्पादन होता है। हाई कोर्ट ने कहा कि दिल्ली की हालत यह है कि अस्पतालों में या तो ऑक्सीजन खत्म होने वाली है या कुछ ही घंटों की बची है। विकासपुरी का यूके हॉस्पिटल और द्वारका का एक अस्पताल इसी कगार पर है। सॉलिसिटर जनरल चाहते हैं हाई कोर्ट अब सुनवाई बंद कर दे तमाम अदालतें जिन्होंने मामले में सुनवाई शुरू की है। सुप्रीम कोर्ट ने भी स्वत: संज्ञान लिया है। तीन बिंदुओं पर सुनवाई कर रहें-ऑक्सीजन, वैक्सीनेशन और लॉकडाउन। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट बेहतर पोजिशन में है जो और राज्यों को भी निर्देश दे सकता है। हम ऐसा नहीं कर सकते हैं, वरना हम भी कुछ राज्यों को शामिल करते। एसजी कोशिश कर रहे हैं कि दिल्ली हाई कोर्ट इस मामले में अब सुनवाई बंद कर दे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मुद्दे पर सुनवाई शुरू कर दी है। राहुल मेहरा ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि आदेश पारित करने में एक मिनट की देरी अब जिंदगियों पर भारी पड़ने वाली है। पानीपत बहुत दूर नहीं है- हाई कोर्ट दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने हाई कोर्ट को बताया कि आज पानीपत से ऑक्सीजन ही नहीं आया। उन्होंने कहा कि पानीपत से दिल्ली के लिए ऑक्सीजन का आवंटन 140 मीट्रिक टन है। वहां से 280 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आ चुका है लेकिन आज एक भी टन नहीं आया। इस पर हाई कोर्ट ने केंद्र से कहा कि आपने आदेश जरूर पारित किए होंगे लेकिन उन्हें लागू नहीं करवा पा रहे हैं। अर्जेंसी को देखिए। पानीपत बहुत दूर नहीं है। 'दिल्ली सरकार दे अस्पतालों की लिस्ट, हम देख लेंगे'हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि दिल्ली सरकार अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी के मुद्दे को सनसनी बना रही है। केंद्र की तरफ से कहा कहा कि जिन अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी हो रही है, दिल्ली सरकार हमें उनकी पूरी लिस्ट दे। हम उन्हें देख लेंगे। कोर्ट ने केंद्र सरकार को फिर कहा- ऑक्सीजन की कमी का तुरंत समाधान निकालें दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के अस्पतालों में ऑक्सीजन कमी को लेकर दायर एक याचिका पर सुनवाई केंद्र सरकार से कहा कि वह इस मुद्दे का तुरंत समाधान करे। कोर्ट ने कहा, 'आपके द्वारा किए गए ऑक्सीजन के आवंटन का कुछ राज्य सम्मान नहीं कर रहे, इसे अत्यावश्यक आधार पर देखें और तत्काल समाधान करें।' केंद्र सरकार ने बुधवार को दिल्ली सरकार का ऑक्सीजन कोटा बढ़ाया था, लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे नाकाफी करार दिया था। गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने दलील दी कि दिल्ली को ऑक्सीजन की अधिकतम सप्लाई की जा रही है। दूसरे राज्यों से भी लगातार ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ रही है। ऑलिसिटर जनरल तुषार मेहता कहा कि केंद्र सरकार इस मामले पर पूरी तरह सजग और संवेदनशील है। वहीं दिल्ली सरकार ने कहा कि दिल्ली को पानीपत और यूपी से ऑक्सीजन मिलने में दिक्क्त हो रही है, बाकी कुछ जगहों जैसे भिवाड़ी वगैरह से आपूर्ति हो रही है। दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने एएनआई की खबर का जिक्र करते हुए कहा कि शांति मुकुंद हॉस्पिटल में डॉक्टर रो पड़े। वे कह रहे हैं कि उन्हें मरीजों को मजबूरी में डिस्चार्ज करना पड़ रहा है क्योंकि ऑक्सीजन नहीं है। कोर्ट ने कल केंद्र सरकार को लगाई थी फटकार दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को केंद्र को निर्देश दिया था कि कोविड-19 के गंभीर रोगियों का इलाज कर रहे राष्ट्रीय राजधानी के उन अस्पतालों को फौरन किसी भी तरीके से ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए जो इस गैस की कमी से जूझ रहे हैं। कोर्ट ने कहा था, ‘केंद्र हालात की गंभीरता को क्यों नहीं समझ रहा? हम इस बात से स्तब्ध और निराश हैं कि अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो रही है लेकिन इस्पात संयंत्र चल रहे हैं।’ उच्च न्यायालय ने कहा कि जब तक ऑक्सीजन का आयात नहीं होता तब तक अगर इस्पात और पेट्रोलियम जैसे उद्योग कम क्षमता के साथ काम करें तो कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ेगा। लेकिन अस्पतालों को चिकित्सीय ऑक्सीजन नहीं मिली तो तबाही मच जाएगी। अदालत ने कहा कि हम लोगों को ऑक्सीजन की कमी के कारण मरते हुए नहीं देख सकते। उसने कहा कि आप ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए सभी संभावनाओं की तलाश नहीं कर रहे। भीख मांगें, उधार लें या चोरी करें। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने अवकाश के दिन इस मामले में सुनवाई करते हुए कहा कि ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्र सरकार के कंधों पर है और जरूरत पड़ी तो इस्पात और पेट्रोलियम समेत सभी उद्योगों की सारी ऑक्सीजन की आपूर्ति चिकित्सीय उपयोग के लिए की जा सकती है।’ दिल्ली के कुछ अस्पतालों में ऑक्सीजन पूरी तरह खत्मः सिसोदियादिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने गुरुवार को कहा कि राजधानी के कुछ अस्पतालों में ऑक्सीजन पूरी तरह खत्म हो गई है, उनके पास अब कोई विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्य राष्ट्रीय राजधानी के हिस्से की चिकित्सीय ऑक्सीजन पर नियंत्रण हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। इस बीच दिल्ली के सरोज अस्पताल ने कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए ऑक्सीजन की तत्काल आपूर्ति कराने का अनुरोध लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया है। इस पर आज सुनवाई होगी। इससे पहले सुबह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आपूर्ति बढ़ाने के लिए ऑक्सीजन की खेप विमानों से लाने के प्रयास चल रहे हैं। केजरीवाल ने कोविड-19 मरीजों के उपचार के लिए दिल्ली को ऑक्सीजन का कोटा बढ़ाने को लेकर केंद्र और उच्च न्यायालय के प्रयासों की सराहना की और कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में आपूर्ति पहुंचने लगी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली को ऑक्सीजन की बढ़ायी गई मात्रा में से अधिकतर हिस्से की आपूर्ति ओडिशा से होनी है और सैकड़ों किलोमीटर की दूरी के कारण दिल्ली सरकार समय बचाने के लिए विमान से इसकी आपूर्ति किए जाने पर विचार कर रही है। केंद्र सरकार बताए अपना प्लान ऑक्सीजन और दवाइयों की कमी के बीच दिल्ली हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्ती दिखाई है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि वो बताए कि कोरोना पर उसका प्लान क्या है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से दवाइयों के साथ ही साथ ऑक्सीजन सप्लाई पर जवाब मांगते हुए पूछा है कि वह अपनी नेशनल लेवल पर क्या योजना है बताए। ऐसा कैसे कह सकते कि ऑक्सीजन नहीं है ऑक्सीजन की कमी पर क्रिकेटर और टीएमसी नेता मनोज तिवारी ने एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में एक लड़की रोती हुई नजर आ रही है। वो बोल रही है कि उसके पिता हॉस्पिटल में एडमिट हैं और ऐन वक्त पर कहा जा रहा है कि ऑक्सीजन नहीं है। ऐसा कैसे कह सकते हैं। वो हॉस्पिट से निकाल रहे हैं ऐसा नहीं कर सकते। वहीं एक दूसरी महिला भी रोती हुई नजर आ रही है। दिल्ली- हरियाणा में बंट गए तो देश नहीं बचेगा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार हर राज्य के लिए ऑक्सीजन का कोटा तय करती है। देश में जितनी भी ऑक्सीजन बनती है, केंद्र तय करती है कि किस राज्य को कितनी ऑक्सीजन मिलेगी। दिल्ली सरकार का अनुमान है कि 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जरूरत है। कल केंद्र सरकार ने बढ़ाकर 480 मीट्रिक टन कोटा कर दिया, जिसका शुक्रिया करते हैं। केजरीवाल ने कहा कि ये बहुत बड़ी आपदा है, अगर इसमें हम हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, गुजरात, पश्चिम बंगाल में बंट गए तो भारत नहीं बचेगा, इस वक्त हमें एक-दूसरे की मदद करनी है। अगर दिल्ली में जरूरत से ज्यादा ऑक्सीजन होगी तो हम दूसरे राज्यों को देंगे। आज दोबारा होगी ऑक्सीजन के मसले हाई कोर्ट में सुनवाई बुधवार देर रात तक चली सुनवाई के बाद आज दोपहर 3 बजे दोबारा इस मामले की सुनवाई आज होगी। बुधवार सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि कोविड-19 के गंभीर रोगियों का इलाज कर रहे दिल्ली के हॉस्पिटल को किसी भी तरीके से ऑक्सीजन मुहैया कराई जाए। दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि केंद्र हालात की गंभीरता को क्यों नहीं समझ रहा। हम इस बात से स्तब्ध और निराश हैं कि अस्पतालों में ऑक्सीजन खत्म हो रही है लेकिन इस्पात संयंत्र चल रहे हैं। न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रेखा पल्ली की पीठ ने कहा कि ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी पूरी तरह केंद्र सरकार के कंधों पर है। जरूरत है तो इस्पात और पेट्रोलियम समेत सभी उद्योगों की सारी ऑक्सीजन की आपूर्ति चिकित्सीय उपयोग के लिए की जा सकती है। अदालत ने कहा, जब टाटा अपने इस्पात संयंत्रों के लिए बनाई जा रही ऑक्सीजन को चिकित्सीय उपयोग के लिए दे सकते हैं तो दूसरे ऐसा क्यों नहीं कर सकते? यह लालच की हद है। क्या जरा सी भी मानवता बची है या नहीं। जगह- जगह मारे जा रहे छापे वहीं दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में जिला अधिकारियों ने ऑक्सीजन रीफिल केन्द्र में बुधवार को छापा मारा और 70 सिलेंडर बरामद किए। एक अधिकारी ने बताया कि शहर के अस्पतालों में ऑक्सीजन की घोर कमी के चलते अवैध रीफिल को रोकने के लिए छापे मारे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि द्वारका के नांगली सखरावटी के रीफिल केन्द्र में 70 सिलेंडर, ऑक्सीजन कॉइल और अन्य सामान पाए गए हैं।


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