एक तीर दो निशाने, प्रेगनेंसी में कोविड वैक्सीन लगवाने से नवजात शिशु में 6 महीने तक बनेगी एंटीबॉडी
क्या प्रेगनेंसी में कोरोना वायरस का टीका लगवाना चाहिए ? इस सवाल का जवाब है हां। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) ने भी गर्भवती महिलाओं को कोरोना की वैक्सीन की सलाह दी है और इसे सुरक्षित माना है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) का भी मानना है कि कोरोना के टीके गर्भवती महिलाओं या बच्चों में किसी दुष्प्रभाव का कारण नहीं बनते हैं। अब एक नई रिसर्च में बताया गया है कि प्रेगनेंसी के दौरान कोरोना की वैक्सीन लगवाने से आने वाले नवजात शिशु में एंटीबॉडी का लेवल अधिक हो सकता है। अध्ययन के अनुसार, जो महिलाएं गर्भवस्था के दौरान कोरोना वायरस का टीका (Covid-19 vaccine) लगवाती हैं, उनके आने वाले शिशुओं में अधिक और लंबे समय तक एंटीबॉडी विकसित हो सकती है। जबकि टीका नहीं लगवाने वाली और कोविड से संक्रमित होने वाली महिलाओं से पैदा हुए बच्चों में ऐसा नहीं होता है। मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल (MGH) के अध्ययन से पता चला है कि कोविड से संक्रमित महिलाओं की तुलना में टीका लगवा चुकी महिलाओं में एंटीबॉडी लेवल अधिक था। दो महीने के बाद, टीका लगवा चुकी महिलाओं से पैदा हुए 98 प्रतिशत शिशुओं (49 में से 48) में प्रोटेक्टिव इम्युनोग्लोबुलिन जी (IgG) का पता लगाने योग्य स्तर था, जो रक्त में पाया जाने वाला सबसे आम एंटीबॉडी है।(फोटो साभार: TOI)Covid vaccine benefits for pregnant: सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) का भी मानना है कि कोरोना के टीके गर्भवती महिलाओं या बच्चों में किसी दुष्प्रभाव का कारण नहीं बनते हैं। अब एक नई रिसर्च में बताया गया है कि प्रेगनेंसी के दौरान कोरोना की वैक्सीन लगवाने से आने वाले नवजात शिशु में एंटीबॉडी का लेवल अधिक हो सकता है।

क्या प्रेगनेंसी में कोरोना वायरस का टीका लगवाना चाहिए ? इस सवाल का जवाब है हां।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO)
ने भी गर्भवती महिलाओं को कोरोना की वैक्सीन की सलाह दी है और इसे सुरक्षित माना है।
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC)
का भी मानना है कि कोरोना के टीके गर्भवती महिलाओं या बच्चों में किसी दुष्प्रभाव का कारण नहीं बनते हैं। अब एक नई रिसर्च में बताया गया है कि प्रेगनेंसी के दौरान कोरोना की वैक्सीन लगवाने से आने वाले नवजात शिशु में एंटीबॉडी का लेवल अधिक हो सकता है।
अध्ययन के अनुसार, जो महिलाएं गर्भवस्था के दौरान
कोरोना वायरस का टीका (Covid-19 vaccine
) लगवाती हैं, उनके आने वाले शिशुओं में अधिक और लंबे समय तक एंटीबॉडी विकसित हो सकती है। जबकि टीका नहीं लगवाने वाली और कोविड से संक्रमित होने वाली महिलाओं से पैदा हुए बच्चों में ऐसा नहीं होता है।
मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल (MGH) के अध्ययन से पता चला है कि
कोविड से संक्रमित महिलाओं की तुलना में टीका लगवा चुकी महिलाओं में एंटीबॉडी लेवल अधिक था। दो महीने के बाद, टीका लगवा चुकी महिलाओं से पैदा हुए 98 प्रतिशत शिशुओं (49 में से 48) में प्रोटेक्टिव इम्युनोग्लोबुलिन जी (IgG) का पता लगाने योग्य स्तर था, जो रक्त में पाया जाने वाला सबसे आम एंटीबॉडी है।
(फोटो साभार: TOI)
शिशुओं में 6 महीनों तक बना रहा एंटीबॉडी लेवल

शोधकर्ताओं ने छह महीनों के बाद टीका लगवाने वाली माताओं से पैदा हुए 28 शिशुओं को देखा और पाया कि 57 प्रतिशत (28 में से 16) में अभी भी पता लगाने योग्य आईजीजी था। इसकी तुलना केवल 8 प्रतिशत (12 में से 1) संक्रमित माताओं से हुई।
गंभीर बीमारी से सुरक्षा देता है एंटीबॉडी लेवल

MGH की डॉक्टर एंड्रिया एडलो ने कहा कि
यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि एक शिशु को कोविड से पूरी तरह से बचाने के लिए एंटीबॉडी का लेवल कितना होना चाहिए लेकिन यह कहा जा सकता है कि एंटी-स्पाइक आईजीजी लेवल गंभीर बीमारी से सुरक्षा दे सकता है।
एक तीर से दो निशाने

डॉक्टर एडलो ने कहा है कि
से पता चलता है कि टीका लगवाने से केवल माताओं को स्थायी सुरक्षा मिलती है बल्कि एंटीबॉडी कम से कम छह महीने की उम्र तक अधिकांश शिशुओं में बनी रहती है।
महिलाओं को दी गई mRNA वैक्सीन

यह अध्ययन द जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन (जेएएमए) में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन में उन महिलाओं को शामिल किया गया था जिन्हें एमआरएनए वैक्सीन की दो खुराक का टीका लगाया गया था या 20 से 32 सप्ताह के गर्भ में संक्रमित होने पर, जब जीवन देने वाली नाल के माध्यम से एंटीबॉडी का स्थानांतरण अपने चरम पर होता है।
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