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Farmers Protest News: कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों और उनके नेताओं को एमपी पुलिस ने नजरबंद किया! शीर्ष अधिकारी का आरोपों से इनकार

भोपाल के समर्थन में प्रदर्शन आयोजित करने की योजना बना रहे कार्यकर्ताओं ने मध्य प्रदेश पुलिस पर उन्हें नजरबंद करने का आरोप लगाया है। राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक शिव कुमार शर्मा ‘कक्काजी’ ने कहा है कि उनके घर के बाहर शनिवार सुबह से ही पुलिस तैनात कर दी गई। अखिल भारतीय किसान सभा के बादल सरोज ने भी यही दावा किया है। वहीं, एमपी पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है। कार्यकर्ता केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन के सात महीने पूरे होने के मौके पर विरोध-प्रदर्शन की योजना बना रहे थे। कक्काजी ने कहा कि पुलिस ने उन्हें नजरबंदी के बारे में नहीं बताया, लेकिन पुलिस के इरादे स्पष्ट थे कि वे मुझे घर से बाहर नहीं निकलने देना चाहते थे। कक्काजी के कई सहयोगियों ने भी दावा किया है कि उनके घरों में भी ऐसी ही स्थिति थी और पुलिस बाहर मौजूद थी। कक्काजी को दोपहर 12.30 बजे प्रतिनिधिमंडल के साथ एक सरकारी कार्यालय में ज्ञापन देने के लिए जाने की अनुमति दी गई। अखिल भारतीय किसान सभा के बादल सरोज ने एक बयान में कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा की मेधा पाटकर और डॉ सुनीलम सहित 100 से अधिक कार्यकर्ताओं और किसानों को गांधी भवन में शाम चार बजे तक नजरबंद रखा गया। सरोज ने भी दावा किया कि कार्यकर्ताओं और किसानों के बहुत आग्रह के बाद पुलिस ने केवल पांच लोगों को मांगों का ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी। इसके बाद भी प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने राजभवन में प्रवेश नहीं करने दिया और उन्हें मुख्य दरवाजे से ही लौटना पड़ा। दूसरी ओर, भोपाल रेंज के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) ए साई मनोहर ने इन आरोपों को खारिज किया है। मनोहर ने बताया कि किसी भी कार्यकर्ता को नजरबंद नहीं किया गया। कोरोना के प्रोटोकॉल के कारण किसी तरह के आंदोलन की अनुमति नहीं है। कार्यकर्ता नजरबंद हुए तो राजभवन के दरवाजे तक कैसे पहुंचे। इस बीच कक्काजी ने कहा है कि बंगाल में विरोध करने वाले किसान अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश के चुनावों में भी हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी के लिए प्रचार नहीं करेंगे बल्कि केन्द्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के जनविरोधी स्वभाव से लोगों को अवगत कराएंगे। उन्होंने दावा किया कि इन नए कानूनों के कारण सरसों के तेल की कीमत 70 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 200 रुपये प्रति लीटर हो गई है। ये कानून व्यापारियों और कॉरपोरेट्स को असीमित मात्रा में कृषि उपज जमा करने की अनुमति देते हैं।


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