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विशेष संपादकीय: राष्ट्रीय हिन्दी मेल का 31 वर्षों का निर्बाध सफर - झूठ को सच कभी नहीं लिखा, बोली लगी करोड़ों में पर बिके नहीं हम..



राष्ट्रीय हिन्दी मेल के 31 गौरवशाली वर्ष पूर्ण होने और प्रधान संपादक श्री विजय कुमार दास जी की 55 वर्षों की निर्भीक व बेदाग पत्रकारिता के लिए मध्य प्रदेश टाइम्स परिवार की ओर से हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।


विशेष संपादकीय: विजय कुमार दास की कलम से
55 साल की पत्रकारिता, 31 वर्षों का अखबार का निर्बाध सफर 
झूठ को सच कभी नहीं लिखा, बोली लगी करोड़ों में पर बिके नहीं हम...

अविभाजित मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ अंचल के राजनांदगांव शहर से 1971 में स्नातक होकर जब मैं पत्रकारिता के समर में कूदा तो मुझे यह अंदाजा नहीं था कि 55 साल की पत्रकारिता का सफर और 31 वर्षों के अखबार के प्रकाशन के बावजूद मैं आज भी उतना ही तरोताजा रहूंगा जितना कि मैंने उस समय 1972 में केरला राज्य से बड़े आदिवासी जिला बस्तर में आदिवासियों के शोषण के खिलाफ पत्रकारिता की शुरुआत तो की लेकिन 1972 में मेरी कर्मभूमि भोपाल हो जाएगी ऐसा मैंने कभी सोचा नहीं था, लेकिन ऐसा हुआ। और राजधानी भोपाल में अलग-अलग संस्थानों में पत्रकारिता करने के 20 वर्ष बाद मुझे दोस्तों ने सलाह दी 'अब तोप मुकाबिल हो गया है, अखबार निकालो' और मैंने पहले रॉयल टच साप्ताहिक फिर पाक्षिक एमपी हिन्दी मेल गुलाबी पन्नों में निकालकर कसम खाई कि यदि मैं सरस्वती पुत्र बन गया हूं तो मुझे झूठ को कभी सच नहीं लिखना होगा। पाक्षिक हिन्दी मेल के गुलाबी पन्नों में मात्र 4 वर्षों के सफर ने भोपाल की पत्रकारिता ने जितनी विश्वसनीय पहचान दी वह सब आपके सामने हैं, परिणामस्वरूप पूंजीवादी पत्रकारिता की गिरफ्त से बाहर आने की ललक ने पद्म विभूषित वरिष्ठ पत्रकार मेरे बड़े भाई विजयदत्त श्रीधर ने मुझे प्रेरित किया कि, तुम पाक्षिक हिन्दी मेल को दैनिक करो और इसका नाम राष्ट्रीय हिन्दी मेल रखो। मैं पूंजीवादी पत्रकारिता से आहत हो गया हूं तुम्हारे अखबार का संपादक बनूंगा। मैं श्रीधर जी का ऋणि हूं उन्होंने भी यही कहा कि, तोप मुकाबिल हो गया है दैनिक अखबार निकालो और ऐसा ही हुआ। 


25 अक्टूबर 1996 के दिन राष्ट्रीय हिन्दी मेल दैनिक समाचार पत्र का लोकार्पण तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और भाजपा के संस्थापकों में एक शिखर पुरुष स्व. कैलाश नारायण सारंग तथा भोपाल के प्रथम नागरिक तत्कालीन महापौर उमाशंकर गुप्ता और मप्र के तत्कालीन मुख्यसचिव को मिलाकर करीब 25 नौकरशाह, 25 भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और पूरे भोपाल के एक सैकड़ा पत्रकारों की उपस्थिति में दिल्ली के राहुल देव और प्रथम संपादक श्रीधर जी ने 26 अक्टूबर 1996 के प्रथम अंक का लोकार्पण उत्सवी माहौल में करवाया। 


