राष्ट्रीय फैलोशिप योजना ने संवारे उच्च शिक्षा के सपने: आर्थिक बाधाओं को पार कर डॉ. चेतना रेगर बनीं मिसाल
New Delhi: भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही 'राष्ट्रीय फैलोशिप (NFSC) योजना' होनहार छात्रों के डॉक्टरेट (Ph.D.) करने के सपने को साकार कर रही है। यह योजना उन शोधार्थियों के लिए एक बड़ी उम्मीद है, जिनकी राह में आर्थिक तंगी सबसे बड़ी रुकावट बन जाती है। राजस्थान के राजसमंद जिले की रहने वाली 32 वर्षीय डॉ. चेतना रेगर की सफलता की कहानी इसका जीता-जागता उदाहरण है।
आर्थिक तंगी और अनिश्चितता का दौर
डॉ. चेतना हमेशा से उच्च शिक्षा हासिल कर अकादमिक क्षेत्र (एकेडमिक्स) में अपना करियर बनाना चाहती थीं। लेकिन, पढ़ाई का भारी खर्च और परिवार का दबाव उनके इस सपने को मुश्किल बना रहा था। इसके अलावा, प्राइवेट सेक्टर में पीएचडी और रिसर्च के अनुभव को उचित महत्व न मिलने के कारण रोजगार को लेकर भी मन में अनिश्चितता और डर था।
NFSC फैलोशिप से मिली नई उड़ान
डॉ. रेगर के संघर्ष के इस सफर में नवंबर 2020 में एक बड़ा बदलाव आया, जब उन्हें एनएफएससी (NFSC) फैलोशिप के तहत आर्थिक सहायता मिलनी शुरू हुई। इस योजना में उन्हें मासिक फैलोशिप के साथ-साथ मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य जरूरी खर्चों के लिए मदद मिली। डॉ. चेतना खुद मानती हैं कि अगर उन्हें यह फैलोशिप नहीं मिलती, तो उनके लिए अपनी पीएचडी पूरी करना लगभग असंभव था।आत्मविश्वास में वृद्धि और भविष्य की तैयारी
इस आर्थिक सहयोग ने न केवल उनकी पढ़ाई की राह आसान की, बल्कि उनके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास में भी जबरदस्त सकारात्मक बदलाव लाया। इसी बढ़े हुए आत्मविश्वास और लगन के दम पर आज डॉ. चेतना रेगर असिस्टेंट प्रोफेसर (सहायक प्रोफेसर) के पद के लिए अपनी तैयारी कर रही हैं।
उनकी यह यात्रा स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि अगर योग्य छात्रों को सही समय पर सरकार से आर्थिक मदद (फैलोशिप) मिले, तो वे न सिर्फ अपनी उच्च शिक्षा पूरी कर सकते हैं, बल्कि शिक्षण और शोध के क्षेत्र में एक मजबूत करियर भी बना सकते हैं।