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कभी अपनी खासियत की वजह से सोने से भी ज्यादा कीमती था ये मसाला, शरीर में यूं फूंक देता है जान

दालचीनी एक ऐसा मसाला है, जो अधिकांश भारतीय घरों में इस्तेमाल किया जाता है। यह छोटे सदाबहार पेड़ की भीतरी छाल से मिलती है , जो ऊंचाई में 15 फीट से लंबी नहीं होती। स्क्रैप की गई छाल को सूखने के लिए धूप में रखा जाता है, जहां यह रोल में मुड़ जाती है। जिसे दालचीनी की छड़ें कहा जाता है। इसमें हाई बीपी के अलावा ब्लड शुगर को कम करने और दीघार्यु बढ़ाने की अच्छी खासी क्षमता होती है। आप शायद न जानते हों, लेकिन कभी दालचीनी सोने से भी ज्यादा कीमती थी। मिडिवियल यूरोप में इसका उपयोग धार्मिक संस्कारों और स्वाद के लिए किया जाता था। 16वीं शताब्दी तक यह डच ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार में सबसे ज्यादा फायदा देने वाला मसाला था। दालचीनी की सुंगध और इसमें मौजूद औषधीय गुणों के कारण इसका उपयोग खाना पकाने में किया जाता है। भारत में आुयर्वेदिक दवाओं में भी इसका बखूबी इस्तेमाल होता है। हावर्ड हेल्थ में एमडी डॉ.उमा नायूड कहती हैं कि खाद्य पदार्थों में सुगंध मास्तिक के स्वास्थ्य को भी स्वस्थ रखती है। रिसर्चर्स ने पता लगाया है कि लौंग, दालचीनी, जायफल में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो न केवल याददाशत बल्कि तनाव को मैनेज करते हैं, जिससे नींद भी अच्छी आती है।

कई भारतीय मसालों ने अपनी एंटीऑक्सीडेंट क्षमताओं के कारण लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। दालचीनी को लेकर एक दावा किया गया है कि यह ब्लड शुगर और पाचन संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद करती है।


Healthy spices: कभी अपनी खासियत की वजह से सोने से भी ज्यादा कीमती था ये मसाला, शरीर में यूं फूंक देता है जान

दालचीनी एक ऐसा मसाला है, जो अधिकांश भारतीय घरों में इस्तेमाल किया जाता है। यह छोटे सदाबहार पेड़ की भीतरी छाल से मिलती है , जो ऊंचाई में 15 फीट से लंबी नहीं होती। स्क्रैप की गई छाल को सूखने के लिए धूप में रखा जाता है, जहां यह रोल में मुड़ जाती है। जिसे दालचीनी की छड़ें कहा जाता है। इसमें हाई बीपी के अलावा ब्लड शुगर को कम करने और दीघार्यु बढ़ाने की अच्छी खासी क्षमता होती है। आप शायद न जानते हों, लेकिन कभी दालचीनी सोने से भी ज्यादा कीमती थी।

मिडिवियल यूरोप में इसका उपयोग धार्मिक संस्कारों और स्वाद के लिए किया जाता था। 16वीं शताब्दी तक यह डच ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापार में सबसे ज्यादा फायदा देने वाला मसाला था। दालचीनी की सुंगध और इसमें मौजूद औषधीय गुणों के कारण इसका उपयोग खाना पकाने में किया जाता है। भारत में आुयर्वेदिक दवाओं में भी इसका बखूबी इस्तेमाल होता है।

हावर्ड हेल्थ

में एमडी डॉ.उमा नायूड कहती हैं कि खाद्य पदार्थों में सुगंध मास्तिक के स्वास्थ्य को भी स्वस्थ रखती है। रिसर्चर्स ने पता लगाया है कि लौंग, दालचीनी, जायफल में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो न केवल याददाशत बल्कि तनाव को मैनेज करते हैं, जिससे नींद भी अच्छी आती है।



​एंटीवायरल, एंटी फंगल गुणों से भरपूर है दालचीनी
​एंटीवायरल, एंटी फंगल गुणों से भरपूर है दालचीनी

दालचीनी

में एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगस गुण पाए जाते हैं। 2016 के एक लैबोरेटरी स्टडी में पाया गया है कि दालचीनी का तेल ब्लड स्ट्रीम को प्रभावित करने वाले एक तरह के कैंडिडा के लिए बेहद प्रभावी था।



​टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम करे
​टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम करे

