अपडेट.....संशोधित खबर- नमामि देवी नर्मदे योजना में भी घोटाला, पौधे लिए बिना ही कर दिया दो करोड़ रुपये का भुगतान
Publish Date: | Fri, 11 Sep 2020 10:01 AM (IST)
(संशोधित – संबंधित विभाग के मंत्री का वर्जन जोड़ा है।)
-नमामि देवी नर्मदे योजना में भी घोटाला, पौधे लिए बिना ही कर दिया दो करोड़ रुपये का भुगतान-000
– विभाग ने शिकायत के आधार पर जांच की तो हुआ राजफाश
अभिषेक दुबे। भोपाल
उद्यानिकी विभाग के यंत्रीकरण योजना में हुए घोटाले के बाद इसी विभाग की एक और योजना में करोड़ों रुपये का घोटाला हुआ है। नमामि देवी नर्मदे योजना – 2016 मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पिछले कार्यकाल की महत्वकांक्षी योजना थी। विभाग के ही एक अधिकारी ने दिसंबर 2019 में अनियमितता को लेकर राजभवन को शिकायत की थी। इसके बाद मार्च 2020 में संयुक्त संचालक जबलपुर संभाग मनोज मेश्राम ने जांच शुरू की। छह माह की जांच के बाद उन्होंने रिपोर्ट उद्यानिकी विभाग संचालनालय को सौंप दी है। जांच में सामने आया है कि निजी नर्सरी संचालकों को अधिकारियों ने उन पौधों का भी भुगतान कर दिया है, जिसकी आपूर्ति ही नहीं की गई। केवल कागजों पर आपूर्ति दर्शाई है। करीब ढाई लाख पौधे नर्सरी से लिए ही नहीं गए। इसके एवज में दो करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया। मुख्यमंत्री चौहान ने इस योजना के तहत पौधे लगाने का रिकॉर्ड गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज कराने का दावा भी किया था।
यह थी योजना
इस योजना के तहत पूरे प्रदेश में जिन क्षेत्रों से नर्मदा नदी गुजरी है, वहां दोनों किनारों पर एक किलोमीटर के दायरे में पौधारोपण किया जाना था। इसके लिए 550 करोड़ का बजट आवंटित किया था। इसमें 41 करोड़ रुपये की राशि से पौधों की खरीदी होनी थी।
ऐसे सामने आया मामला
भोपाल संचालनालय में पदस्थ योजना के प्रभारी राजेंद्र कुमार राजौरिया ने इस मामले में गलत भुगतान के लिए वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी केपी मेहता पर दबाव डाला। उन्होंने जब बिना भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट आए भुगतान के लिए मना किया तो उनका तीन बार तबादला किया गया। परेशान होकर मेहता ने इसकी शिकायत राजभवन कर दी। राजभवन ने उद्यानिकी विभाग को जांच कराने के आदेश दिए। इसी आधार पर विभाग ने जांच संयुक्त संचालक जबलपुर मनोज मेश्राम को दी।
रिपोर्ट के मुताबिक यह हैं जिम्मेदार
राजेन्द्र कुमार राजौरिया – नमामि देवी नर्मदे योजना के प्रभारी थे। सभी क्रय से लेकर भुगतान के आदेश इन्होंने ही जारी किए। पहले वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी मेहता पर नर्सरी संचालकों को गलत भुगतान करने के लिए दबाव डाला। जब वे नहीं माने तो उन्हें निलंबित करने की धमकी दी। फिर एक बाबू से बिलों का सत्यापन कराकर उसका भुगतान वरिष्ठ उद्यान विकास अधिकारी एसबी सिंह को सीधे नियम विरुद्ध तरीके से उपसंचालक उद्यान बनाकर उसका भुगतान करा दिया। भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया भी नहीं देखी।
रामबाबू राजोदिया – तत्कालीन संयुक्त संचालक उद्यान के तौर पर जबलपुर में पदस्थ थे। इसी योजना में भुगतान करने के एवज में रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त पुलिस ने पकड़ा भी था, उनके साथ राजौरिया भी पकड़ाए थे। लेकिन लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें आरोपित नहीं बनाया। नियमानुसार भौतिक सत्यापन से लेकर पूरी प्रक्रिया की देखरेख इन्हीं को करनी थी। लेकिन इन्होंने बिना फील्ड से रिपोर्ट आए केवल निजी नर्सरी संचालकों के सत्यापन के आधार पर भुगतान कर दिया।
एसबी सिंह – बतौर उप संचालक इन्हें ग्रामीण उद्यान अधिकारियों से सत्यापन रिपोर्ट लेनी चाहिए थी, लेकिन इन्होंने निजी नर्सरी संचालकों की रिपोर्ट के आधार पर बिलों का भुगतान करने के लिए प्रस्ताव संयुक्त संचालक को भेज दिया।
…………
यह जांच छह महीने पहले सौंपी गई थी। इसकी रिपोर्ट बुधवार शाम को मिल गई है। इसका परीक्षण कराकर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।
पुष्कर सिंह, संचालक उद्यानिकी विभाग
जांच रिपोर्ट में जो भी दोषी पाया गया होगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जरूरत हुई तो मामले में एफआइआर भी दर्ज कराई जाएगी।
– भारत सिंह कुशवाह, मंत्री उद्यानिकी विभाग मप्र
Posted By: Nai Dunia News Network
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