'सऊदी अरब की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगे': पाकिस्तानी सेना के दावों के पीछे की कूटनीति

इस्लामाबाद: लगातार आर्थिक संकट और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़े-बड़े दावे किए हैं। इस बार पाकिस्तानी सेना ने अपने प्रमुख आर्थिक मददगार और इस्लामिक राष्ट्र सऊदी अरब को लेकर एक बड़ा बयान जारी किया है। पाकिस्तानी सेना ने सऊदी अरब को यह भरोसा दिया है कि वह उसकी क्षेत्रीय अखंडता और रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
मुख्य घटना और जनरल का बयान
पाकिस्तानी सेना (ISPR) के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी (Lt Gen Ahmed Sharif Chaudhry) ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि यदि भविष्य में सऊदी अरब की सुरक्षा पर कोई आंच आती है, तो पाकिस्तान पूरी ताकत के साथ अपने इस सहयोगी देश के साथ खड़ा रहेगा। लेफ्टिनेंट जनरल चौधरी ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान कूटनीतिक स्तर (Diplomatically) के साथ-साथ सैन्य रूप से (प्रत्यक्ष मौजूद होकर) भी सऊदी अरब की रक्षा करेगा।
सच्चाई ये है: आर्थिक मजबूरी और कर्ज का बोझ
इस बड़े सैन्य दावे की असली पृष्ठभूमि पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था में छिपी है। वर्तमान में पाकिस्तान अपने इतिहास के सबसे बुरे आर्थिक दौर से गुजर रहा है। देश को दिवालिया होने से बचाने में सऊदी अरब ने सबसे अहम भूमिका निभाई है। हाल ही में, सऊदी अरब ने पाकिस्तान को कई बिलियन डॉलर का नकद कर्ज और 'ऑयल फैसिलिटी' (उधार में कच्चा तेल) प्रदान की है।
रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तानी जनरल का यह बयान दरअसल सऊदी अरब के इन्हीं अहसानों के बदले दिखाई जा रही कूटनीतिक वफादारी है। यह किसी से छिपा नहीं है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी हद तक सऊदी अरब के निवेश और बेलआउट पैकेज पर निर्भर करती है। ऐसे में, "सऊदी भाई के लिए किसी भी हद तक जाने" का यह दावा सैन्य ताकत के प्रदर्शन से कहीं ज्यादा एक आर्थिक मजबूरी को दर्शाता है।
सैन्य रिश्ते और वर्तमान हकीकत
ऐतिहासिक तौर पर पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हमेशा से गहरे सैन्य संबंध रहे हैं। पाकिस्तानी सेना लंबे समय से सऊदी अरब के सशस्त्र बलों को प्रशिक्षण देती आई है और अतीत में पाकिस्तानी सैनिक सऊदी सीमा की सुरक्षा के लिए तैनात भी रहे हैं। हालांकि, वर्तमान में पाकिस्तान की अपनी आंतरिक स्थिति बेहद नाजुक है। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में लगातार हो रहे आतंकी हमलों से पाकिस्तानी सेना खुद जूझ रही है।
अपने ही देश में सुरक्षा सुनिश्चित करने में संघर्ष कर रही पाकिस्तानी सेना का किसी दूसरे देश की रक्षा का दावा करना कई सवाल खड़े करता है। यह स्पष्ट है कि लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी का यह बयान कूटनीतिक मंच पर पाकिस्तान की प्रासंगिकता बनाए रखने और अपने सबसे बड़े फाइनेंसर को खुश रखने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।