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Vaccination Indore: नहीं बनाएं दूरी, दूसरी डोज जरूरी




 Vaccination Indore। 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की शत प्रतिशत आबादी को कोरोना की पहली डोज लगाकर देशभर में नाम कमाने वाले इंदौरियों की दूसरी डोज से दूरी हर किसी की चिंता बढ़ा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार दूसरी डोज नहीं लगवाने वालों को संक्रमण का खतरा दोनों डोज लगवाने वालों के मुकाबले कई गुना ज्यादा होता है। शहर में करीब साढ़े छह लाख लोग ऐसे हैं, जो पहली डोज लगवाने के 84 दिन बाद भी दूसरी डोज लगवाने टीकाकरण केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं।

कभी काम की अधिकता तो कभी छोटी-मोटी बीमारी का बहाना बनाकर कई लोग दूसरी डोज लगवाने से बच रहे हैं। इन लोगों को भरोसा है कि पहली डोज उन्हें संक्रमण से बचा लेगी, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना की पहली डोज से बनी एंटीबाडी अस्थायी होती है। इसे स्थायी बनाने के लिए दूसरी डोज जरूरी है। सिर्फ पहली डोज लगवाने वाले खुद तो संक्रमित हो ही सकते हैं, साथ ही ये लोग स्वस्थ लोगों के लिए विषाणुवाहक भी बन सकते हैं।

 इधर शासन-प्रशासन दूसरी डोज को लेकर सख्ती बरतने की तैयारी में है। जल्द ही सार्वजनिक स्थान जैसे मंदिर, पार्क जिम, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन आदि जगहों पर ऐसे लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जा सकता है जिन्हें दूसरी डोज नहीं लगा है।

कोरोना के पहली डोज को लेकर इंदौरियों में उत्साह का आलम यह था कि जिले की 18 वर्ष से अधिक उम्र की शत प्रतिशत जनता को पहली डोज लग चुका है, लेकिन ऐसा उत्साह दूसरी डोज को लेकर नजर नहीं आ रहा। स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार शहर में 6 लाख 51 हजार लोग ऐसे हैं जिन्हें पहली डोज लगवाए 84 दिन बीत चुके हैं, लेकिन ये लोग दूसरी डोज नहीं लगवा रहे। चिकित्सकों के अनुसार दूसरी डोज लगवाने के बाद भी कम से कम दो सप्ताह स्थायी एंटीबाडी बनने में लगते हैं। ऐसे में सिर्फ पहली डोज के भरोसे कोरोना से निबटने का सपना देख रहे लोगों को यह भूल महंगी पड़ सकती है। जरूरी है कि तय समय पर कोरोना की दूसरी डोज लगवाई जाए।

दूसरी डोज के बिना संक्रमण संभव

भ्रांति है कि कोरोना की पहली डोज लगाकर संक्रमण से पूरी तरह से बचा जा सकता है। हकीकत यह है कि दूसरी डोज लगाने के भी दो सप्ताह एंटीबाडी बनने में लगते हैं। जिन्होंने सिर्फ पहली डोज लगवाई है, उनके संक्रमित होने और संक्रमण को दूसरे लोगों तक पहुंचाने का खतरा ज्यादा होता है।


दूसरी डोज जरूरी

संक्रमण से बचने के लिए दूसरी डोज जरूरी है। दूसरी डोज से परहेज की भूल भारी पड़ सकती है। जरूरी है कि समय पर दूसरी डोज लगवाई जाए। पहली डोज लगवाए 84 दिन से ज्यादा समय हो गया हो तो भी दूसरी डोज लगवाई जा सकती है। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित है।

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