भिण्ड जिले में मौ और गोहद तहसील में पटवारी हल्कों में परिवर्तन
भिण्ड जिले में पटवारी हल्कों का पुनर्गठन
मध्य प्रदेश के भिण्ड जिले से प्रशासनिक पुनर्गठन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। राज्य सरकार के राजस्व विभाग ने मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों के तहत भिण्ड जिले की मौ और गोहद तहसील में पटवारी हल्कों की सीमाओं में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सुचारू, पारदर्शी और आम जनता के लिए सुलभ बनाना है, ताकि भू-राजस्व से संबंधित सरकारी कार्यों का निष्पादन सुगमता से हो सके।
तहसीलों के नए प्रशासनिक आंकड़े
जारी किए गए आदेश के अनुसार, मौ तहसील के अंतर्गत आने वाले पटवारी हल्का क्रमांक 61 और 62 को मौ तहसील की सीमा से अपवर्जित यानी पृथक कर दिया गया है। इन दोनों पटवारी हल्कों को अब गोहद तहसील के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है। इस पुनर्गठन के पश्चात् दोनों तहसीलों के आंकड़ों में परिवर्तन आया है। अब तहसील मौ के अंतर्गत कुल 30 पटवारी हल्के और 80 ग्राम शेष रहेंगे। दूसरी ओर, गोहद तहसील का दायरा बढ़ गया है और अब इसमें कुल 62 पटवारी हल्के तथा 140 ग्राम शामिल हो गए हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण जनजीवन पर प्रभाव
पटवारी हल्कों की सीमाओं में किए गए इस फेरबदल से स्थानीय निवासियों और किसानों को अपने राजस्व संबंधी कार्यों के निष्पादन में आसानी होगी। नामांतरण, सीमांकन, खसरा-खतौनी की प्रति प्राप्त करने और फसल क्षतिपूर्ति जैसे विषयों में अब नए प्रशासनिक क्षेत्राधिकार लागू होंगे। गोहद तहसील में जोड़े गए नए क्षेत्रों के ग्रामीणों को अब अपने तहसील स्तर के कार्यों के लिए गोहद स्थित शासकीय कार्यालयों की सेवाओं का लाभ उठाना होगा। इससे दोनों तहसीलों में प्रशासनिक कार्यभार का संतुलन भी बेहतर ढंग से स्थापित हो सकेगा।
राजपत्र में प्रकाशन और क्रियान्वयन
राज्य सरकार द्वारा इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय को पूरी तरह से लागू कर दिया गया है और इस आदेश का आधिकारिक प्रकाशन मध्य प्रदेश के राजपत्र में भी किया जा चुका है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही यह नई व्यवस्था कानूनी रूप से प्रभावी हो गई है। राजस्व विभाग के संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे अभिलेखों का अद्यतनीकरण शीघ्र पूर्ण करें, ताकि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।