जबलपुर में स्थापित हुआ महाकोशल का पहला हरित डेटा सेंटर, एआई चालित डिजिटल गवर्नेंस से बदलेगी शहर की सूरत
मध्य प्रदेश के महाकोशल क्षेत्र को तकनीकी और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सितम्बर 2026 में एक नया इतिहास रचा गया है। जबलपुर के तिलहरी स्थित आईटी पार्क परिसर में 'महाकोशल रीजनल डेटा केंद्र' और 'एआई-संचालित नागरिक सेवा ग्रिड' का औपचारिक शुभारंभ कर दिया गया है। यह पहल न केवल जबलपुर शहर को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख केंद्र बनाएगी, बल्कि पूरे संभाग की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाएगी।
महाकोशल का पहला ग्रीन डेटा सेंटर और आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर
जबलपुर में स्थापित किया गया यह नया डेटा सेंटर पूरी तरह से हरित ऊर्जा और आधुनिक शीतलन तकनीकों पर आधारित है। इसे नर्मदा घाटी की भौगोलिक और पर्यावरणीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक ग्रीन कंप्यूटिंग मानकों पर डिजाइन किया गया है। यह डेटा सेंटर मध्य प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों और सरकारी विभागों के डेटा को सुरक्षित रखने के साथ-साथ निजी आईटी कंपनियों को भी क्लाउड स्टोरेज सेवाएं प्रदान करेगा। इस केंद्र के शुरू होने से जबलपुर में स्थानीय स्तर पर सैकड़ों उच्च-स्तरीय तकनीकी नौकरियों के अवसर पैदा हुए हैं, जिससे क्षेत्र के युवाओं का पलायन रुकेगा।
एआई चालित स्मार्ट सिटी ग्रिड और नागरिक सेवाएं
डेटा सेंटर के साथ ही जबलपुर नगर निगम और स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने संयुक्त रूप से 'जबलपुर एआई-गवर्नेंस टूलकिट' लागू किया है। इस प्रणाली के तहत शहर की यातायात व्यवस्था, जल आपूर्ति, कचरा प्रबंधन और स्ट्रीट लाइट नेटवर्क को मशीन लर्निंग एल्गोरिदम से जोड़ा गया है। शहर के प्रमुख चौराहों पर लगे कैमरे अब एआई विश्लेषण के जरिए ट्रैफिक सिग्नल की अवधि को वास्तविक समय के वाहनों के दबाव के अनुसार स्वतः समायोजित करते हैं। इसके अतिरिक्त, नागरिक समस्याओं की ट्रैकिंग के लिए एआई आधारित चैटबॉट एकीकृत किया गया है, जो शिकायत दर्ज होने के कुछ ही घंटों के भीतर संबंधित वार्ड अधिकारी को अलर्ट भेजता है।
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर से सुलभ हुई प्रशासनिक प्रक्रियाएं
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण से जबलपुर जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के निवासियों को नामांतरण, संपत्ति कर भुगतान, भवन मानचित्र स्वीकृति और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं। ब्लॉकचेन और एआई के समन्वय से डिजिटल पट्टों और भूमि अभिलेखों का सत्यापन कुछ ही मिनटों में पूरा हो रहा है। जबलपुर का यह तकनीकी मॉडल अब मध्य प्रदेश के अन्य द्वितीय श्रेणी शहरों के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है, जो यह साबित करता है कि आधुनिक तकनीक से सुशासन की राह कितनी आसान हो सकती है।