संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का कड़ा संदेश: 'आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस'
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने वैश्विक शांति, सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का कड़ा रुख दुनिया के सामने रखा। अपने संबोधन में उन्होंने बिना नाम लिए पाकिस्तान को फटकार लगाई और कई अहम वैश्विक मुद्दों पर बात की।
इस खबर के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
आतंकवाद पर सीधा प्रहार: जयशंकर ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति है और इसमें कोई ढील नहीं दी जाएगी। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, उन्हें अपना रवैया बदलना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि "दोस्ती और आतंकवाद एक साथ नहीं चल सकते।"
वैश्विक शांति और संघर्ष: दुनिया भर में चल रहे संघर्षों को बड़ी चिंता बताते हुए उन्होंने कहा कि शांति भंग होने का सीधा असर विकास और प्रगति पर पड़ता है। यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में उन्होंने पीएम मोदी की बात दोहराई कि 'अंतहीन युद्धों पर अब लगाम लगनी चाहिए।'
समुद्री सुरक्षा: अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों और उनके कर्मचारियों को निशाना बनाए जाने को उन्होंने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया और सभी से संयम बरतने की अपील की।
पश्चिम एशिया और फिलिस्तीन: जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत फिलिस्तीनी नागरिकों की मानवीय सहायता कर रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए 'टू-स्टेट सॉल्यूशन' (दो-राष्ट्र समाधान) को जरूरी बताया।
ग्लोबल साउथ की चिंताएं: उन्होंने विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) के सामने आ रहे '4F' संकट—भोजन (Food), ईंधन (Fuel), उर्वरक (Fertilizer) और वित्त (Finance)—पर भी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।
कुल मिलाकर, जयशंकर के भाषण का मुख्य संदेश यह था कि शांति के बिना स्थिरता और विकास संभव नहीं है। दुनिया में हथियारों के इस्तेमाल और संस्थाओं को कमजोर करने की बढ़ती आदत पर भी उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की।
