ओवैसी ने की तालिबान से बातचीत की वकालत, बोले- अभी तो पॉलिसी ही साफ नहीं
हैदराबाद/नई दिल्ली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमिन (AIMIM) के नेता और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने तालिबान के मुद्दे पर नीतियों को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है। ओवैसी ने सोमवार शाम एक के बाद एक 3 ट्वीट करते हुए सरकार से अपील की है कि वह तालिबान से बातचीत के डिप्लोमैटिक रास्तों को खोले। ओवैसी ने कहा कि उन्होंने 8 साल पहले ही केंद्र की सरकार को इसके लिए आगाह किया था। ओवैसी ने अपने ट्वीट में लोकसभा में दिए उनके भाषण का वीडियो भी पोस्ट किया है। ओवैसी ने कहा कि उन्होंने 2013 की कांग्रेसी सरकार के वक्त ही यह कहा था कि अफगानिस्तान से एक दिन अमेरिकी सैनिकों की वापसी जरूर हो जाएगी। ऐसे में भारत के हितों की रक्षा के लिए तालिबान के साथ एक राजनयिक स्तर पर बात शुरू करनी होगी। ओवैसी ने कहा कि हमारे देश ने अफगानिस्तान में 3 अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट किया है, लेकिन तब किसी सरकार ने इसपर ध्यान नहीं दिया। अब सरकार क्या करेगी? ओवैसी ने कहा- 2019 में भी दोहराई थी अपनी बात ओवैसी ने कहा कि 2019 में भी मैंने की गतिविधियों को लेकर अपनी बात को संसद में दोहराया था। उस वक्त तालिबान के साथ अमेरिका और पाकिस्तान मॉस्को में बातचीत कर रहे थे। उस वक्त पीएमओ ये गिन रहा था कि पीएम ने कितने बार ट्रंप को गले लगाया है। आज हमें ये तक नहीं पता है कि अफगानिस्तान के संकट में सरकार की नीति क्या है? फिलहाल भारतीय लोगों के रेस्क्यू पर है सरकार का जोर बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद सरकार फिलहाल अपने लोगों को रेस्क्यू करने में जुटी हुई है। हालांकि भारत सरकार ने अब तक ये स्पष्ट नहीं किया है कि वह तालिबान को मान्यता देगी या नहीं। फिलहाल भारत सरकार की ओर से अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है। इसके लिए इंडियन एयरफोर्स के विमानों को काबुल भेजा गया है। वहीं अफगानिस्तान में मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों से भी दूतावास के अफसर लगातार संपर्क में हैं।
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