सरकारी में पर्याप्त क्षमता फिर भी निजी लैब से करा रहे जांच, रोज एक करा़़ेड रुपये से ज्यादा भुगतान
Publish Date: | Thu, 10 Sep 2020 04:08 AM (IST)
सरकारी में पर्याप्त क्षमता फिर भी निजी लैब से करा रहे जांच, रोज एक करा़़ेड रुपये से ज्यादा भुगतान-0000
– अहमदाबाद की निजी लैब में जांच के लिए हर दिन भेजे जा रहे 6000 से ज्यादा सैंपल
शशिकांत तिवारी। भोपाल
प्रदेश की विभिन्न सरकारी लैब में कोरोना के सैंपल जांचने की पर्याप्त क्षमता होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा अहमदाबाद की सुप्राटेक लैब में जांच के लिए सैंपल भेजे जा रहे हैं। यहां रोज 6000 से 7000 सैंपलों की जांच कराई जा रही है। इसके एवज में सरकार प्रति सैंपल 1980 रुपये की दर से रोज करीब सवा करोड़ रुपये इस लैब को भुगतान कर रही है। जांच किट, कर्मचारी, मशीनें सभी का खर्च मिला लें तो भी सरकारी अस्पताल में एक सैंपल पर जांच का खर्च 900 से 1000 रुपये आता है। इसके बाद भी दोगुने खर्च पर निजी लैब से जांच कराने पर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।
प्रदेश में स्थित राज्य सरकार और केंद्र सरकार की लैब और रैपिड एंटीजन टेस्ट मिलाकर हर दिन 22080 सैंपल जांचने की क्षमता है। प्रदेश भर में कोरोना के इस महीने रोज औसत 23315 सैंपलों की और अगस्त में 19672 सैंपलों की जांच कराई है। इस लिहाज से सभी सैंपलों की जांच सरकारी लैब में हो सकती थी। जैसे जैसे मरीज बढ़ रहे हैं, सरकारी लैब की जांच क्षमता भी लगातार बढ़ाई जा रही है। इसके अलावा रैपिड एंटीजन टेस्ट की सुविधा शुरू होने से भी आरटी-पीसीआर जांच पर निर्भरता कम हो गई है। निजी लैब से जांच कराने की जगह सरकार रैपिड टेस्ट की संख्या बढ़ा सकती है। इससे एक जांच 440 रुपये में पड़ती है। मौके पर ही 15 मिनट में जांच रिपोर्ट मिल जाती है। आईसीआर ने इस जांच को भी भरोसेमंद मानते हुए अनुमति दी है।
किट सस्ती होने से कम हो गया जांच का खर्च
कोरोना का एक सैंपल जांचने के लिए मार्च में किट 900 से 1200 रुपये में मिल रही थीं। इसके बाद कई कंपनियों ने उत्पादन शुरू किया तो किट की कीमत लगातार कम होती गई। कॉर्पोरेशन ने जून में सुप्राटेक लैब के साथ अनुबंध किया था, उस दौरान 750 रुपये में यह किट मिल रही थीं। अब किट 250 रुपये से लेकर 400 तक में मिल रही हैं। किट सस्ती होने के बाद भी निजी लैब को 1980 रुपये प्रति सैंपल के लिहाज से भुगतान किया जा रहा है।
निजी लैब से एक साल के लिए है अनुबंध
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने बताया कि मप्र पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉर्पोरेशन ने आरटी-पीसीआर तकनीक से जांच के लिए टेंडर किया था। इसमें सुप्राटेक की दर सबसे कम 1980 रुपये प्रति सैंपल होने की वजह से अनुबंध किया था। 1 जुलाई से एक साल के लिए लैब से अनुबंध किया था। इसमें शर्त यह थी कि कॉर्पोरेशन एक माह पहले से नोटिस देकर अनुबंध खत्म कर सकेगा।
प्रदेश में रोजाना औसत सैंपलिंग
माह रोजाना औसत
जुलाई 12971
अगस्त 19672
सितंबर (8 तारीख तक) 23315
सरकारी लैब में आरटी-पीसीआर तकनीक से रोजाना जांच की क्षमता-17080
सरकार की तरफ से रैपिड एंटीजन टेस्ट से जांच की सुविधा 5000
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रोजाना सरकारी जांच की कुल क्षमता रैपिड व आरटी-पीसीआर मिलाकर 22080
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प्रदेश की निजी लैब में रोजाना जांच की क्षमता 2500
सुप्राटेक लैब में रोजाना जांच की अधिकतम क्षमता 6000
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जुलाई में अपने यहां लैब की क्षमता कम थी, इसलिए लोगों के हित में निजी लैब से जांच के लिए अनुबंध किया था। अपनी लैब की क्षमता लगातार बढ़ रही है। जल्द ही इस बात की समीक्षा करेंगे कि निजी लैब को अनुबंध जारी रखना है या नहीं।
डॉ. प्रभुराम चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री मप्र
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Posted By: Nai Dunia News Network
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