मध्यप्रदेश बना वन्यजीव संरक्षण का वैश्विक रोल मॉडल: अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस पर अहम घोषणाएं
भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) में अंतर्राष्ट्रीय जैव-विविधता दिवस के अवसर पर एक भव्य राज्यस्तरीय कार्यक्रम एवं चीता संरक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट और वैज्ञानिक 'रोल मॉडल' करार दिया। मुख्यमंत्री ने गर्व के साथ साझा किया कि प्रदेश अब 'टाइगर', 'लेपर्ड', 'घड़ियाल', 'वल्चर' और 'वुल्फ' स्टेट के साथ-साथ 'चीता स्टेट' के रूप में भी अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर चुका है।
वर्तमान में कूनो और गांधी सागर अभयारण्य में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है। राज्य में वन्यजीवों के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए 100 साल बाद 8 जंगली भैंसों का सफल पुनर्वास किया गया है। इसके अलावा, कूनो नदी में 33 दुर्लभ कछुए और 53 घड़ियाल छोड़े गए हैं, जबकि हलाली डैम क्षेत्र में 5 लुप्तप्राय गिद्धों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान कई अत्याधुनिक तकनीकी पहलों का भी शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केंद्रीय वन मंत्री भूपेंद्र यादव ने संयुक्त रूप से 'एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल' और आईआईएफएम में नवस्थापित 'डेटा ड्रिवन लैब' का लोकार्पण किया। जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए 5 रुपये का विशेष डाक टिकट ('माय स्टैम्प') और जैव-विविधता रिपोर्ट-2026 लॉन्च की गई। साथ ही, वन्यजीवों के त्वरित रेस्क्यू के लिए वन विभाग को 20 नए अत्याधुनिक वाहन भी सौंपे गए।
