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किसानों को 'अन्नदाता' के साथ 'ऊर्जादाता' बनाने की पहल: नई दिल्ली में 7वें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस का शानदार आगाज


 

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री के विजन को धरातल पर उतारते हुए अब देश के किसान केवल 'अन्नदाता' नहीं, बल्कि 'ऊर्जादाता' भी बनेंगे। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय '7वें एग्रीवोल्टाइक वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस' के उद्घाटन सत्र में यह संदेश प्रमुखता से गूंजा। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस महासम्मेलन का शुभारंभ करते हुए कहा कि "ऊपर सोलर पैनल, नीचे लहलहाएगी फसल" का यह मॉडल विश्व कल्याण और किसानों की आर्थिक समृद्धि का नया मार्ग प्रशस्त करेगा।

समारोह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री चौहान ने जोर दिया कि देश में 85 प्रतिशत छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनकी औसत जोत मात्र 0.96 हेक्टेयर है। इसलिए एग्रीवोल्टाइक नीतियां पूरी तरह व्यावहारिक होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल खेतों में सोलर पैनल लगा देना पर्याप्त नहीं है; पैनलों की ऊंचाई, खंभों की दूरी और जुताई की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसान बिना किसी बाधा के अपनी पसंद की फसल और फसल चक्र अपना सकें। इसके अलावा, वर्षा जल का सुरक्षित निकास, ग्रिड तक पहुंच और पारदर्शी भुगतान तंत्र सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की सक्रिय भागीदारी और अनुबंध टूटने पर किसानों को वित्तीय नुकसान से बचाने पर भी विशेष बल दिया।

इस अवसर पर केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि सरकार जल्द ही पीएम कुसुम योजना के अगले चरण के तहत दुनिया का सबसे महत्वाकांक्षी एग्रीवोल्टाइक कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। उन्होंने 'टेरी' (TERI) के एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि देश की 4.75 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि (लगभग 30%) एग्रीवोल्टाइक के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। यदि इसके केवल 10 प्रतिशत हिस्से का उपयोग किया जाए, तो भारत 2050 तक की अपनी पूरी अनुमानित बिजली मांग को अकेले ही पूरा कर सकता है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए मंत्री जोशी ने बताया कि गैर-जीवाश्म बिजली की स्थापित क्षमता 308 गीगावाट को पार कर गई है और बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण इसकी लागत 2012-13 के ₹11 प्रति यूनिट से घटकर मात्र ₹2.60 प्रति यूनिट रह गई है। पीएम कुसुम योजना के तहत अब तक 30 लाख कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा चुका है। आगामी एग्रीवोल्टाइक कार्यक्रम से ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 3.32 लाख स्थानीय रोजगार पैदा होने की उम्मीद है, जिससे युवाओं का शहरों की ओर पलायन रुकेगा।

वर्तमान में भारतीय कृषि क्षेत्र 4.5 प्रतिशत की मजबूत विकास दर और 52.55 अरब डॉलर के रिकॉर्ड कृषि निर्यात के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है। कृषि और ऊर्जा का यह नया गठबंधन भारतीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदलने के लिए पूरी तरह तैयार है।