दालचीनी प्री-डायबिटीज वाले लोगों के लिए एक वरदान है। बोस्टन के जोसलिन डायबिटीज सेंटर और बेथ इजरायल डेकोनेस मेडिकल सेंटर में डिवीजन ऑफ एंडोक्रिनॉलोजी के स्टाफ फिजिशियन डॉ. गिउलिओ रोमियो द्वारा किए गए हाई ब्लड शुगर के 51 लोगों के

नए अध्ययन

में पाया गया कि दालचीनी टाइप-2 डायबिटीज के विकास को धीमा करने के लिए बहुत अच्छी है। 2015 की समीक्षा के अनुसार, यह पता चलता है कि कैसिया दालचीनी ब्लड शुगर लेवल को कम कर सकती है।

बीबीसी गुड फूड

में एक न्यूट्रिशन एक्सपर्ट जो लेविन कहते हैं कि यह जड़ी-बूटी ब्लड स्ट्रीम में जाने वाले ग्लूकोज की मात्रा और ब्लड शुगर को मैनेज करती है।



​ब्लड प्रेशर को मेनटेन रखे
​ब्लड प्रेशर को मेनटेन रखे

दालचीनी एक सुगंधित मसाला है, जो सिनामोमम जीनस के पेड़ों की भीतरी छाल से आता है। यह ब्लड वेसेल्स को पतला करने में मदद करती हैं। सदियों से लोग

ब्लड प्रेशर को कम करने के लिए

इसका इस्तेमाल करते आ रहे हैं। 9 अध्ययनों की समीक्षा से पता चला है कि दालचीनी लेने से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में क्रमश: 6.2 mm/ Hg और 3.9 mm/ Hg की कमी आई है। यह प्रभाव तब और ज्यादा मजबूत हुआ जब लोगों ने लगातार 12 सप्ताह से ज्यादा समय तक दालचीनी का सेवन किया। जिन लोगों ने 12 सप्ताह में हर दिन 500-2400 mg दालचीनी ली, उनके सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 5.39 mm/ Hg और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर में 2.6 mm/ Hg की कमी देखी गई।



​आंत के स्वास्थ्य में सुधार करे
​आंत के स्वास्थ्य में सुधार करे

Parkway East Hospital

के आहार विशेषज्ञ जेनिफर शिम लिखती हैं कि दालचीनी आपकी आंतों में कार्बोहाइड्रेट के टूटने को धीमा करके और आपके आंत के भीतर पोषक तत्वों का बेहतर संतुलन बनाए रखकर

ब्लड शुगर लेवल को मेंटेन

रखती है। एक अन्य शोध से पता चला है कि दालचीनी में मौजूद यौगिक आपके पाचन तंत्र में सूजन को कम करने में मददगार हैं। बीबी गुड फूड की रिपोर्ट बताती है कि दालचीनी सहित कुछ मसालों में प्री-बायोटिक गुण होते हैं। ये बैक्टीरिया आपकी आंत में बैक्टीरिया के संतुलन को फिर से स्टोर करने के अलावा पाचन संबंधी किसी भी समस्या को कम कर सकते हैं।



​मास्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अच्छी
​मास्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए अच्छी

दालचीनी में दो यौगिक होते हैं, जो प्रोटीन के निर्माण को रोकने के लिए जिम्मेदार है। न्यूट्रिशनल न्यूरोसाइंस के जुलाई 2015 के अंक में प्रकाशित एक पशु अध्ययन में पाया गया कि मसाले से बने अर्क ने लैब में चूहों को ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस से जुड़े ब्रेनडैमेज से बचाने में मदद की।



​एक दिन में कितनी दालचीनी का सेवन करना चाहिए
​एक दिन में कितनी दालचीनी का सेवन करना चाहिए

ज्यादातर वयस्कों के लिए हर दिन

दालचीनी 1 चम्मच से ज्यादा सुरक्षित नहीं

मानी जाती। यदि आप पहले से इसका सेवन नहीं कर रहे हैं, तो इसे अपने आहार में शामिल करने से पहले डॉक्टर से मार्केट में उपलब्ध दालचीनी की वैरायटी का सहनशीलता स्तर और एलर्जी के बारे में बात करें। यदि इसका सेवन अधिक मात्रा में किया जाए, तो दालचीनी हार्ट , डायबिटीज और लिवर डिजीज की दवा के साथ रिएक्ट कर सकती है। इसे आप अपनी करी और सब्जी, दाल में मसाले के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।





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