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हाथरस घटना की उच्च स्तरीय जांच हो

Publish Date: | Thu, 08 Oct 2020 04:10 AM (IST)

छिंदवाड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता भगवानदीन साहू के नेतृत्व में अन्य धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने कलेक्टर को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर हाथरस घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की तथा आरोपित एवं पीड़ित परिवार के नार्को टेस्ट की मांग की। ज्ञापन में बताया कि हाथरस की घटना वास्तव में दुखद है। देश में हो रही ऐसी घटना का हम विरोध करते हैं, लेकिन इस घटना के बाद जो राजनीति हुई, वो बेहद चिंतनीय है। यूपी के सीएम की छवि धूमिल करने के लिए यह विश्वस्तरीय षड़यंत्र नजर आ रहा है। देश में अराजकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। पीड़िता को भी न्याय मिले तथा विचारों की अभिव्यक्ति के नाम पर देश में वैमनस्य न फैलाएं। ज्ञापन देते समय आधुनिक चिंतक हर्षुल रघुवंशी, शिक्षाविद विशाल चउत्रे, कुंबी समाज के जागरूक नेता अंकित ठाकरे, बजरंग दल के नितेश साहू, पवार समाज के प्रमुख हेमराज पटले, युवा सेवा संघ के नितिन दोईफोड़े, सोमनाथ पवार, आइटी सेल के प्रभारी भूपेष पहाड़े, ओमप्रकाश डेहरिया, एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

कोरोना से पड़ रहा मानसिक स्वास्थ्य पर असर

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एनजीओ ने तनावग्रस्त लोगों का हेल्पलाइन से दिया परामर्श

सौंसर। कोरोना महामारी का डर लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पर पड़ने लगा है। हर आयु वर्ग में तनाव बढ़ने के अलग-अलग कारण हैं। इस बीच चिंता, डर, अकेलेपन और अनिश्चिता का माहौल बन गया है और लोग दिन रात इससे जूझ रहे हैं। महिलाओं का घर रहकर चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है, तो युवाओं को भविष्य की चिंता के कारण तनाव बढ़ रहा है। बुजुर्ग और बच्चे घर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं तो व्यवसायी व्यापार नहीं चलने से परेशान हैं। कोरोना को लेकर अभी भी लोगों में भ्रांतिया हैं। यह बातें ग्रामीण आदिवासी समाज विकास संस्थान द्वारा संचालित संजीवनी मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वारा कोरोना लाकडाउन के दौरान चलाई गई मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन द्वारा लोगों से की गई बातचीत से सामने आई हैं।

संस्था प्रमुख श्यामराव धवले ने बताया कि संस्था के संजीवनी सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वारा कोरोना महामारी के कारण मानसिक तनाव की समस्याओं का सामना कर रहे लोगों के लिए मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन संचालित की थी, जिसमें संस्था कार्यकर्ताओं ने जिले के 853 लोगों को परामर्श दिया। जिसमें युवाओं, महिलाओं की संख्या अधिक थी। अधिकतर युवाओं को नौकरी की चिंता, पैसों की कमी के कारण तनावग्रस्त होने की बात सामने आई। महिलाओं को परिवार की आर्थिक समस्याओं के कारण तनावग्रस्त होने की जानकारी मिली। मानसिक रोग से पीड़ित मरीज कोरोना के कारण नियमित जांच के लिए डाक्टर के पास नहीं जा पा रहे थे, जिसके कारण उन्हें और समस्याओं का सामना करना पड़ा। संस्था द्वारा इन तनावग्रस्त लोगों को उचित परामर्श देकर उन्हें मदद की गई। कोरोना महामारी के दौरान जिले में आत्महत्या की घटनाएं भी बढ़ीं। जिसमें युवाओं की संख्या अधिक थी। अधिकांश आत्महत्याएं नौकरी चली जाने से, कर्ज का बोझ या पारवारिक समस्या होने की बात सामने आई। श्री धवले ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्या कर रहे लोगों के लिए केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 24 घंटे मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास हेल्पलाइन- 18005990019 शुरू की गई है, जिसके माध्यम से कोई भी अपनी मानसिक स्वास्थ्य या तनाव से सबंधित समस्या का परामर्श ले सकता है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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