मुख्यअतिथि की आसंदी पर तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने भाषण में यह कह दिया कि, उन्होंने जिन-जिन अखबारों का लोकार्पण किया है वे सबके सब बंद हो गए, इसलिए विजयदास सरकार के भरोसे कभी मत रहना। दम हो तो अखबार निकालते रहना। दिग्विजय सिंह के भाषण को सुनकर मंच पर अध्यक्षता करने वाले वरिष्ठ नेता कैलाश सारंग, तत्कालीन मुख्यसचिव कृपाशंकर शर्मा सबके सब चौंक गए थे। तब स्व. सारंग जी ने कहा था कि, राजा दिग्विजय सिंह मेरी बात सुन लो कान खोलकर 'कौन कहता है आसमां में सुराग नहीं होते, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो' बस यह शेर सुनाकर सारंग जी ने दिग्विजय सिंह से कहा राजा तुम भी देखना हम भी देखेंगे गैर राजवंशी परिवार में जन्मा पत्रकार विजयदास का अखबार कभी बंद नहीं होगा। उनकी जुबान लग गई और हम हमारी श्रीमती माया दास ने अपनी प्रोफेसरी की नौकरी छोड़कर पत्रकारिता के सफर में हमारा दामन थाम लिया और फिर होना क्या था हमारा पूरा परिवार ही पत्रकार बन गया, लेखनी का धनी हो गया। बोली करोड़ों में लगी लेकिन हम बिके नहीं। और हम रूके नहीं। पाठकों का स्नेह, मप्र की जनता का आशीर्वाद और हमारे प्रति विश्वसनीयता राष्ट्रीय हिन्दी मेल के 30 वर्षों का सफर पूरा करने के बाद आज 31 वें वर्ष में हम यह कहने के योग्य हो गए हैं कि, 'बोली करोड़ों में लगी लेकिन बिके नहीं हम'। 


आज हमारे राष्ट्रीय हिन्दी मेल समाचार पत्र के उन सभी साथियों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए जिन लोगों ने हमारे साथ कदमताल करते हुए अपने बड़े मुकाम भी हासिल किए हैं और इसकी संख्या 10-20 में नहीं सैकड़ों में है। हम आदरणीय विजयदत्त श्रीधर जी के बाद जितने भी संपादक आए चाहे दाऊलाल साखीजी हो, राजेन्द्र नूतन जी हो, गोपाल जोशी जी हो, यशवंत अरगड़े जी हो, समूह में कुछ समय के लिए लज्जाशंकर हरदेनिया जी आए, एलएन शीतल आए, चंद्रप्रकाश भारद्वाज गीत दीक्षित रहे, ग्वालियर में राकेश अचल जी, पंकज पाठक आए, सुरेश तिवारी जी आए, रविन्द्र जैन जी आए, मलय श्रीवास्तव जी रहे, विजय शुक्ला जी, वरिष्ठ पत्रकार धनंजय प्रताप सिंह जी, चंद्रभान सोलंकी, अनुराग द्वारी, अनुराग उपाध्याय, प्रकाश भटनागर, अजीत सिंह, मलय बैनर्जी, ज्ञानेश उपाध्याय, रवि भोई, प्रमोद भारद्वाज, गौरव चतुर्वेदी, रामेश्वर धाकड़, अनीता चौबे, नौशाद कुरेैशी तथा छत्तीसगढ़ में रम्मू श्रीवास्तवजी हमारे साथ रहे। ऐसे सैंकड़ों साथियों ने इस अखबार को सींचा, परिणाम आपके सामने हैं परिस्थितियां कितनी भी ऊबड़-खाबड़ रही हों, हमने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के दूसरे कार्यकाल में 5 वर्षों तक सरकार के बिना सहयोग के अखबार निकाला। उससे ज्यादा कठिन सफर हमारा मप्र के सबसे बड़े बेईमान नौकरशाह वर्तमान अतिरिक्त मुख्यसचिव संजय दुबे की अकर्मण्यता के कारण निकला। 


