बचपन में उखाड़ फेंका था अंग्रेजों का झंडा, रोटी में छिपाकर पहुंचाते थे संदेश... आजादी के सेनानी पारसनाथ राय का किस्सा
Independence Day: कैदियों के घरों से जो चिट्ठियां आती थीं, उन्हें जेलर पीछे गड्ढे में फिंकवा देता था। इस पर पारसनाथ राय ने शिकायती पत्र लिख दिया। निरीक्षण के लिए अधिकारी आए। बुलाने पर जंजीरों में जकड़े पारसनाथ को पेश किया गया। शास्त्री और फिरोज कहने लगे कि आज तो राय को खूब मार पड़ेगी। लेकिन निर्भीक पारस ने वह जगह दिखा दी, जहां पर बड़ी संख्या में सीलबंद पत्र फेंके पड़े थे। सच्चाई सामने थी, जेलर निलंबित कर दिया गया।
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