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'सबकी योजना, सबका विकास' अभियान का शुभारंभ

 


New Delhi: देश भर में 2 अक्टूबर 2026 को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। इन सभाओं का मुख्य उद्देश्य पंचायतों को अधिक सशक्त बनाना, सार्वजनिक सेवाओं में सुधार करना और ग्रामीण भारत में जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए परिवर्तनकारी शासन सुधारों पर व्यापक चर्चा करना है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर जन योजना अभियान (पीपीसी) 2026-27, जिसे "सबकी योजना, सबका विकास" का नाम दिया गया है, का भी शुभारंभ होगा।

इस अभियान के अंतर्गत ग्राम पंचायतें वित्तीय वर्ष 2027-28 के लिए अपनी ग्राम पंचायत विकास योजनाएं (जीपीडीपी) तैयार करेंगी। ये योजनाएं पूर्णतः साक्ष्य-आधारित और जन-सहभागिता पर निर्भर होंगी, जिससे विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँच सके।

विभिन्न मंत्रालयों का सहयोग और प्रमुख योजनाओं की समीक्षा

पंचायती राज मंत्रालय अन्य केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर विकास के लिए 'समग्र सरकारी दृष्टिकोण' के साथ कार्य कर रहा है। ग्राम सभाओं में नागरिक और स्थानीय जनप्रतिनिधि मिलकर स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान करेंगे और विकास की प्राथमिकताएं तय करेंगे। विशेष ग्राम सभाओं के दौरान निम्नलिखित प्रमुख पहलों और योजनाओं पर प्रकाश डाला जाएगा:
  • पंचायती राज: ई-ग्राम स्वराज के माध्यम से डिजिटल शासन, स्वामित्व योजना, और पंचायत उन्नति सूचकांक।
  • ग्रामीण विकास: 'विकसित भारत - रोजगार और आजीविका मिशन' के तहत 125 दिनों के मजदूरी रोजगार की गारंटी।
  • पेयजल एवं स्वच्छता: जल जीवन मिशन के तहत नल कनेक्शन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत अपशिष्ट प्रबंधन।
  • जल संरक्षण: भूजल पुनर्भरण के लिए जल संचय जन भागीदारी।
  • खाद्य एवं उपभोक्ता मामले: 'एक राष्ट्र एक राशन कार्ड', प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन।
  • भूमि संसाधन: भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण के लिए डीआईएलआरएमपी कार्यक्रम।

जागरूकता, नए कानून और सामाजिक पहल

वर्ष 2018 से चल रहे जन योजना अभियान के तहत अब तक 2.55 लाख से अधिक पंचायतें अपनी विकास योजनाएं 'ई-ग्रामस्वराज' पोर्टल पर अपलोड कर चुकी हैं। विकास कार्यों की योजना बनाने के साथ-साथ इन ग्राम सभाओं में नए आपराधिक कानूनों (जैसे भारतीय न्याय संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता), डिजिटल परिवर्तन और सहकारी समितियों को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। इसके अलावा, 'बाल विवाह मुक्त भारत' और 'नशा मुक्त भारत' अभियानों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई जाएगी। 'स्वच्छता ही सेवा 2026' अभियान के समापन के अवसर पर ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 पर भी विशेष चर्चा होगी।

नागरिकों से भागीदारी की अपील

सरकार ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इन ग्राम सभाओं में बढ़-चढ़कर भाग लें। 'सबकी योजना, सबका विकास' के माध्यम से नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही पंचायतें आत्मनिर्भर और सशक्त बनेंगी, जो अंततः 'विकसित भारत' के निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देंगी।

पंचायती राज मंत्रालय, प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा आयोजित विशेष अभियान 6.0 का 2 से 31 अक्टूबर 2026 तक पालन करेगा। इस अभियान का उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता को संस्थागत रूप देना, लंबित मामलों को कम करना, इन कार्यालयों के साथ जनता की बातचीत को सुगम बनाना और नियमों के अनुसार ई-कचरे का संग्रहण, पृथक्करण और निपटान सुनिश्चित करना है। मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आज आयोजित स्वच्छता अभियान और श्रमदान गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया और स्वच्छ भारत की दिशा में सामूहिक प्रयास में शामिल हुए। 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) से शुरू होकर 31 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले कार्यान्वयन चरण के दौरान मंत्रालय 176 लोक शिकायतों, 100 लोक शिकायत अपीलों, 9 संसदीय आश्वासनों, 15 सांसद संदर्भों और 4 राज्य सरकार संदर्भों का निपटान करेगा और साथ ही बेकार सामग्री का निपटान करके भवन में स्थान भी सृजित करेगा।

मंत्रालय 2021 से विशेष अभियान के हर संस्करण में सक्रिय रूप से भाग लेता रहा है।

15 से 30 सितंबर 2026 तक आयोजित तैयारी चरण में मंत्रालय की अभियान के लिए तैयारियों को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव डॉ. विनीत जोशी ने 17 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित जीवन भारती भवन में मंत्रालय के विभिन्न विभागों का दौरा कर अभियान के लिए मंत्रालय की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को बेहतर कार्यस्थल वातावरण सुनिश्चित करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए कार्यालय परिसर को साफ रखने के लिए प्रोत्साहित किया। तैयारी चरण के दौरान, मंत्रालय ने लंबित मामलों (संसद सदस्यों, राज्य सरकारों और प्रधानमंत्री कार्यालय के संदर्भों और संसदीय मामलों सहित) के समाधान के लिए पहचान की। अभिलेख प्रबंधन को सुव्यवस्थित किया गया, स्वच्छता अभियान स्थलों का चयन किया गया, निपटान के लिए अनुपयोगी सामग्रियों का आकलन किया गया और ई-कचरा प्रबंधन नियमों के अंतर्गत सुरक्षित निपटान के लिए ई-कचरा वस्तुओं की पहचान की गई। लंबित मामलों के निपटान के लिए संबंधित डेटा विशेष अभियान (एससीडीपीएम) 6.0 के लिए समर्पित पोर्टल पर अपलोड किया गया। कार्यान्वयन चरण स्वच्छता, कुशल शासन और बेहतर कार्यस्थल प्रबंधन के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगा, जिससे स्वच्छ और अधिक उत्पादक कार्य वातावरण को बढ़ावा मिलेगा।