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जिस हॉकी खिलाड़ी पर एमपी सरकार ने की धन वर्षा, उनका बिहार से क्या कनेक्शन, पिता से जानिए

जितेंद्र वर्मा होशंगाबाद तोक्यो ऑलंपिक में भारतीय हॉकी टीम (Indian Hockey Team Player) ब्रॉन्ज मेडल जीता है। इस टीम के हिस्सा इटारसी के विवेक सागर भी थे। बेटे की सफलता पर पिता को गर्व है। वहीं, विवेक की सफलता पर दो राज्यों में जश्न मनाया जा रहा था। एमपी के इटारसी के साथ-साथ बिहार के सिवान जिले के एक गांव में भी लोग खुशी मना रहे थे। इसके बाद कई लोगों के मन में सवाल था कि विवेक सागर कहां के रहने वाले हैं। विवेक की उपलब्धि पर एमपी सरकार ने अपनी तरफ से एक करोड़ रुपये की राशि देने की घोषणा की है। लोगों की दुविधा को दूर करने के लिए नवभारत टाइम्स.कॉम की टीम ने विवेक सागर के पिता से फोन पर बात की है। उन्होंने बताया है कि उनके परिवार का एमपी से क्या कनेक्शन है। विवेक सागर के शिक्षक पिता रोहित प्रसाद का जीवन संघर्ष में बीता है। 18 साल की उम्र में बिहार के सिवान जिले के कनौहोली गांव से एमपी के इटारसी आए शिक्षक रोहित की कहानी प्रेरणा से ओतप्रोत है। मेहनत और लग्न से उन्होंने भारी कठिनाई के बीच जिंदगी का मैदान जीत लिया है। उनके लाल जापान की धरती पर भारतीय पारंपरिक खेल हॉकी का परचम लहरा दिया है। 18 साल की उम्र में विवेक के पिता इटारसी आए थे विवेक के पिता 18 साल की उम्र में कुछ करने की इच्छा लिए इटारसी आए थे। यहां आयुध निर्माणी फैक्ट्री में उनके बड़े भाई श्रीराम काम करते थे। फैक्टरी में नौकरी के लिए रोहित प्रसाद ने भी बहुत प्रयास किए, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। इसके बाद जीवन यापन के लिए रोहित प्रसाद ने एक प्राइवेट कंपनी बीएसआई में काम शुरू कर दिया। लंबे समय तक इसमें नौकरी करने के बाद 1986 में प्राइवेट स्कूल में 50 रुपये महीने पर शिक्षक बन गए। सरकारी स्कूल में टीचर परिवार प्राइवेट स्कूल की नौकरी से किसी तरह परिवार पल रहा था। रोहित प्रसाद को 1997-98 में सरकारी स्कूल में नौकरी लग गई। 1200 महीने के वेतन पर काम शुरू किया। बाद में वेतन बढ़कर 2256 रुपये हो गया। रोहित प्रसाद ने कहा कि जीवन के वह दिन काफी संघर्षपूर्ण रहा है। इन दिनों काफी कुछ सीखने को भी मिला है। विवेक के दादाजी भी करते रहे संघर्ष विवेक सागर के पिता रोहित प्रसाद ने बताया कि मेरे पिताजी श्रीराम चंद्र प्रसाद ने भी बहुत संघर्ष किया है। उन्होंने बताया कि पिताजी गांव के जमींदार के घर काम करते थे। जब हमलोग यहां इटारसी में सेटल हुए, तब माता-पिता भी मेरे पास आ गए। करीब दस साल तक माता-पिता मेरे पास ही रहे। इसके बाद उनका देवलोक गमन हो गया। परिवार के लिए मां का संघर्ष हॉकी खिलाड़ी विवेक के पिता शिक्षक रोहित प्रसाद कहते हैं कि मेरी पत्नी और विवेक की मां कमला देवी हर परिस्थिति के मुझे संबल देती रही है। कितनी ही मुसीबत आई लेकिन उन्होंने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। जिसका नतीजा यह निकला कि आज मेरा संघर्ष हिंदुस्तान के काम आया है।


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