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12 जनपथ... इस बंगले की भी है अजब कहानी, रामविलास पासवान यहीं से बने थे राजनीति के 'मौसम वैज्ञानिक'

नई दिल्ली 10 जनपथ इसका नाम लेते ही दिमाग में सीधे यही बात पहुंचती है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का आवास ठीक वैसे ही 12 जनपथ की पहचान कल तक हुआ करती थी। 12 जनपथ यानी का आवास। बंगले के साथ पासवान का नाम इसलिए भी जुड़ गया था क्योंकि पिछले 31 सालों से यह सरकारी बंगला उनके नाम पर था। उनके निधन के बाद यह उम्मीद थी कि शायद चिराग पासवान केंद्र में मंत्री बनते तो बंगला बचा रहता लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अब 12 जनपथ पता होगा देश के नए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का। अगली सरकार किसकी बनेगी 10 जनपथ की बाउंड्री और 12 जनपथ की बाउंड्री सटी हुई है। इस बंगले की चर्चा उस वक्त भी ज्यादा हुई थी जब कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी 2004 में उनसे समर्थन मांगने टहलते हुए उनके आवास पहुंची थीं। देश में सरकारें बदलती गईं कभी तीसरा मोर्चा तो कभी यूपीए और कभी एनडीए। इन सबके बीच नहीं बदला तो रामविलास पासवान के आवास का पता 12 जनपथ। राजनीतिक गलियारों में इस बंगले को लेकर कई चर्चा होती रहती थी। हमेशा ही कहा जाता था कि रामविलास पासवान के इस बंगले में मौसम विभाग का एक दफ्तर है जिससे यह अनुमान लग जाता है कि अगली सरकार किसकी होगी। सरकार किसी की भी मंत्री रहे रामविलास पासवान राजनीति के मौसम वैज्ञानिक के नाम से मशहूर रामविलास पासवान की अधिकांश भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं। वो एक बेहद ही साधारण परिवार से आते थे और उनका राजनीति में कोई गॉडफादर भी नहीं था लेकिन अपने दम पर वो राजनीति के शिखर पर बने रहे। पिछले तीन दशक में केंद्र की सत्ता में आए हर राजनीतिक गठबंधन में वो शामिल होकर केंद्र में मंत्री भी बने। चाहें वो तीसरा मोर्चा की सरकार रही हो या यूपीए की। केंद्र में मंत्री बने रहे। 2014 के बाद वो एनडीए में शामिल हो गए और जब तक जीवित रहे केंद्र में मंत्री बने रहे। पशुपति पारस ने बंगला लेने से कर दिया इनकार लोजपा संस्थापक रामविलास पासवान पिछले साल अक्टूबर में निधन होने तक करीब तीन दशक इस बंगले में रहे थे। पिछले जुलाई महीने में केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के तहत आने वाले संपदा निदेशालय ने नोटिस जारी किया था। चिराग पासवान के चाचा पशुपति कुमार पारस पिछले महीने ही केंद्र में मंत्री बने हैं। उन्होंने भतीजे चिराग से चल रही रस्साकशी के चलते पशुपति पारस ने इस बंगले को लेने से इनकार कर दिया था। इनको भी खाली करना पड़ा था बंगला 2014 में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर को भी लोकसभा चुनाव में हार के बाद 3 साउथ एवेन्यू रोड स्थित बंगला खाली करना पड़ा था। हालांकि बाद में वो बीजेपी में शामिल हो गए। इसी प्रकार 12 तुगलक रोड स्थित बंगले में जहां पहले पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह रहा करते थे उसके बाद उनके बेटे अजित सिंह को 2014 में यह बंगला खाली करना पड़ा था। इन दो सरकारी बंगलों की भी पहचान पूर्व प्रधानमंत्री के बंगले से हो गई थी।


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