पितरों की श्रेणी में कौन आते हैं, जानिये शास्त्रों का मत
पितृ पक्ष के समय सभी अपने पितरों के लिए श्राध, करते हैं। भोजन तर्पण आदि करते हैं। लेकिन यह एक प्रश्न बहुत से लोगोँ में बना रहता है कि हमारे पितरों में कौन कौन होते हैं। जिनके लिए हम प्रार्थना करें, इसी का उत्तर विभिन्न शास्त्रों के अनुसार दिया गया है।
पितरों की श्रेणी बहुत व्यापक है। धार्मिक शास्त्रों (विशेषकर मत्स्य पुराण और याज्ञवल्क्य स्मृति) के अनुसार, पितरों में केवल घर या परिवार के सदस्य ही नहीं आते, बल्कि वे सभी लोग आ सकते हैं जिनसे आपका रक्त, विवाह, गुरु-शिष्य परंपरा या गहरे प्रेम का संबंध रहा हो।
शास्त्रों में पितरों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांटा गया है:
1. कुल के पितर (परिवार के सदस्य) इसमें आपके सगे परिवार और वंश के लोग आते हैं। तर्पण और श्राद्ध करते समय तीन पीढ़ियों के नाम मुख्य रूप से लिए जाते हैं:
2. पिता की ओर से (पितृ पक्ष): पिता, दादा, परदादा। (माताओं में: माता, दादी, परदादी)।
3. माता की ओर से (मातृ पक्ष/ननिहाल): नाना, परनाना, बूढ़े परनाना। (नानी, परनानी आदि)।
2. संबंधियों के पितर (विवाह और रक्त संबंध)इसमें वे लोग आते हैं जो आपके सीधे वंश (पिता-दादा) के नहीं हैं, लेकिन परिवार से जुड़े थे:
3. पत्नी का परिवार: ससुर और साले (यदि उनकी मृत्यु हो चुकी हो)।अन्य रक्त संबंधी: चाचा, ताऊ, मामा, मौसा, फूफा, भाई, बहन, बुआ, मौसी और भतीजे।
4. ससुराल पक्ष (महिलाओं के लिए): यदि कोई महिला श्राद्ध कर रही है, तो उसके मायके और ससुराल दोनों पक्षों के दिवंगत लोग इसमें शामिल होते हैं।
3. कुल से बाहर के पितर (अनाश्रित और गुरु परंपरा) शास्त्रों में यह सबसे सुंदर व्यवस्था है, जहां आप उन लोगों को भी भोजन और जल दे सकते हैं जिनका आपके परिवार से कोई खून का रिश्ता नहीं था:
4. गुरु और शिष्य: आपके आध्यात्मिक गुरु, शिक्षक, या कोई प्रिय शिष्य जिनकी मृत्यु हो चुकी हो।
5. मित्र और हितेषी: आपके ऐसे मित्र, सहभागी या कोई ऐसा व्यक्ति जिसने जीवन में आपकी बहुत मदद की हो और अब वह इस दुनिया में न हो।
6. अनाथ और अज्ञात आत्माएं: श्राद्ध के अंत में "महालय अमावस्या" के दिन एक विशेष मंत्र या संकल्प से उन सभी आत्माओं के लिए जल और भोजन का अंश निकाला जाता है, जिनका इस दुनिया में कोई आगे-पीछे नहीं है (अनाथ), या जिनकी अकाल मृत्यु हुई हो।
निष्कर्षसरल शब्दों में कहें तो, हर वह दिवंगत आत्मा जिसने आपके जीवन को किसी न किसी रूप में छुआ, प्यार दिया या ज्ञान दिया, वह आपके लिए आदरणीय है और पितरों की श्रेणी में आ सकती है। पितृ पक्ष के दौरान आप उन सभी के नाम से तर्पण या भोजन का अंश (पंचबलि के माध्यम से) निकाल सकते हैं।
