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दो दिन के बाद थमी बारिश, फसल बर्बाद, 150 से अधिक मवेशियों की हुई मौत

Publish Date: | Mon, 31 Aug 2020 06:12 AM (IST)

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– ग्राम संगम, माथनी, करमाकड़ी जोबनी में सबसे अधिक नुकसान, 1942 से ज्यादा विकराल है बाढ़

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सौंसर में किसान का संतरे का बगीचा बारिश में बह गया।

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रविवार को पूर्व राज्य मंत्री ने लिया हालात का जायजा।

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बाढ़ से किसानों की फसल हुई बर्बाद।

छिंदवाड़ा/सौंसर (नवदुनिया प्रतिनिधि)। पिछले दो दिनों से लगातार बारिश का सिलसिला रविवार को थम गया, दोपहर को धूप भी निकली, लेकिन बाढ़ जो तबाही के मंजर पीछे छोड़ गई है। वो भुलाए नहीं भूल रहे हैं। लोगों की मानें तो बीते दस से बीस सालों में इस तरह की बाढ़ कभी नहीं देखी। चौरई विधायक सुजीत चौधरी की मानें तो बिछुआ, चांद और चौरई क्षेत्र में 60 से 70 फीसदी फसल बर्बाद हो गई है। उमरानाला, छिंदवाड़ा, हर्रई ब्लाक में भी यही स्थिति है। सौंसर में किसानों को भारी नुकसान हुआ है, संतरे के खेत भी बर्बाद हो गए पशुधन की भी हानि हुई है। सांसद नकुल नाथ भी जल्द हवाई सर्वेक्षण करने वाले हैं।

बाढ़ और बारिश ने सौंसर क्षेत्र के कई परिवारों की छत रोजी-रोटी छीन ली है। तीसरे दिन लोग अपने खेत में पहुंचे तो बाढ़ से तबाह हुई फसलों और जानवरों के अवशेष नजर आए, बाढ़ से तबाही होने के बाद में क्षेत्र के संगम जोबनी करमाकड़ी, माथनी के कई किसानों को अब अपनी जीवन यात्रा फिर से शुरू करनी पड़ेगी, क्षेत्र में सन 1942 में आई बाढ़ से भी बड़ी बाढ़ तबाही मानी जा रही है, रविवार को बाढ़ से बर्बाद हुए घरों सामानों पशुओं, को पीड़ित परिवार किसान सहजते हुए नजर आए, प्रशासन अधिकारियों पटवारी के अलग-अलग दल बनाकर ग्रामीण क्षेत्रों पहुंचकर मकान फसल जानवर नुकासनी की उसकी रिपोर्ट तैयार करते नजर आए। क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ से जनजीवन के साथ फसलों की तबाही मचा दी है, क्षेत्र के बुजुर्गों बुद्धिजीवी किसानों का कहना है कि 1942 में इस तरह की भीषण बाढ़ आई थी, परंतु इस समय उससे भी अधिक बाढ़ आई है। जबकि 1942 के समय नदियों का स्वरूप कम था, परंतु वर्तमान में क्षेत्र की नदियों का क्षेत्रफल काफी बड़ा गहरा तथा चौड़ा हो गया है, फिर भी इस समय नदी में बाढ़ आई है। इससे अंदाज लगाया जा सकता है 2 दिन तक क्षेत्र में आई हुई बाढ़ का स्वरूप कितना विकराल और बड़ा होगा।

सबसे ज्यादा हुआ 4 गांवों में नुकसानः

प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार लगातार दो दिन तक बाढ़ और बारिश के कारण सबसे अधिक नुकसान सौसर क्षेत्र में आने वाले 4 ग्रामों में हुआ है, जिसमें ग्राम संगम, माथनी, करमाकड़ी जोबनी खापा शामिल है। लोधीखेड़ा क्षेत्र के अंतर्गत पुराना संगम गाव में पानी भरने के चलते पूरे गांव के बच्चों महिलाओं बुजुर्गों को प्रशासन के द्वारा खाली करते हुए समीप के गांव संगम सांगवा में रुकाया गया था, यहां पर बड़े पैमाने पर पशु मकान फसल नुकसानी हुई है। वही हाल ग्राम जोबनी में नदी किनारे लगने वाले खेतों की फसलें का है। ग्राम माथनी में खेतो की फसलें चौपट हो गई। जोबनी के किसान दशरथ पाटिल इंदूबाई वाहने, भावराव सोमकुंवर, नासिर पटेल, उमेश बंसोड़, सतीश बंसोड़, जीवतया उइके, हरिदास सोमकुंवर, रमेश सोमकुंवर,सत्यभामा सोमकुंवर, राजू सोमकुंवर, रुखमा ढोके, कमला बाई सोमकूवर, अमन इवनाती, पूसा धुर्व के खेतों में पानी भरने से कपास तुवर मक्का की फसल बर्बाद हो गई है।

कपास और तुअर की फसल बर्बादः

बाढ़ के कारण सौंसर क्षेत्र की सबसे अधिक कपास तुवर मक्का की फसल को नुकसान हुआ है, जोबनी क्षेत्र के किसान अंकुश पाटिल ने बताया कि ग्राम पंचायत जोबनी खापा बारादेवी, रामुढाना में सबसे अधिक नुकसान कपास, तुअर और मक्के की फसल को हुआ है, खेतों में बाढ़ आने से पूरी की पूरी फसले बर्बाद हो गई है, ग्राम पुराना सावंगा के प्रवीन ताजने ने बताया कि इस क्षेत्र में भी सबसे अधिक तुपर कपास की फसल का नुकसान हुआ है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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