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Bhopal: कोरोना काल में बच्‍चों की मन:स्‍थिति, बर्ताव में बदलाव को लेकर आनलाइन चिंतन


Bhopalचाइल्ड राइट्स आब्जर्वेटरी मध्यप्रदेश ने शनिवार को प्रदेश के मैदानी पत्रकारों के साथ 'कोविड का बच्‍चों पर प्रभाव और मीडिया की भूमिका" विषय पर एक आनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया। संस्था की अध्यक्ष निर्मला बुच ने कार्यशाला की शुरुआत करते हुए कहा कि बच्‍चों की समस्या को लेकर मैदानी पत्रकारों की भूमिका महत्त्वपूर्ण है, उन्हीं की वजह से कोरोना काल में बच्‍चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गांव से लेकर कस्बों तक की जानकारी पहुंच सकी।

कार्यशाला में रघुराज सिंह ने एक प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रदेश में कोरोना काल में बच्‍चों की शिक्षा, स्वास्थ्य विशेषकर मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा की स्थिति से जिलों और तहसीलों के पत्रकारों को अवगत कराया। बातचीत में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि कोरोना काल के पिछले लगभग 17 महीनों में आनलाइन पढ़ाई के कारण बच्‍चों की आंखों पर असर हुआ है। अब बड़ी संख्या में बच्‍चों को माइनस नंबर का चश्मा लगा रहे हैं। इतना ही नहीं, अकेलेपन के कारण वे मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं।

सर्जना एकेडमी के सुनील शुक्ला ने बच्‍चों और पालकों की मानसिक समस्याओं को लेकर सुझाव दिए। उन्होंने मनोवैज्ञानिक परामर्श प्लेटफार्म सुलझन की जानकारी दी और कहा कि कोरोना काल में बच्‍चों के मानसिक विकार उभरकर सामने आए हैं, जो बेहद चिंता की बात है। बच्‍चों के व्यवहार में बदलाव दिखते ही विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। मैदानी पत्रकारों ने भी अपने अपने क्षेत्र की शिक्षा और स्वास्थ्य की जानकारी से अवगत कराया। सीआरओ की ओर से रश्मि सारस्वत ने मैदानी पत्रकारों से बच्‍चों की शिक्षा और स्वास्थ्य को लेकर अपनी अपेक्षाएं बताते हुए कहा कि आप जो जानकारियां एकत्र कर प्रकाशित करते हैं, वे बहुत उपयोगी हैं और उनसे बच्‍चों के मुद्दों पर सरकार से पैरवी करने में मदद मिलती है। कार्यशाला में 12 जिलों के 25 पत्रकारों के अलावा 20 शिक्षक और पालक भी शामिल हुए।


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