MP Flood Ruins : गांव-गांव में मलबे का ढेर, कैमरे देख खून के आंसू रो रहे पीड़ित, मंजर देख खड़े हो जाएंगे रोंगटे
40 साल में पहली बार ऐसी त्रासदी देखी है... ग्वालियर-चंबल के लोग बाढ़ के विभित्स रूप को देखकर कुछ दिन पहले तक यहीं कहते थे। बाढ़ का पानी उतर गया है, उसके बाद गांवों का मंजर और भी खौफनाक है। तबाही के इस निशान को देखकर इंसान का कलेजा कांप जा रहा है। गांव पुराने रंग में फिर से दिखेंगे कि नहीं, इसकी उम्मीद ग्रामीणों को कम ही है। बाढ़ सब कुछ अपने साथ बहा ले गई। पानी उतरने के बाद गांव लौटे लोगों के सामने सिर्फ बर्बादी की तस्वीरें ही हैं। भिंड और श्योपुर जिले से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं।ग्वालियर-चंबल में बाढ़ से भीषण तबाही (Devastation from Flood) हुई है। बाढ़ के कारण शिवपुरी, श्योपुर, भिंड, मुरैना और दतिया में कई गांव में मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं। बाढ़ तबाही के निशान छोड़कर चली गई है, जिसे देखकर आपके रौंगटे खड़े हो जाएंगे।

40 साल में पहली बार ऐसी त्रासदी देखी है... ग्वालियर-चंबल के लोग बाढ़ के विभित्स रूप को देखकर कुछ दिन पहले तक यहीं कहते थे। बाढ़ का पानी उतर गया है, उसके बाद गांवों का मंजर और भी खौफनाक है। तबाही के इस निशान को देखकर इंसान का कलेजा कांप जा रहा है। गांव पुराने रंग में फिर से दिखेंगे कि नहीं, इसकी उम्मीद ग्रामीणों को कम ही है। बाढ़ सब कुछ अपने साथ बहा ले गई। पानी उतरने के बाद गांव लौटे लोगों के सामने सिर्फ बर्बादी की तस्वीरें ही हैं। भिंड और श्योपुर जिले से कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं।
तबाही देख फट जा रहे लोग

विनाशकारी बाढ़ अब लौट गई है। गांवों से खुशियां अपने साथ ले गई है। ग्रामीणों के हिस्से में बाढ़ दर्द को छोड़कर गई है, जिसे पानी उतरने के बाद लोग देख रहे हैं। बर्बादी की इन तस्वीरों को देखकर लोग फट जा रहे हैं। मलबों के ढेर पर बैठकर ग्रामीण अपनी किस्मत पर रो रहे हैं। जान तो बच गई है पर माल नहीं बचा पाए हैं। भिंड जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गांव लौटे लोगों के पास न खाने के लिए अन्न है, न तन ढकने के लिए कपड़े और न रहने के लिए घर बचा है। घर के अंदर रखा हुआ घर गृहस्थी का पूरा सामान बाढ़ के पानी में बह गया। हालात ये हैं कि चंबल नदी के किनारे बसे मुकुटपुरा, नावली वृंदावन सिंध नदी के किनारे बसे दोनियापुरा, ककहरा और जखमोली गांव समेत अन्य आधा सैकड़ा गांव के ग्रामीण अब रहने के साथ-साथ खाने पीने की दिक्कत का भी सामना कर रहे हैं।
आंगन और गलियों में है कीचड़

पानी उतरने के बाद भिंड जिले के इन गांवों में अपनी गृहस्थी संभालने लोग लौट आए हैं। कच्चे मकान मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं। गलियों में कीचड़ फैला है। ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी मदद के रूप में सिर्फ आलू और आटा मिला है। इससे क्या होगा। बुजुर्ग महिला तो अपनी पीड़ा बयां करते हुए फफक पड़ती हैं। बाढ़ में कुछ भी नहीं बचा है। सब कुछ बह गया है। अब क्या खाएंगे और हम क्या पीएंगे।
श्योपुर में सैकड़ों लोग हो गए बेघर

पार्वती नदी में बाढ़ की वजह से श्योपुर में सबसे ज्यादा तबाही हुई है। सबसे ज्यादा तबाही छह गांवों में हुई है। यहां सैकड़ों लोग बेघर हो गए। जिले के मानपुर, विजयपुर और बड़ौदा क्षेत्र में ऐसा कोई गांव नहीं, जहां तबाही न हुई हो। मानपुर और बडौदा क्षेत्र के दो गांवो की पूरी कहानी बयां कर देगी। बड़ौदा क्षेत्र के ग्राम पीपल्दा और हथवारी, जहां अहेली की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और एक सैकड़ा से अधिक परिवार बेघर हो गए हैं।
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