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बर्निंग ट्रेन में बची जान, कोविड से मां को खोया, सब झेल ट्रक ड्राइवर के बेटे ने वर्ल्ड आर्चरी यूथ चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

भोपाल तोक्यो ओलंपिक के बाद विश्व तीरंदाजी यूथ चैंपियनशिप में भारतीय तीरंदाजों (India Archery Team News) ने कमाल किया है। भारतीय तीरंदाजों ने आठ गोल्ड मेडल जीते हैं। एमपी के तीरंदाज अमित कुमार (MP Archer Amit Kumar News) ने भी विश्व यूथ तीरंदाजी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का परचम लहराया है। अमित ने मई महीने में ही अपनी मां को कोविड से खो दिया है। स्वतंत्रता दिवस के दिन पोलैंट के व्रोक्लो सिटी में 11वीं के छात्र अमित कुमार ने यूथ विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। सोमवार को हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए ट्रक चालक के तीरंदाज बेटे अमित कुमार ने कहा कि जब मेरी मां का देहांत हुआ तो मैं टूट गया था, लेकिन मेरे कोच और पिता ने मुझसे से कहा कि जो कुछ भी हुआ, उसे बदला नहीं जा सकता और मुझे भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। अमित ने कहा कि उन्होंने मुझे प्रेरित किया और मैंने विश्व चैंपियनशिप की तैयारी में पूरी तरह से जुट गया। रविवार को फ्रांस को 5-3 से हराने वाले भारतीय टीम के तीन सदस्यों में अमित ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 17 वर्षीय अमित मथुरा के रहने वाले हैं, वह धनुष-बाण पर शुरू से मोहित थे। साथ ही उनकी नजर एमपी तीरंदाजी अकादमी पर थी। अमित ने बताया कि मेरे चाचा जबलपुर में रहते थे। मैं उनके पास आया तो मुझे अकादमी के बारे में पता चला। अमित ने कहा कि उन्होंने मेरा पूरा समर्थन किया। मुझे पहले ही चांस में अकादमी में चुन लिया गया और 2016 में मैं शामिल हो गया। तब से मैं एमपी का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं। अमित ने कहा कि मैंने कई राष्ट्रीय चैंपियनशिप में एमपी का प्रतिनिधित्व किया है और 12 पदक जीते हैं। अमित ने कहा कि मैं घर पर था, जब कोविड की दूसरी लहर के दौरान लॉकडाउन लगाया गया था। मेरे जीवन का सबसे बड़ा झटका मई में आया, जब मैंने अपनी मां ज्ञानवती देवी को खो दिया। इसने मुझे पूरी तरह से तोड़ दिया था। मैं अंदर से खोखला महसूस कर रहा था। उस समय अमित की आवाज कांप रही थी। इसके आगे पोलैंड में चैंपियनशिप थी, जो अमित की पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता था। अमित के लिए यह पहली बार नहीं था, जब उन्होंने खुद को संकट से जूझते हुए पाया था। इसी साल मार्च में एमपी की जूनियर आर्चरी टीम देहरादून में राष्ट्रीय चैंपियनशिप खेलने गई थी। इस दौरान ट्रेन की बोगी में आग लग गई थी, जिसमें खिलाड़ी बाल-बाल बच गए थे। मगर इनके सारे उपकरण जल गए थे। जल्दबाजी में इनके धनुष और तीर की व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद अमित की टीम सिल्वर मेडल जीतने में सफलता हासिल की थी। पिता और कोच ने बढ़ाया हौसला वहीं, मां को खोने के बाद आगे बढ़ने के लिए अमित का हौसला उनके पिता और कोच ने बढ़ाया। अमित ने कहा कि मुझे खुशी है कि मैंने पहली अंतरराष्ट्रीय बैठक में अपनी योग्यता साबित की है। इसका श्रेय मेरे पिता, मेरे कोच और अकादमी को जाता है, जिसने मुझे तैयारी करने में मदद की है। एमपी अकादमी के कोच रिछपाल सिंह, पोलैंट में टीम के कोच भी थे। उन्होंने कहा कि अमित ने पहले दिन से ही प्रतिभा दिखाई थी। रिछपाल ने कहा कि अपनी मां को खोने के बाद भी वह विचलित नहीं हुआ और केंद्रित रहा। वह हमेशा राज्य और देश के लिए पदक जीतने के लिए उत्सुक रहता है। सीनियर वर्ग में भी वह तीरंदाजी में एक बड़ा नाम होगा। ओलंपिक में पदक जीतना अगला लक्ष्य वहीं, अमित का अगला लक्ष्य ओलंपिक में पदक जीतना है। उन्होंने कहा कि यही मेरे जीवन का एकमात्र उदेश्य है। खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा कि एमपी लगभग हर खेल में प्रतिभा पैदा कर रहा है। यह हमारी खेल अकादमियों में मजबूत बुनियादी ढांचे के कारण है। मैं अमित और रिछपाल दोनों को विश्व खिताब जीतने के लिए बधाई देता हूं।


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