सीएम के चुनावी वादे, बीजेपी में भितरघात, महंगाई या किसान कर्ज माफी- रैगांव उपचुनाव में क्या हैं मुद्दे, जानिए एनबीटी की चुनावी यात्रा से
सतना : एमपी में जिन तीन विधानसभा सीटों पर 30 अक्टूबर को उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें सतना जिले की रैगांव (Raigaon Bypoll) भी शामिल है। इस क्षेत्र में सीएम शिवराज सिंह चौहान की दो यात्राएं हो चुकी हैं और चुनाव प्रचार अब जोर पकड़ने लगा है। एनबीटी ने अपनी चुनावी यात्रा के दौरान इस विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में पहुंचकर लोगों का नब्ज टटोलने () की कोशिश की। यह समझने की कोशिश की कि 30 अक्टूबर को होने वाली वोटिंग के दौरान कौन से मुद्दे (Issues in ) निर्णायक साबित होंगे। महंगााई की सबसे ज्यादा चर्चा मतदाताओं से बातचीत में पता चला कि आम लोगों के लिए महंगाई और बेरोजगारी बड़े मुद्दे हैं। पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ रही कीमतें लोगों की जेब पर असर कर रही हैं और इसका प्रभाव वोटिंग पैटर्न पर दिख सकता है। ग्रामीणों का मानना है कि जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है, उस अनुपात में उनकी आमदनी नहीं बढ़ रही। किसानों ने बताया कि फसलों का समर्थन मूल्य 20-25 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ जाने से उन्हें खास फायदा नहीं हो रहा क्योंकि खेती की लागत में इससे कहीं ज्यादा इजाफा हो जाता है। किसान कर्ज माफी योजना भी याद किसानों के लिए एक बड़ा मुद्दा कर्ज माफी योजना है। कई किसानों ने एनबीटी की टीम को बताया कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने 15 महीने के दौरान उन्हें किसान कर्ज माफी योजना का लाभ देने की कोशिश की। कुछ किसानों को इसका फायदा मिला भी, लेकिन सरकार बदलते ही इस पर रोक लग गई। पूर्व विधायक के परिवार का रवैया भी अहम बीजेपी के लिए पूर्व विधायक जुगल किशोर बागरी के बेटे पुष्पराज को टिकट नहीं देना भी भारी पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि प्रतिमा बागरी को क्षेत्र में लोग ज्यादा जानते नहीं हैं। कांग्रेस प्रत्याशी पिछले चुनाव में हार चुकी हैं, इसलिए लोग उन्हें मजबूत उम्मीदवार नहीं मानते, लेकिन यह जरूर कहते हैं कि पुष्पराज के प्रत्याशी होने से बीजेपी फायदे की हालत में होती। उनके समर्थक चुनाव में कितने एक्टिव होंगे, इसको लेकर अब भी अटकलें लगाई जा रही हैं। सीएम की घोषणाओं का कितना असर मुख्यमंत्री हाल के दिनों में यहां तीन बार आ चुके हैं और रविवार को फिर आने वाले हैं। उनकी सभाओं में खूब भीड़ भी जुट रही है, लेकिन सीएम की घोषणाओं को लोग ज्यादा महत्व नहीं दे रहे। शिवराज ने क्षेत्र में कॉलेज शुरू करने और स्टेडियम बनाने का ऐलान किया है, लेकिन उम्रदराज ग्रामीणों का कहना है कि ये वादा उन्होंने पहली बार 2008 में किया था जब सीएम बनने के बाद वे यहां पहली बार आए थे। वहीं, कुछ लोगों का यह भी मानना है कि कांग्रेस के राज में विकास कार्य ठप पड़ जाते हैं। बीजेपी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि का फायदा भी मिल सकता है। उज्जवला और हर घर नल जैसी योजनाएं भी ग्रामीण क्षेत्रों में असर डाल सकती हैं। सीधे मुकाबले में कौन किस पर भारी, कहना मुश्किल बीजेपी के विधायक रहे जुगल किशोर बागरी के निधन से खाली हुई सीट पर इस बार बीजेपी और कांग्रेस का सीधा मुकाबला है। बीजेपी ने प्रतिमा बागरी () को उम्मीदवार बनाया है जो पहली बार चुनाव लड़ रही हैं। कांग्रेस ने कल्पना वर्मा () पर एक बार फिर से भरोसा जताया है। कल्पना 2018 के चुनाव में भी पार्टी की उम्मीदवार थीं, लेकिन हार गई थीं।
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