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Ujjain News: 11 घंटे बाद एलपीजी टैंक से निकाला गया अंदर फंसे मजदूरों को, एनडीआरएफ के भी छूटे पसीने

उज्जैन एनडीआरएफ ने 11 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद एनडीआरएफ की टीम ने उज्जैन के नाजिया में स्थित एलपीजी कलेक्शन टैंक में गिरे दो मजदूरों के शव को निकाल लिया। यह काम मुश्किल था क्योंकि टैंक के आसपास टॉर्च या ऑक्सीजन सिलिंडर का उपयोग नहीं किया जा सकता था। इससे टैंक में विस्फोट हो सकता था और रेस्क्यू टीम के साथ पूरे प्लांट की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती। गुरुवार को टैंक में गिरे थे मजदूर कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले दो मजदूर लाखन सिंह और और राजेंद्र गुरुवार शाम करीब साढ़े चार बजे टैंक में गिरे थे। हादसा मेंटेनेंस कार्य के दौरान हुआ। एलपीजी की बुलेट टैंक में सफाई की जा रही थी। एक मजदूर ने पानी का फ्लो देखने के लिए टैंक के अंदर झांका। टैंक के अंदर मौजूद गैसों की वजह से बेहोश हो गया और और अंदर गिर गया। दूसरा मजदूर उसे देखने गया और वह भी अंदर गिर गया। तब बाकी मजदूरों ने सफाई का काम रोक दिया और अधिकारियों को जानकारी दी। रेस्क्यू में एलपीजी से मुश्किल रेस्क्यू टीम के लिए मुश्किलें ज्यादा थीं क्योंकि मामला एलपीजी से जुड़ा था। टॉर्च या धातु की बनी चीजें रेस्क्यू में इस्तेमाल नहीं हो सकती थीं। अधिकारियों ने ग्रासिम इंडस्ट्रीज से एक खास कंप्रेसर और ब्लोअर मंगाया जिस पर आग का असर नहीं होता। पहले बुलैट टैंक में मौजूद पानी और गैस को बाहर निकाला गया। टैंक के अंदर गया एनडीआरएफ का अधिकारी भोपाल से एनडीआरएफ की टीम शुक्रवार सुबह करीब दो बजे उज्जैन पहुंची। टीम में शामिल एक अधिकारी टैंक के अंदर जाने को तैयार हुआ। समस्या यह थी कि अंदर जाने वाला शख्स सांस कैसे लेगा। इसके लिए कंप्रेसर की मदद ली गई जिससे 60 मीटर दूर से ऑक्सीजन सप्लाय की जा सकती है। सुबह करीब 3.40 बजे वह पहले लाखन सिंह का शव लेकर बाहर आया। इसके 15 मिनट बाद राजेंद्र सिंह की बॉडी निकाली गई। रस्सी या टॉर्च तक का उपयोग नहीं शवों को बाहर निकालने के लिए रस्सी तक का उपयोग नहीं किया गया। इससे फ्रिक्शन पैदा होती और आग लग सकती थी। शवों के बाहर निकाले जाने के बाद आक्रोशित ग्रामीणों का गुस्सा भी शांत हुआ। हादसे के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण प्लांट के पास जमा हो गए थे और इंदौर-कोया हाईवे को जाम कर दिया था। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश इधर, उज्जैन के कलेक्टर ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि मेंटेनेंस के दौरान प्लांट में सुरक्षा के उपायों की अनदेखी तो नहीं की गई।


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