पराली जलाने की घटनाओं पर लगाम: पंजाब और हरियाणा के 34 जिलों में तैनात किए गए 'फ्लाइंग स्क्वाड', कड़ी निगरानी शुरू
नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के इलाकों में सर्दियों से पहले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए केंद्रीय स्तर पर सख्त कदम उठाए गए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पंजाब और हरियाणा राज्यों में धान की पराली जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए अपनी जमीनी-स्तरीय निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत कर दिया है।
आदेश के अनुसार, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सहयोग से 01 अक्टूबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक की अवधि के लिए दोनों राज्यों के कुल 34 संवेदनशील जिलों में विशेष 'फ्लाइंग स्क्वाड' (उड़न दस्ते) तैनात किए गए हैं, जो मैदानी स्तर पर स्थिति पर लगातार नजर रखेंगे।
किन जिलों में की गई है तैनाती?
इस व्यापक निगरानी अभियान के दायरे में दोनों राज्यों के प्रमुख धान उत्पादक जिलों को शामिल किया गया है:
पंजाब के 18 जिले: संगरूर, तरनतारन, फ़िरोज़पुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फ़ाज़िल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फ़रीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फ़तेहगढ़ साहिब।
हरियाणा के 16 जिले: जिंद, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, सोनीपत, रोहतक, सिरसा, करनाल, पलवल, झज्जर, कुरुक्षेत्र, अंबाला, यमुनानगर, फरीदाबाद, पानीपत और हांसी।
कैसे काम करेंगे ये उड़न दस्ते?
तैनात किए गए ये फ्लाइंग स्क्वाड अपने-अपने क्षेत्रों में जमीनी हालात का बारीकी से आकलन करेंगे। ये टीमें पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए स्थानीय अधिकारियों, जिला-स्तरीय प्रशासनिक अमले, राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और आयोग के साथ मिलकर समन्वित रूप से काम करेंगी।
इसके साथ ही, इन सभी टीमों को जमीनी वास्तविक रिपोर्ट और पराली रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों की दैनिक जानकारी सीधे तय सेल को सौंपनी होगी, ताकि स्थिति की नियमित समीक्षा की जा सके।
प्रशासन और किसानों से सहयोग की अपील
आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि धान कटाई के इस महत्वपूर्ण सीजन के दौरान प्रदूषण संकट से निपटने के लिए सभी एजेंसियों को सामूहिक प्रयास करने होंगे। प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ किसानों और स्थानीय हितधारकों का सक्रिय सहयोग भी बेहद जरूरी है, जिससे एनसीआर क्षेत्र की हवा को सुरक्षित रखा जा सके।
