भोपाल पुलिस की साइबर अपराधियों पर बड़ी कार्रवाई: डिजिटल अरेस्ट और एआई फ्रॉड नेटवर्क का किया पर्दाफाश
सितंबर 2026 में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पुलिस प्रशासन ने डिजिटल अपराधों और गिरती कानून व्यवस्था पर अंकुश लगाने के लिए एक व्यापक अभियान की शुरुआत की है। भोपाल साइबर क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस बल की संयुक्त टीम ने शहर में सक्रिय एक ऐसे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो आम नागरिकों को डिजिटल अरेस्ट और एआई आधारित वॉयस क्लोनिंग के माध्यम से लाखों रुपये की चपत लगा रहा था। इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने कई प्रमुख ठिकानों पर छापेमारी कर गिरोह के मुख्य सरगनाओं को गिरफ्तार किया है।
राजधानी में साइबर ठगों के खिलाफ भोपाल पुलिस का विशेष अभियान
भोपाल पुलिस कमिश्नरेट को पिछले कुछ हफ्तों से एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और कोलार क्षेत्रों से डिजिटल गिरफ्तारी और फर्जी अदालती समन के नाम पर ठगी की शिकायतें मिल रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए एक विशेष जांच दल का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और संदिग्ध बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर शहर के विभिन्न हिस्सों में दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान आधुनिक सर्वर, दर्जनों फर्जी सिम कार्ड, बायोमेट्रिक डिवाइस और कई हाई-एंड लैपटॉप जब्त किए गए हैं।
डिजिटल अरेस्ट और एआई वॉयस क्लोनिंग मॉड्यूल पर बड़ी कार्रवाई
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपकरणों का उपयोग कर लोगों के रिश्तेदारों की आवाज क्लोन करता था। इसके बाद वे पीड़ित को आपातकालीन स्थिति का हवाला देकर पैसे ट्रांसफर करने पर मजबूर करते थे। इसके अलावा, केंद्रीय एजेंसियों का फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को घंटों तक वीडियो कॉल पर बंधक जैसी स्थिति (डिजिटल अरेस्ट) में रखकर धन उगाही की जा रही थी। भोपाल पुलिस की त्वरित कार्रवाई से कई नागरिकों के करोड़ों रुपये ठगे जाने से बचा लिए गए हैं।
प्रशासनिक समीक्षा बैठक: कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस कमिश्नर के कड़े निर्देश
साइबर अपराधों पर इस बड़ी सफलता के बाद भोपाल पुलिस आयुक्त ने जिला पुलिस मुख्यालय में उच्चस्तरीय प्रशासनिक समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में शहर के सभी पुलिस उपायुक्तों (DCPs) और थाना प्रभारियों ने भाग लिया। समीक्षा के दौरान शहर की समग्र सुरक्षा व्यवस्था, रात्रि गश्त और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित रिस्पांस टाइम को लेकर कड़े दिशा-निर्देश दिए गए। पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की सूचना मिलते ही बैंक खातों को तत्काल प्रभाव से फ्रीज कराने की व्यवस्था मजबूत की जाए।
नागरिकों की सुरक्षा के लिए नई साइबर हेल्प डेस्क और गश्त व्यवस्था
भोपाल के प्रत्येक थाने में अब एक समर्पित 'साइबर सहायता डेस्क' को और अधिक सक्रिय कर दिया गया है, जहां तकनीकी रूप से दक्ष पुलिसकर्मी सीधे जन सामान्य की शिकायत दर्ज करेंगे। इसके साथ ही, भोपाल की सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए प्रमुख चौराहों और व्यापारिक क्षेत्रों में नाकाबंदी बढ़ा दी गई है। भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल या फर्जी धमकी से न डरें और तुरंत पुलिस हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन में संपर्क करें।