'गद्दारी', कैलाश विजयवर्गीय से दुश्मनी, 2023 में सीएम पद की दावेदारी... सुनिए ज्योतिरादित्य सिंधिया का जवाब
इंदौर केंद्रीय नगर उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया आशीर्वाद यात्रा (Ashirvad Yatra) में उमड़ रही भीड़ को देखकर गदगद हैं। आशीर्वाद यात्रा के अंतिम दिन इंदौर में उन्होंने रोड शो किया है। इससे पहले इंदौर में पत्रकारों से बात की थी। इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया ने हर मुद्दे पर जवाब दिया है। विपक्षी दल के लोग उनके परिवार पर गद्दारी के आरोप लगाते हैं, सिंधिया ने पहली बार इस पर भी बात की है। साथ ही कैलाश विजयवर्गीय (Kailash Vijayvargiya) की अनुपस्थिति पर भी जवाब दिया है। दरअसल, ज्योतिरादित्य सिंधिया की आशीर्वाद यात्रा में सीएम शिवराज से लेकर बीजेपी के तमाम बड़े नेता नजर आए हैं। वहीं, इंदौर के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय नहीं दिखे हैं। कैलाश विजयवर्गीय की अनुपस्थिति की वजह कहीं पुरानी दुश्मनी तो नहीं है। इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है। हमारे और उनके स्वभाव काफी मधुर हैं। हम दोनों एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव जरूर लड़ते रहे हैं लेकिन संबंध काफी अच्छे हैं। उन्होंने कहा कि आशीर्वाद यात्रा के दौरान एयरपोर्ट पर उन्होंने मेरा स्वागत किया था। इस दौरान उन्होंने मुझे गुलदस्ता दिया था। हम दोनों मिलकर इंदौर के विकास के लिए काम करेंगे। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि विधायक आकाश विजयवर्गीय हमेशा हमारे कार्यक्रम में इंदौर में रहते हैं। मीडिया के लोगों से सिंधिया ने कहा कि आप लोगों मशालेदार चीजें चाहिए। हम दाल भात खाकर संतुष्ट रहने वाले लोग हैं। सीएम पद की कोई अभिलाषा नहीं वहीं, 2023 में बीजेपी की तरफ से सीएम कौन होगा, क्या आपके मन में कोई अभिलाषा है। इस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि पद के लिए मेरी कोई अभिलाषा नहीं है। मैं जनसेवक के रूप में लोगों के लिए काम करना चाहता हूं। इसी रूप में मैं लोंगों के दिल में बसना चाहता हूं। गद्दारी पर दिया जवाब कांग्रेस छोड़ने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके परिवार के लोगों पर गद्दारी को लेकर आरोप लगाया जाता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया से इसे लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने आज खुलकर इस पर जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है, कांग्रेस के मुद्दों पर मुझे हंसी आती है। मुझे तो कहा गया था कि सड़क पर आ जाओ, मैं सड़क पर आ गया हूं। इसके साथ ही सिंधिया ने अपने पूर्वजों की गाथा भी सुनाई है। उन्होंने बताया कि कैसे हमारे परिवार के योद्धाओं ने लड़ाई लड़ी है। महाराज ने कहा कि पानीपत की लड़ाई में सिंधिया परिवार के तीन लोगों का सिर काटकर बरछे पर लहराया गया था।
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