बता दें कि बिजली माफियाओं के चंगुल में आकर संजय दुबे ने राष्ट्रीय हिन्दी मेल मुद्रण परिसर की साढ़े तीन वर्षों तक 50 लाख का अवैध बिल देकर बिजली काटे रखी और हमने अखबार बंद नहीं होने दिया। धन्य हो सुप्रीम कोर्ट के विद्वान अधिवक्ता श्री विवेक तन्खा के पुत्र युवा विद्वान अधिवक्ता वरुण तन्खा का जिन्होंने जस्टिस विवेक अग्रवाल के सामने राष्ट्रीय हिन्दी मेल का पक्ष रखा और जस्टिस विवेक अग्रवाल ने तथ्यों को सुनने के बाद हमारे साथ न्याय किया और हमारी बिजली तब रोशन हुई जब हमारा सब कुछ बिक गया लेकिन हम फिर भी डटे रहे। आश्चर्य एवं चौकाने वाली बात यह है कि, जिन चोर नौकरशाहों की बजह से हमें यातनाएं झेलनी पड़ीं ये चोर नौकरशाह आज भी तलबे चाटकर सरकार की बारह बजा रहे हैं और हम हिन्दी मेल वालों से कहता है हमने ब्लैकमेल किया है लेकिन हम अपने सिद्धांतों से आज भी भटके नहीं हैं और यह ताकत हमें मप्र के 99 प्रतिशत नौकरशाहों ने ही दी है। जिन्होंने हम पर भरोसा किया है। 100 प्रतिशत पाठकों ने दी जिन्होंने हम पर विश्वास किया है। एक हजार प्रतिशत उन आलोचकों ने हमारी ताकत बढ़ाई जिन्होंने गलतियों पर उंगलियां उठाईं। 10 हजार प्रतिशत हमारे वे दोस्त शक्तिपुंज बने जिन्होंने विषम से विषम परिस्थितियों में हमें संतुष्टि है। 


हमने आज तक किसी को ब्लैकमेल नहीं किया। यदि पर्यावरण को सुधारना, शिक्षा और स्वास्थ्य के प्रति समर्पित होकर पत्रकारिता करना, युवाओं के भविष्य की चिंता करना यदि ब्लैकमेलिग है तो यह हम करते भी रहेंगे लेकिन किसी के ब्लैकमेलर कहने से रूकेंगे नहीं। पिछला इतिहास यदि हम छोड़ भी दें तो वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. यादव और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को यह बताने में हमें गर्व है कि, हम सुप्रीम कोर्ट में पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन के खिलाफ गए हैं सरकार के खिलाफ नहीं। नियमों के उल्लंघन करने वालों को सजा आप दें या न दें हमने आपके विवेक पर छोड़ा है। लेकिन आने वाली पीढ़ी जिसका नेतृत्व अब राष्ट्रीय हिन्दी मेल में प्रबंध संपादक पृथ्विजयकुमार दास करने जा रहे हैं। 


आज 31वीं वर्षगांठ पर मैं यह विश्वास दिलाता हूं कि, वे अपनी बड़ी बहन मैत्री दास और गाथा दास तथा अपनी धर्मपत्नी अपराजिता के साथ राष्ट्रीय हिन्दी मेल के 31 वर्षों के फलसफे को आगे बढ़ाने में मुझसे और माया दासजी से भी ज्यादा सक्षम होंगे यह मेरा भरोसा है और नए समूह संपादक आशीष दुबे के नेतृत्व में विश्वास और बढ़ेगा। इसलिए उम्मीद करना गलत नहीं होगा कि बस जैसा आपने हमारा साथ निभाया है ऐसा ही साथ निभाते रहिए हम कभी आपको निराश नहीं होने देंगे। 


जय मध्यप्रदेश - जय छत्तीसगढ़

Vijay Kumar Das

(लेखक राष्ट्रीय हिन्दी मेल समाचार पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं)