एमपी के 38 जिला अस्पतालों में नहीं है सीटी स्कैन मशीन, हाईकोर्ट ने चार अक्टूबर तक लगाने के निर्देश दिए
जबलपुर एमपी में सिर्फ 14 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन मशीन (CT Scan Machine News) हैं। सरकार ने एमपी में हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष जो रिपोर्ट प्रस्तुत की है, उसमें कहा है कि 52 जिलों में से सिर्फ 14 के जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन मशीन है। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिए हैं कि सभी जिला अस्पतालों में चार अक्टूबर से पहले सीटी स्कैन मशीन लगाए जाएं। हाईकोर्ट कोरोना वायरस से संबंधित स्वत: संज्ञान याचिका के साथ अन्य मुद्दों को इसमें सम्मिलित किया है। न्याय मित्र ने न्यायालय में कहा कि राज्य सरकार की तरफ से तय दरों की सूची सभी अस्पतालों और जिला अस्पताल में लगाए जाए। उन्होंने कहा कि मेट्रो शहर में एक मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल से एक कोरोना मरीज से एक आदिवासी जिले के एक सामान्य अस्पताल के समान शुल्क लिया जाता है। उन्होंने राजस्थान, केरल और छत्तीसगढ़ जैसे अन्य राज्यों के जिलों के साथ रेट चार्ट की तुलना की और कहा कि एमपी में कोरोना उपचार दर अन्य राज्यों से 25 से 50 फीसदी कम है। वहीं, टीकाकरण पर राज्य सरकार ने कोर्ट में बताया कि सितंबर के अंत तक 18 से अधिक आयु के सभी व्यक्तियों को टीके की पहली खुराक दी जाएगी। कोर्ट को आगे बताया गया कि राज्य के 13 मेडिकल कॉलेजों में 1280 वेंटिलेटर हैं, जिनमें 23 काम नहीं कर रहे हैं। वहीं, राज्य के 52 जिलों में जो सरकारी अस्पताल हैं, उनमें 567 वेंटिलेटर्स हैं। वहीं, 14 जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन मशीन है। अक्टूबर तक सभी जिला अस्पतालों में सीटी स्कैन मीशनें लग जाएंगी। वहीं, कोरोना के लिए अस्पतालों में आईसीयू बेड की संख्या 7,595 कर दी गई है और राज्य भर में 1610 ऑक्सिजन प्लांट लगाए जा रहे हैं। स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि सभी जिला अस्पतालों में चार अक्टूबर तक सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध करा दी जाए और खराब वेंटिलेटरों की मरम्मत की जाए।
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