खामियों पर चिंतन, खूबियों का संतुलन, इसी का नाम है समीक्षाः संदीप चवरे
Publish Date: | Sat, 27 Jun 2020 04:07 AM (IST)
माटी के रंग, किरदार के संग का दसवां सत्र रहा समीक्षा के नाम
छिंदवाड़ा। किरदार सचिव ऋषभ स्थापक ने बताया कि किरदार संस्थान व ओम मंच पर अस्तित्व के साझा प्रयास से आयोजित कार्यशाला माटी के रंग किरदार के संग के माध्यम से छिंदवाड़ा की माटी के वरिष्ठ रंगकर्मियों एवं साहित्यकारों की क्लास युवा रंगकर्मियों के लिए कारगर साबित हो रही है जिसके परिणामस्वरूप नई प्रस्तुतियों के रूप में बहुत जल्द देखने को मिलेंगे। इस कार्यशाला का दसवां सत्र एक रंगकर्मी, स्वयं की समीक्षा कैसे करे! विषय पर आधारित रहा जिसमें विशेष अतिथि विद्वान के रूप में प्रख्यात रंग समीक्षक एवं संदीप चवरे उपस्थित रहे। उन्होंने सबसे पहले समीक्षक की भूमिका पर बात करते हुए कहा कि एक समीक्षक का सबसे आवश्यक गुण होता है पूर्वाग्रहों से मुक्त रहना। समीक्षक तभी अच्छा समीक्षक बन सकता है जब वो किसी भी नाट्यदल की पिछली किसी नाट्य प्रस्तुति को भूल जो समक्ष है केवल उस प्रस्तुति पर ध्यान केंद्रित रखे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब रंग समीक्षक स्वयं की समीक्षा करता है तो उसके लिए मंच पर और उससे परे काम करना आसान हो जाता है। अभिनेता पर टिप्पणी करते हुए उल्लेखनीय बात कही कि पात्र के अनुसार ढलना एक अभिनेता के लिए आवश्यक होता है। कलाकार अपनी कल्पनाओं के जरिए ही अपने पात्र को जीवंत बनाता है। नाटक को देखने वाले को जिज्ञासा होती है कि किताब में लिखा हुआ पात्र मंच पर कैसा दिखाई देगा। रंगकर्मी को परिभाषित करते हुए संदीप ने कहा कि केवल मंच में अभिनय करने वाला ही कलाकार नही वरन मंच व्यवस्थापक संगीतकार कहानीकार और पर्दे के पीछे इससे जुड़े सहयोगी भी रंगकर्मी ही कहलाएंगे। अभिनय के जरिए प्रस्तुति दर्शकों तक पहुंचती है इस लिए उसकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है और समीक्षा भी। वे आगे युवा रंगकर्मियों को नसीहत देते हुए कहते हैं कि आजकल के युवा अभिनेताओं तथा निर्देशकों में धैर्य की कमी है, वे बहुत जल्दी सब कुछ हासिल कर लेना चाहते हैं, ऐसे साथियों को चाहिए कि वे विचारशील बनें और विचारशील बनने के लिए उन्हें किताबों की ओर रुख करना पड़ेगा। अध्ययन की क्षमता कम हो रही है जबकि कला एवं साहित्य जगत से जुड़े रहने के लिए एवं उसमे रुचि बनाए रखने के लिए अध्ययन करना आवश्यक होता है अध्ययन करने से नई-नई जानकारियां तो प्राप्त होती हैं, इसके साथ ही भाषा पर नियंत्रण भी होता है। रंग निर्देशकों पर बात करते हुए श्री चवरे ने बताया कि निर्देशक जब बिना कल्पना के सीधे नकल पर उतर आए तो निर्देशक नहीं रह जाता है, एक निर्देशक को कल्पनाशील होने के साथ साथ खुद को नित नये नवाचारों से भी जोड़ना रूरी होता है। इस कार्यशाला के दौरान मार्गदर्शक के रूप में एन एस डी के वरिष्ठ रंगकर्मी मनोहर तैली, डॉ. अमर सिंह, फिल्मकार केशव कैथवास, मोतीराम पवार उपस्थित रहे। इस पूरी ऑनलाइन कार्यशाला का निर्देशन डॉक्टर पवन नेमा तथा संयोजन शिरिन आनंद दुबे कर रहे हैं। वहीं ओम् टीम से तृप्ति विश्वकर्मा द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।
