बुखार में गलती से भी न लें अश्वगंधा, हालत हो सकती है ज्यादा गंभीर, ये भी हैं 4 बड़े नुकसान
अश्वगंधा (Ashwagandha) का कई गुणों की वजह से विभिन्न बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है। आयुर्वेदिक में इसे बेहद गुणकारी औषधि बताया गया है। इसका उपयोग कई अन्य जड़ी-बूटियों के साथ भी किया जाता है। इसे इंडियन जिनसेंग के रूप में भी जाना जाता है। अश्वगंधा का सेवन टैबलेट या पाउडर के रूप में किया जा सकता है। वर्तमान समय में जब दुनिया एक संक्रामक वायरल बीमारी से जूझ रही है, इस आयुर्वेदिक दवा का उपयोग काफी बढ़ गया है। तनाव दूर करने, ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने और एकाग्रता में सुधार करने के लिए लोग हजारों वर्षों से अश्वगंधा का उपयोग कर रहे हैं। यह एक जड़ी-बूटी है, जो ताकत बढ़ा सकती है। अश्वगंधा का पौधा पीले फूलों वाला एक छोटी झाड़ी है, जो भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के कई हिस्सों में पाई जाती है। पौधे की जड़ या पत्तियों से अर्क या पाउडर का उपयोग विभिन्न स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है।मान जाता है कि अश्वगंधा एंटीऑक्सीडेंट का भंडार है जिस वजह से यह इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करता है। इतना ही नहीं, इसमें सर्दी-जुकाम जैसे रोगों से लड़ने की भी क्षमता होती है। बहुत से लोग अश्वगंधा का इस्तेमाल इम्यूनिटी पावर बढ़ाने और वायरल इन्फेक्शन से जुड़े जोखिम को कम करने के काढ़ा के रूप में कर रहे हैं। बेशक अश्वगंधा के अनगिनत स्वास्थ्य लाभ हैं लेकिन कुछ मामलों में इसका सेवन सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है।Ashwagandha ke side effects: बहुत से लोग अश्वगंधा का इस्तेमाल इम्यूनिटी पावर बढ़ाने और वायरल इन्फेक्शन से जुड़े जोखिम को कम करने के काढ़ा के रूप में कर रहे हैं। बेशक अश्वगंधा के अनगिनत स्वास्थ्य लाभ हैं लेकिन कुछ मामलों में इसका सेवन सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है।

अश्वगंधा (Ashwagandha)
का कई गुणों की वजह से विभिन्न बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता है।
आयुर्वेदिक में इसे बेहद गुणकारी औषधि
बताया गया है। इसका उपयोग कई अन्य जड़ी-बूटियों के साथ भी किया जाता है। इसे इंडियन जिनसेंग के रूप में भी जाना जाता है। अश्वगंधा का सेवन टैबलेट या पाउडर के रूप में किया जा सकता है। वर्तमान समय में जब दुनिया एक संक्रामक वायरल बीमारी से जूझ रही है, इस आयुर्वेदिक दवा का उपयोग काफी बढ़ गया है।
, ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने और एकाग्रता में सुधार करने के लिए लोग हजारों वर्षों से अश्वगंधा का उपयोग कर रहे हैं। यह एक जड़ी-बूटी है, जो ताकत बढ़ा सकती है। अश्वगंधा का पौधा पीले फूलों वाला एक छोटी झाड़ी है, जो भारत और दक्षिण पूर्व एशिया के कई हिस्सों में पाई जाती है। पौधे की जड़ या पत्तियों से अर्क या पाउडर का उपयोग विभिन्न स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है।
मान जाता है कि अश्वगंधा एंटीऑक्सीडेंट का भंडार है जिस वजह से यह
का काम करता है। इतना ही नहीं, इसमें सर्दी-जुकाम जैसे रोगों से लड़ने की भी क्षमता होती है। बहुत से लोग अश्वगंधा का इस्तेमाल इम्यूनिटी पावर बढ़ाने और वायरल इन्फेक्शन से जुड़े जोखिम को कम करने के काढ़ा के रूप में कर रहे हैं। बेशक अश्वगंधा के अनगिनत स्वास्थ्य लाभ हैं लेकिन कुछ मामलों में इसका सेवन सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है।
बुखार में अश्वगंधा का इस्तेमाल

आयुर्वेद चिकित्सक रेखा राधामणि के अनुसार,
बुखार होने पर अश्वगंधा का सेवन करने से बचना चाहिए। इसमें कई बायोएक्टिव यौगिक होते हैं जो एंटीऑक्सिडेंट, एंटी इंफ्लेमेटरी और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों को बढ़ाते हैं। यह सर्दी और फ्लू जैसी बीमारियों को रोकने में फायदेमंद है। लेकिन जब आपको बुखार हो, तो इस आयुर्वेदिक जड़ी बूटी से बचें क्योंकि शरीर के लिए इसे पचाना मुश्किल होता है। बुखार आपको कमजोर बनाता है और अन्य अंगों के कार्यों को भी बाधित करता है। यदि आप बुखार में अश्वगंधा लेते हैं, तो हो सकता है कि आपका पेट इसे पचा न पाए और आप दस्त और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हो सकते हैं।
अश्वगंधा के अन्य गंभीर साइड इफेक्ट्स

अश्वगंधा एक शक्तिशाली जड़ी बूटी है और इसके अधिक मात्रा में सेवन से कुछ गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। अश्वगंधा को हमेशा आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा बताई गई मात्रा में या पैकेज पर लिखी मात्रा में लेने की सलाह दी जाती है। इससे अधिक लेने पर पेट खराब,
हो सकती है। इसके अलावा, अगर लंबे समय तक अश्वगंधा का सेवन किया जाए तो इससे लीवर की समस्या हो सकती है। अगर आप आप गर्भवती हैं, स्तनपान करा रही हैं, तो इसे लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
अश्वगंधा कितनी मात्रा में लेना चाहिए

अश्वगंधा की कोई मानक खुराक नहीं है, यह पूरी तरह से आपके स्वास्थ्य और फिटनेस के स्तर पर निर्भर करता है। लेकिन अध्ययनों के अनुसार, जड़ी बूटी की सुरक्षित खुराक 125 मिलीग्राम से 5 ग्राम तक होती है, जिसे प्रति दिन 2-4 खुराक में विभाजित किया जाता है।
अश्वगंधा लेने का सही समय

इसकी खुराक को सुबह या शाम लेना बेहतर है। अगर आप इसे सुबह खाली पेट लेते हैं, तो इससे हल्की परेशानी हो सकती है। ऐसे में इसे नाश्ते के बाद या रात में लें। रात में इसे लेने से आपको आराम मिल सकता है और आपको बेहतर नींद में मदद मिल सकती है।
अंग्रेजी में इस स्टोरी को पढ़ने के लिए
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
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