जब सरकार से छूटी मदद की आस, तो ग्रामीणों ने श्रमदान कर बना दी सड़क
Publish Date: | Fri, 14 Aug 2020 04:07 AM (IST)
नवजात के निधन से आहत ग्रामीणों ने उठाया कदम
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ग्रामीणों ने श्रमदान कर बनाई सड़क
नितिन दत्ता, तामिया। प्राकृतिक सौंदर्य से सराबोर तामिया ब्लॉक का पातालकोट क्षेत्र पर्यटकों के लिए हमेशा ही आकर्षण का केंद्र रहा है, यहां मूलभूत विकास के लिए शासन द्वारा करोड़ों रुपये की रकम खर्च की जाती है, लेकिन हकीकत ये है कि पातालकोट के कई ग्राम आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। गैलडुब्बा से कौड़िया तक दो किमी पक्की सड़क नहीं होने से आज भी ग्रामीणों की जान जोखिम में आ जाती है। बीते दिनों एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर ग्रामीण डोली बनाकर पैदल निकले। वहीं रास्ते में ही प्रसव के बाद नवजात का निधन हो गया। घटना से आहत ग्रामीणों ने आपस मे मिलकर श्रमदान कर सड़क बनाई, ये सड़क पक्की तो नहीं है, लेकिन तेज बारिश में कीचड़ से सनी सड़क बमुश्किल पैदल ही चलने लायक है। सामाजिक कार्यकर्ता पवन श्रीवास्तव ने बताया कि ग्राम घाना कोड़िया में हमने तय किया कि श्रमदान द्वारा सड़क बनाएंगे। ताकि इस बारिश के सीजन में होने वाली आकस्मिक, अनहोनी घटनाओं से निपटा जा सके। गांव के शिक्षक संतोष भारती, कौड़िया के समाजसेवी सुंदर भाई, स्थानीय युवक (घाना-कोड़िया) के साथ ही संभव हो पाया। सड़क निर्माण के लिए प्रयास आगे भी जारी रहेगा। छिंदी रोड में सिधौली के पहले गैलडुब्बा जाने वाली सडक प्रधानमंत्री सड़क योजना से बनी है। उसी के आगे कौड़िया पहुंच मार्ग में तीन किमी मार्ग ठेकेदार ने छोड़ दिया। आज भी विकास के तमाम दावों के बीच किसी को नहीं पता कि सड़क क्यों नहीं बनी या कब बनेगी। स्थानीय शिक्षक संतोष भारती तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ को इस समस्या से अवगत करा चुके हैं लेकिन कोई हल नहीं निकला।
ग्रामीण खुद आ रहे आगे
इस क्षेत्र में आजादी के बाद से ही शासन-प्रशासन, स्वयंसेवी संगठनो सहित कई संस्थानों संगठनों द्वारा अनेको विकास कार्य किए जाते रहें हैं किन्तु अभी भी भी इस क्षेत्र के बहुत से गांवों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के साथ साथ कई विकास कार्यों की आवश्यकता है, जिस वजह से इस क्षेत्र में रहने वाले मूल निवासीयों का जीवन आज भी कई कठिनाइयों से गुजरता है। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि सामाजिक विकास की अनेकों गतिविधियों में अग्रणी रहने वाले स्थानीय निवासी शिक्षक संतोष भारती और सुंदर भाई ने जब नवजात की मौत की जानकारी दी तो मन दुखी हो गया, तब लगा कि पुन? छोटे छोटे स्थानीय स्तर पर प्रयास जारी रखने पड़ेंगे और एक दिन गांव के स्थानीय नवयुवकों के साथ मिलकर श्रमदान कर गांव पहुंच रोड को इस लायक बनाने का प्रयास किया कि कम से कम गांव तक आया जा सके, हालांकि बरसात में ये प्रयास न काफी साबित होता है किंतु इस बरसात में अनहोनी घटनाओं को रोकने आकस्मिक परस्थितियों से निपटने का प्रयास तो किया जा सकता है। स्थानीय सुंदरलाल ने बताया कि सड़क कई सालों से नहीं बन पा रही है। सरकार नहीं बना सकती तो हमें सरकार सड़क के लिए उधार राशि दे। हम यहां घूमने आने वालों से टोल वसूलकर उधारी चुका देंगे। कम से कम ग्रामीण का जोखिम कम होगा।
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