ISRO अब नहीं बनाएगा लॉन्च व्हीकल! प्राइवेट कंपनियों को सौंपेगा जिम्मा
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश के स्पेस सेक्टर को नया आयाम देने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसरो अब पारंपरिक रॉकेट और सामान्य सैटेलाइट्स के निर्माण की जिम्मेदारी धीरे-धीरे निजी क्षेत्र की कंपनियों को सौंपने जा रहा है। इस बड़े बदलाव का मुख्य उद्देश्य भारतीय अंतरिक्ष उद्योग में निजी भागीदारी को बढ़ावा देना और वाणिज्यिक गतिविधियों को तेज करना है। अब निजी कंपनियां लॉन्च व्हीकल यानी रॉकेट के असेंबलिंग और निर्माण का काम संभालेंगी, जिससे देश में अंतरिक्ष निर्माण की क्षमता में तेजी से इजाफा होगा।
रिसर्च और वैज्ञानिक मिशनों पर रहेगा इसरो का ध्यान
इस नए फैसले के बाद इसरो अपनी पूरी ऊर्जा और संसाधन उन्नत अनुसंधान, नई तकनीकों के विकास और जटिल वैज्ञानिक मिशनों पर केंद्रित करेगा। गगनयान, चंद्रयान और मंगलयान जैसे भविष्य के महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण अभियानों के लिए इसरो खुद तकनीक विकसित करेगा। पारंपरिक निर्माण कार्यों से मुक्त होने के बाद इसरो के वैज्ञानिक गहरे अंतरिक्ष की खोज और आधुनिक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान में अधिक समय दे सकेंगे, जो देश को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगा।
2033 तक 44 अरब डॉलर की स्पेस इकोनॉमी का लक्ष्य
यह नीतिगत बदलाव भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को 2033 तक 44 अरब डॉलर (लगभग 3.6 लाख करोड़ रुपये) के स्तर तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान में वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी लगभग दो प्रतिशत है, जिसे बढ़ाने के लिए सरकार निजी कंपनियों और नए स्पेस स्टार्टअप्स को तेजी से प्रोत्साहित कर रही है। निजी क्षेत्र के इस प्रवेश से न केवल देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि भारत वैश्विक कमर्शियल सैटेलाइट लॉन्चिंग मार्केट में एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।