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ICU में दो बार वेंटिलेटर पर रहीं थीं लता मंगेशकर, जानें क्‍यों होता है ये लोगों की आखिरी उम्‍मीद

स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने रविवार सुबह आखिरी सांस ली। पिछले कई दिनों से वह वेंटिलेटर पर थीं। बता दें कि लता मंगेशकर पहले कोरोना की चपेट में आई थीं। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और आईसीयू में इलाज चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। इससे पहले 2019 में भी फेफड़ों में गंभीर इंफेक्शन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी थी , जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ गई थी। वैसे वेंटिलेटर का नाम सुनकर हम सभी काफी डर जाते हैं। क्योंकि इससे इस बात का अहसास तो हो जाता है, कि मरीज की जान खतरे में हैं। लेकिन वेंटिलेटर को लेकर आधी-अधूरी जानकारी व्यक्ति को बेवजह और भी ज्यादा डरा देती है। डॉक्टर्स की मानें, तो वेंटिलेटर मरीज की जान बचाने के लिए बहुत ही उपयोगी यंत्र है। यह एक तरह की मशीन है, जो व्यक्ति को सांस लेने में मदद करती है। कुछ असाधारण परीस्थितियों में मरीज को वेंटिलेटर की सुविधा दी जाती है और जैसे ही मरीज का स्वस्थ्य ठीक होता है , वेंटिलेटर हटा लिया जाता है। तो आइए जानते हैं कि क्या होता है वेंटिलेटर और लोगों को इसकी जरूरत क्यों पड़ती है।(फोटो साभार: TOI)

डॉक्टर्स का कहना है कि वेंटिलेटर से बीमारी ठीक नहीं होती, बल्कि इसकी मदद से बस व्यक्ति सांस ले सकता है। निमोनिया, सीओपीडी, मास्तिष्क में चोट और स्ट्रोक जैसी कई स्थितियों में वेंटिलेटर के उपयोग की जरूरत होती है।


Lata Mangeshkar: ICU में दो बार वेंटिलेटर पर रहीं थीं लता मंगेशकर, जानें क्‍यों होता है ये लोगों की आखिरी उम्‍मीद

स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने रविवार सुबह आखिरी सांस ली। पिछले कई दिनों से वह वेंटिलेटर पर थीं। बता दें कि लता मंगेशकर पहले कोरोना की चपेट में आई थीं। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था और आईसीयू में इलाज चल रहा था। हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। इससे पहले 2019 में भी फेफड़ों में गंभीर इंफेक्शन के कारण उनकी तबीयत बिगड़ी थी , जिसके बाद उन्हें वेंटिलेटर पर रखने की नौबत आ गई थी।

वैसे वेंटिलेटर का नाम सुनकर हम सभी काफी डर जाते हैं। क्योंकि इससे इस बात का अहसास तो हो जाता है, कि मरीज की जान खतरे में हैं। लेकिन वेंटिलेटर को लेकर आधी-अधूरी जानकारी व्यक्ति को बेवजह और भी ज्यादा डरा देती है। डॉक्टर्स की मानें, तो

वेंटिलेटर मरीज की जान बचाने के लिए बहुत ही उपयोगी यंत्र है

। यह एक तरह की मशीन है, जो व्यक्ति को सांस लेने में मदद करती है। कुछ असाधारण परीस्थितियों में मरीज को वेंटिलेटर की सुविधा दी जाती है और जैसे ही मरीज का स्वस्थ्य ठीक होता है , वेंटिलेटर हटा लिया जाता है। तो आइए जानते हैं कि क्या होता है वेंटिलेटर और लोगों को इसकी जरूरत क्यों पड़ती है।

(फोटो साभार: TOI)



​वेंटिलेटर क्या है
​वेंटिलेटर क्या है

वेंटिलेटर एक ऐसा उपकरण है, जो फेफड़ों में हवा को पंप करता है। ICU में रहने वाले लोगों को इस लाइफ सपोर्ट सिस्टम की जरूरत होती है।

कोविड-19

के बाद से वेंटिलर की मांग बढ़ गई है।



​वेंटिलेटर क्या करता है
​वेंटिलेटर क्या करता है

वेंटिलेटर एक ऐसा उपकरण है , जो मरीज में हो रही सांस लेने की दिक्कत को खत्म करता है। इसे

वेंट या ब्रीदिंग मशीन भी कहा जाता है

। यदि कोई व्यक्ति अपने दम पर पर्याप्त रूप से सांस नहीं ले पाता , तो डॉक्टर वेंटिलेटर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मरीज को कोई ऐसी बीमारी है, जो उनके

