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स्वदेशी जागरण का संदेश देकर मनाया जन्मदिन

Publish Date: | Fri, 19 Jun 2020 04:09 AM (IST)

छिंदवाड़ा। स्वदेशी जागरण एवं पर्यावरण का संदेश देकर 100 फलदार एवं छायादार पौधारोपण के साथ भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नगर मंडल अध्यक्ष अरुण शर्मा ने अपना जन्मदिन मनाया। परशुराम वाटिका में पौधारोपण स्वदेशी के संदेश देकर भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ जन्मदिन मनाया गया एवं सभी को स्वदेशी शपथ दिलाकर जन्मदिन पर पौधारोपण कर पर्यावरण को शुद्ध करने हेतु संदेश दिया। इस अवसर पर धर्मेंद्र मिगलानी, अभिलाष गोहर, शैलेंद्र बघेल, योगेश सदारंग, मनोज चौरे, डॉक्टर चौरे, प्रतीक दामोदर पप्पू ठाकुर राजेश बैस, जित्तू चौहान संदीप चौहान, रत्नाकर आवारे आशीष द्विवेदी, शैलेंद्र यादव, अभिषेख गुप्ता, इंद्रजीत पटेल, परक मिगलानी, कुणाल शर्मा सुमित दीक्षित सहित भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने जन्मदिन मना कर अपने नेता को बधाई दी एवं वृहद स्तर पर पौधारोपण किया।

बच्चे जिन्हें देखते हैं, उन्हें आदर्श बनाते हैं: पं.राजकुमार शास्त्री

छिंदवाड़ा। बाजार का एक मनोविज्ञान है जो दिखता है, वह बिकता है- यह बात प्रत्येक दुकानदार जानता है, इसीलिए जिस सामान को वह बेचना चाहता है उसे दुकान के शोकेस में या बाहर बहुत अच्छी तरह से सजा कर रखता है, साड़ियां बेचने वाला पहन-पहन कर के साड़ी दिखाता है क्योंकि जो दिखता है वह बिकता है। यह बात शिक्षण शिविर के चौथे दिन बालकों सहित पालकों के लिए व्यक्त किए। जैन दर्शनाचार्य पंडित राजकुमार शास्त्री उदयपुर वालों ने कहा कि बाल मनोविज्ञान है कि बच्चे जो देखते हैं वह सीखते हैं,जिन्हें देखते हैं, उन्हें आदर्श बनाते हैं,उन जैसा बनना चाहते हैं, वही करना चाहते हैं। आज हम बच्चों को टीवी, मोबाइल और मोबाइल पर अनेक प्रकार की सोशल मीडिया पर जो दिखा रहे हैं, जिस प्रकार के अभिनेता -अभिनेत्रियों को हम उनके सामने ला रहे हैं, बच्चे उनके पहनावा, बोलचाल, नाच-गान, नाज- नखरे देख-देख कर के वैसे ही कपड़े पहनना चाहते हैं, वही तेल लगाना चाहते हैं, वही मंजन करना चाहते हैं, वैसे ही कपड़े पहन कर सड़कों पर निकलना चाहते हैं।

अनेक किशोर किशोरियां, युवक- युवतियां इस प्रकार के वस्त्र पहनकर के सड़कों पर निकलते हैं, जिनको देखकर प्रौढ़ व्यक्ति भी शर्मा जाता है कि यह बच्चे आज क्या पहन रहे हैं? कपड़े तन ढ़कने को पहने जाते थे पर लगता है मानों तन दिखाने के लिए लोग कपड़े पहन रहे हैं। हम अपने बच्चों को वीतराग -निर्दोष परमात्मा के दर्शन कराएं, अहिंसक, अपरिग्रह, पूर्ण स्वाधीन, समता, क्षमा, दया, सरलता, कोमलता इत्यादि गुणों के भंडार ऐसे मुनि राजों के जीवन से परिचित कराएं। उन मुनिराजों के चित्रों और चरित्रों से बच्चे यदि परिचित होंगे, सत्य साहित्य को पढ़ेंगे, मंदिरों- तीर्थों पर जाकर यदि महापुरुषों का जीवन अवलोकन करेंगे, सात्विक जीवन जीने वाले व्यक्तियों से यदि हम परिचय कराएंगे, देशभक्त- समाजसेवी महापुरुषों और सतियों के जीवन चरित्रों से यदि हम अपने बच्चों का जीवन सुरभित करेंगे तो वे उनको देख कर अपने जीवन में सरलता, समता, समानता, मानवता, नैतिकता आदि गुणों को लाएंगे। वे बच्चे अपने जीवन में सादगी और सात्विकता को अपना श्रृंगार समझेंगे । वे उन मुनिराजों के जीवन चरित्र को सुनकर कि जिन्होंने शत्रु और मित्र के रूप में किसी को नहीं देखा, पशु और मनुष्य के रूप में किसी को नहीं देखा, तो फिर उनको देखने वाला बालक हिंदू- मुस्लिम- सिख- ईसाई के भेद नहीं देखेगा। गरीबी और अमीरी के भेद नहीं देखेगा। सभी जीव हैं, ये सब प्राणी हैं इस प्रकार के ही विचार उसके मन में आएंगे।

Posted By: Nai Dunia News Network

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