स्कॉर्पियो से घूम-घूमकर लगाते फोन, झांसे में फंसने पर खाते से उड़ाते पैसे, झारखंड से पकड़कर लाई रीवा पुलिस
रीवा साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud News) की घटनाओं को अंजाम देने वाले शातिर बदमाशों की एक गैंग का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। गिरोह के एक सदस्य को पुलिस झारखंड से गिरफ्तार करके रीवा लाई है, जिससे अब गिरोह के अन्य सदस्यों के संबंध में भी पूछताछ की जा रही है। यह गिरोह मोबाइल के जरिए लोगों को झांसा देकर खाते से रुपए निकालता था। पुलिस पूछताछ के दौरान गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में जानकारी ले रही है। समान थाने के संजय नगर निवासी डॉक्टर अंबिका प्रसाद द्विवेदी के मोबाइल पर 16 जून को शातिर बदमाश ने फोन कर सिम वेरिफिकेशन का झांसा दिया था। उनके खाते से 15 बार में शायद छह लाख रुपए निकाल लिए। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज जांच कर रही थी। पुलिस ने साइबर सेल की मदद से आरोपियों का लोकेशन ट्रेस किया जो झारखंड के जामताड़ा का मिला। पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार सिंह ने टीम गठित कर झारखंड भेजा। आरोपियों का लोकेशन बगरुडीह स्थान में मिला। पुलिस टीम वहां पहुंची तो फोर व्हीलर क्रमांक जेएच-21 जे 0973 खड़ी थी, जिसमें सवार दो-तीन लोग पुलिस को देखकर गाड़ी से कूदकर भाग गए। वाहन की तलाशी लेने पर उसमें एक मोबाइल फोन मिला, जिसमें मोहन मंडल पिता रामधनी मंडल निवासी बगरूडीह के नाम पर सिम लगी हुई थी। पुलिस ने आरोपी मोहन मंडल के घर में दबिश दी, लेकिन वह नहीं मिला। मां के नाम पर है गाड़ी वहीं, बरामद फोर व्हीलर वाहन उसकी मां हरुआ देवी मंडल पत्ति रामधनी के नाम पर रजिस्टर्ड था। झरी मंडल के नाम से रजिस्टर्ड सिम का उस मोबाइल में उपयोग किया गया था, जो उसका पड़ोसी था। पुलिस ने उसके घर में दबिश दी तो वह मिल गया। उससे पूछताछ की गई तो उसने अपने पुत्र राजेंद्र मंडल के लड़के मुकेश मंडल और रमेश मंडल का नाम लिया, जो इस सिम का उपयोग करता था। पुलिस अब इस पूरे गिरोह का पता लगाने में जुट गई है, जो लोगों को झांसा देकर लूट रहे हैं। कोर्ट में आरोपी को किया पेश झारखंड से पकड़ कर लाए गए आरोपी को पुलिस ने रीवा न्यायालय में पेश किया है, जहां से उसको पूछताछ के लिए 1 दिन की रिमांड पर लिया है। उससे अब गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में पूछताछ की जाएगी। साथ ही आरोपियों ने अभी तक कितने लोगों को शिकार बनाया है और ठगी के रुपए उन्होंने कहां-कहां खर्च किए हैं। जांच के बाद ही पूरा नेटवर्क सामने आएगा। स्कॉर्पियो से घूमकर करते थे ठगी वहीं, आरोपी फोर व्हीलर वाहन में घूमकर ठगी करते थे। वे फोर व्हीलर गाड़ियों में घूमकर लोगों को फोन लगाते थे ताकि उनका टावर लोकेशन एक स्थान का न आए। फोन में यदि कोई उनके झांसे में आ गया तो उसे लिंक भेज कर तुरंत रुपए दूसरे खाते में ट्रांसफर कर लेते थे। बरामद फोर व्हीलर वाहन का इस्तमाल आरोपी ठगी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए करते थे।
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