सांस लेने को प्रभावित

कर रही है। वेंटिलेटर कई तरह के होते हैं और हर वेंटिलेटर अलग-अलग तरह की सहायता देता है। किस प्रकार के वेंटिलेटर का यूज करना है, वह मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। जिन लोगों को लंबे समय तक वेंटिलेशन की जरूरत हरेती है, वे घर पर भी इनका इस्तेमाल कर सकते हैं।



​वेंटिलेटर की जरूरत किसे पड़ती है
​वेंटिलेटर की जरूरत किसे पड़ती है

निमोनिया

, सीओपीडी, मास्तिष्क में चोट और स्ट्रोक जैसी कई स्थितियों में वेंटिलेटर के उपयोग की जरूरत होती है। अगर आपके किसी प्रियजन को ऐसी बीमारी या स्थिति है , जिससे उनके फेफड़े के काम करने की क्षमता प्रभावित हो रही है, तो उसे वेंटिलटर पर रखा जाता है। इसके अलावा फेफड़ों की बीमारी,

रीढ़ की हड्डी में चोट

, अचानक हृदय गति के बंद हो जाने की स्थिति में मरीज को वेंटिलेटर पर रखा जाता है। वेंटिलेटर का इस्तेमाल तब भी आम है जब कोई मरीज सामान्य सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया के कारण अपने आप सांस नहीं ले पाता। यह जीवन के लिए खतरनाक स्थिति होती है। जिन लोगों को एक्यूट रेस्पीरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, निमोनिया और सेप्सिस जैसी बीमारी होती है डॉक्टर उनके लिए भी वेंटिलेटर का उपयोग करते हैं।



​कितने समय तक वेंटिलेटर पर रहने की जरूरत होती है
​कितने समय तक वेंटिलेटर पर रहने की जरूरत होती है

एक मरीज कितने समय तक वेंटिलेटर पर रहेगा

, यह उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। यदि आपको सर्जरी के दौरान वेंटिलेटर की जरूरत होती है , तो आप वेंटिलेटर पर होंगे। यहां आपको एक घंटे या उससे ज्यादा समय तक वेंटिलेटर पर रखा जा सकता है। अगर आपको किसी बीमरी के लिए वेंटिलेटर की जरूरत है, तो घंटों, दिनों, हफ्तों या फिर इससे ज्यादा समय तक रहने की जरूरत पड़ सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके फेफड़ों को मजबूत होने और अपने आप ठीक से काम करने में कितना समय लगता है।



​किसी प्रियजन को वेंटिलेटर पर रखा जाए, तो कैसे तैयार रहें-
​किसी प्रियजन को वेंटिलेटर पर रखा जाए, तो कैसे तैयार रहें-

यदि आपके प्रियजन को वेंटिलेटर पर शिफ्ट करने की प्लानिंग की जा रही है, तो उसका और आपका चिंतित होना स्वभाविक है। लेकिन इस वक्त आपको उनके लिए चीजों को थोड़ा आरामदायक बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

उनके डर और परेशनी को कम करने के लिए एक शांत माहौल बनाएं।

मरीज से मिलने वाले सभी लोगों को ठीक से हाथ धोने और मास्क पहनने के लिए कहें।

छोटे बच्चों या बीमार लोगों को अपने

प्रियजन या मरीज के पास जाने से रोंके

मरीज को आराम करने दें। उनसे उन विषयों पर बात करने से बचें, जो उन्हें परेशान कर रही हैं।



​वेंटिलेटर पर मरे हुए व्यक्ति को जीवित नहीं किया जा सकता
​वेंटिलेटर पर मरे हुए व्यक्ति को जीवित नहीं किया जा सकता

अक्सर लोग अपने परिजन की मौत के लिए अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाते हैं कि वेंटिलेटर पर रखकर चार्ज बढ़ाया जा रहा है। जबकि ऐसा नहीं होता। डॉक्टर्स बताते हैं कि जब तक मरीज का दिल काम करता है, वेंटिलेटर भी अपना काम करता रहेगा। मरीज की मृत्यु के बाद शरीर में अकड़न पैदा होने लगती है, ऐसे में वेंटिलेटर को लगाया जाना सही नहीं होता। क्योंकि जब शरीर का कोई अंग काम ही नहीं करेगा, तो

वेंटिलेटर कोई चमत्कार नहीं कर पाएगा

। इसलिए यह कहना कि वेंटिलेटर के द्वारा मरे हुए व्यक्ति को जीवित दिखाया जा सकता है, लोगों की गलत धारणा है।

वेंटिलेटर एक मशीन है, जो

फेफड़ों को काम करने में मदद करती

है। इस लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रहने से मरीज को ठीक होने में समय लग सकता है। क्योंकि गंभीर बीमारी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। वेंटिलेटर सपोर्ट बंद करने के बाद लगातार लक्षणों का अनुभव करने वाले लोगों को डॉक्टर से गाइडेंस लेनी चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।





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