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गन्ना किसानों के हक़ में केंद्र सरकार का बड़ा फैसला - क विशेष 'उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी' बनाने का ऐलान


New Delhi: केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की समस्याओं को सुलझाने और उनके हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और खाद्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए गन्ना किसानों के साथ एक बहुत ही महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में राज्य और केंद्र सरकार के कई बड़े अधिकारी भी शामिल हुए, जहां किसानों की जमीनी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में किसानों ने मंत्रियों को बताया कि शुगर मिलों (चीनी मिलों) द्वारा उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है। मिलें गन्ने के वजन में जानबूझकर कटौती करती हैं, गन्ने से निकलने वाली चीनी (रिकवरी) के सही आंकड़े छिपाती हैं और लैब टेस्टिंग में भी गड़बड़ी होती है। इसके अलावा, गन्ने की बर्बादी (वेस्टेज) और फसल बीमा से जुड़ी परेशानियां भी मंत्रियों के सामने रखी गईं।

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन शिकायतों को बहुत गंभीरता से सुना। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मोदी सरकार के लिए किसानों की सेवा भगवान की पूजा जैसी है और किसी भी अन्नदाता का शोषण बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने माना कि मिलों द्वारा वजन कम तौलना और सही आंकड़े छिपाना बहुत ही संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका कोई कच्चा या आधा-अधूरा समाधान नहीं निकाला जाएगा, बल्कि एक ऐसा पक्का, वैज्ञानिक और पारदर्शी सिस्टम बनाया जाएगा जिससे भविष्य में कोई भी मिल किसानों का हक न मार सके।

किसानों को तुरंत और पक्की राहत देने के लिए सरकार ने एक सप्ताह के भीतर एक विशेष 'उच्चस्तरीय संयुक्त कमेटी' बनाने का ऐलान किया है। इस टीम में केंद्र और राज्य (कर्नाटक व महाराष्ट्र) सरकार के अधिकारी, किसानों के अधिकृत नेता, शुगर मिलों के प्रतिनिधि और कृषि वैज्ञानिक शामिल होंगे। यह टीम गन्ने की कटाई के समय, वजन की शुद्धता, आधुनिक लैब टेस्टिंग व्यवस्था और चीनी निकलने की मात्रा (रिकवरी) जैसे सभी तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच करेगी और एक तय समय-सीमा में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

समस्याओं को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए सरकार ने तय किया है कि सुधार के कदम दो चरणों में उठाए जाएंगे। कुछ फैसले तुरंत लागू किए जाएंगे और कुछ बदलावों को वैज्ञानिक तरीके से हमेशा के लिए पक्का (लॉन्ग टर्म) किया जाएगा। इसके साथ ही, मंत्री प्रह्लाद जोशी ने भी किसानों को भरोसा दिलाया कि गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) तय करने में पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का पूरा दाम मिल सके।