1 जुलाई से शुरू होगी सूत्र बस सेवा सर्विस
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14-वैश्य फेडरेशन के सदस्यों ने सफर करने वाले यात्रियों के लिए दिए ट्रेवल किट
छिंदवाड़ा। नगर पालिक निगम क्षेत्र में एक जुलाई से सूत्र बस सेवा सर्विस शुरू हो रही है। जिसको लेकर शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के सदस्यों ने निगम कार्यालय पहुंचकर निगम आयुक्त को ट्रेवल किट दी। इस किट में सेनेटाइजर सहित मास्क दिए गए है। ताकि बस में यात्रा करने वाले यात्री शारीरिक दूरी के पालन करते हुए कोरोना से संक्रमित होने से बच सकें। अंतराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन के जिला अध्यक्ष नितिन खंडेलवाल ने बताया कि नगर पालिक निगम द्वारा 1 जुलाई से शहर में सूत्र बस सेवा की सर्विस शुरू की जा रही है। जिसके चलते जिले भर के यात्री से इधर से उधर आना जाने करेंगें। इस बात को ध्यान में रखते हुए फेडरेशन के सदस्यों ने नगर पालिक निगम आयुक्त हिमांशु सिंह को ट्रेवल किट दी गई। ताकि इस किट को पहनकर यात्री सफर कर सकेंगे और कोरोना संक्रमित होने से बच सकेंगे।
लोकतंत्र सेनानी संघ ने पोला ग्राउंड दशहरा मैदान में किया पौधारोपण
छिंदवाड़ा। लोकतंत्र सेनानी संघ द्वारा आपातकाल की 45 वीं वर्षगाठ पर स्थानीय पोला ग्राऊंड दशहरा मैदान पर 45 वृक्षों का पौधारोपण किया गया ।लोकतंत्र सेनानी संघ के जिलाध्यक्ष रमेश पोफली अधिवक्ता ने बताया कि विगत दिनों गलवान घाटी में चीन द्वारा किये गये आक्रमण से 20 भारतीय सैनिकों की शहादत हुई थी और करीब 50 सैनिक हताहत हुये थे इस घटना से सम्पूर्ण भारतवर्ष शोकाकुल हो गया था और चीन के इस रवैये के विरोध में चीन के विरूद्ध कड़ी सैन्य कार्यवाही करने की मांग करते हुये सम्पूर्ण भारतवर्ष में जो चीन के माध्यम से सामान आता है उसका बहिष्कार होना चाहिये ताकि हम अपने स्वदेशी के आधार पर अपने देश को मजबूत और आत्मनिर्भर बना सके। साथ ही शहादत हुये सैनिकों की मृतात्मा की शांति के लिये एवं सैनिक परिवारों को इस आघात को सहन करने की शक्ति परमपिता परमेश्वर दे एवं इस दुख की घड़ी में हम सब सेना के साथ कंधे से कंधा लगाकर खड़े है। अंत में शहीदों को दो मिनट का मौन रखके श्रद्धांजलि अर्पित की गई । इस अवसर पर लोकतंत्र सेनानी संघ के जिलाध्यक्ष रमेश पोफली, अजय औरंगाबादकर, मोहन रोड़े, ईश्वरी चौरसिया, दादा रूपचंद राय, विलास नरोटे, अशोक पोफली, ठाकुर दौलत सिंह, मधुकर पोफली, दीनदयाल मोहने, राजेन्द्र राय, उपासराव अल्डक, श्रीमती संगीता रोड़े, बुटानी भाई एवं परासिया से लोकतंत्र सेनानी संघ से आई महिलाएं शामिल हुई।
Posted By: Nai Dunia News Network
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