कैंसर का पता लगते ही अक्सर लोग कर बैठते हैं ये लापरवाही, डॉक्टर से जानें क्या करना है जरूरी
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। कैंसर का नाम सुनते ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। इसमें की जाने वाली कीमोथैरेपी, सर्जरी की कल्पना करने से ही लोग डर जाते हैं। लंबे वक्त तक इलाज के बाद कुछ लोग अच्छा जीवन जी पाते हैं, जबकि कई लोग इलाज के बावजूद कैंसर की चपेट में अपनी जान गंवा बैठते हैं। यह एक ऐसी बीमारी है, जो आपको न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी प्रभावित करती है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार हर 10 में से एक भारतीय को कैंसर होने की आशंका बनी रहती है और 2025 तक देश के 16 लाख लोग कैंसर से ग्रसित हो सकते हैं। वैसे कोई भी कैंसर जैसी बीमारी क कल्पना तक नहीं करना चाहता । इसलिए जब भी किसी को अचानक से कैंसर का निदान किया जाता है, तो उसे समझ नहीं आता कि आखिर इसका इलाज क्या है। कैसे इलाज कराएं , इलाज कराएं भी या नहीं, ऐसे कई सवाल मन में चलते रहते हैं। दरअसल, इलाज कराने में एक तरफ जहां खूब पैसा खर्च होता है, वहीं इस बात की भी गारंटी नहीं है, कि मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। कीमो, रेडियोथैरेपी और सर्जरी की जटिलाओं के चलते लोग कैंसर टीटमेंट में देरी करते हैं और इलाज तब कराना शुरू करते हैं, जब कैंसर की लास्ट सबसे खतरनाक स्टेज होती है। ज्यादातर मामलों में तब इसका इलाज सफल नहीं हो पाता। मैक्स हॉस्पीटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एंड रोबोटिक सर्जरी के सीनियर डायरेक्टर व एचओडी डॉ.सुरेन्द्र डबास कहते हैं कि कैंसर एक लाइलाज बीमारी नहीं बल्कि इलाज के लायक बीमारी है। निर्भर करता है कि आप किस तरह के , किस जगह के और किस स्टेज के कैंसर से जूझ रहे हैं। इलाज में देरी बीमारी को बढ़ा सकती है। तो आइए विश्व कैंसर दिवस पर आज जानते हैं कि कैंसर का निदान होने पर आपको क्या करना चाहिए।कैंसर जैसी बीमारी मरीज को शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी प्रभावित करती है। डॉक्टर का कहना है कि केवल कैंसर का निदान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इससे ग्रसित व्यक्ति को इसका टाइप भी पता करना चाहिए।

कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। कैंसर का नाम सुनते ही शरीर में सिहरन दौड़ जाती है। इसमें की जाने वाली कीमोथैरेपी, सर्जरी की कल्पना करने से ही लोग डर जाते हैं। लंबे वक्त तक इलाज के बाद कुछ लोग अच्छा जीवन जी पाते हैं, जबकि कई लोग इलाज के बावजूद कैंसर की चपेट में अपनी जान गंवा बैठते हैं। यह एक ऐसी बीमारी है, जो आपको न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी प्रभावित करती है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार हर 10 में से एक भारतीय को कैंसर होने की आशंका बनी रहती है और 2025 तक देश के 16 लाख लोग कैंसर से ग्रसित हो सकते हैं। वैसे कोई भी कैंसर जैसी बीमारी क कल्पना तक नहीं करना चाहता । इसलिए जब भी किसी को अचानक से कैंसर का निदान किया जाता है, तो उसे समझ नहीं आता कि आखिर इसका इलाज क्या है। कैसे इलाज कराएं , इलाज कराएं भी या नहीं, ऐसे कई सवाल मन में चलते रहते हैं। दरअसल, इलाज कराने में एक तरफ जहां खूब पैसा खर्च होता है, वहीं इस बात की भी गारंटी नहीं है, कि मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाएगा। कीमो, रेडियोथैरेपी और सर्जरी की जटिलाओं के चलते लोग कैंसर टीटमेंट में देरी करते हैं और इलाज तब कराना शुरू करते हैं, जब कैंसर की लास्ट सबसे खतरनाक स्टेज होती है। ज्यादातर मामलों में तब इसका इलाज सफल नहीं हो पाता।
मैक्स हॉस्पीटल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी एंड रोबोटिक सर्जरी के सीनियर डायरेक्टर व एचओडी डॉ.सुरेन्द्र डबास
कहते हैं कि कैंसर एक लाइलाज बीमारी नहीं बल्कि इलाज के लायक बीमारी है। निर्भर करता है कि आप किस तरह के , किस जगह के और किस स्टेज के कैंसर से जूझ रहे हैं। इलाज में देरी बीमारी को बढ़ा सकती है। तो आइए विश्व कैंसर दिवस पर आज जानते हैं कि कैंसर का निदान होने पर आपको क्या करना चाहिए।
इलाज से पहले कैंसर का टाइप पता करें-

डॉ. डबास कहते हैं कि कैंसर हमारे शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। ब्रेन, मुंह, गले, छाती, पेट, पेशाब की थाली, मसल्स में। ऐसे हजारों तरह के कैंसर हैं और हर हिस्से में
। लेकिन लोगों को जब कैंसर का निदान होता है, तो उन्हें सिर्फ कैंसर और इसकी स्टेज से मतलब होता है। उन्हें इस बात से कोई मतलब नहीं रहता कि कैंसर किस तरह का हुआ है। डॉक्टर लोगों को सलाह देते हैं कि जब भी आपको कैंसर डायगनोज हो, तो
इलाज से पहले आपको इसका टाइप पता करना चाहिए।
बायोप्सी ठीक से करें

कैंसर में दूसरा स्टेप है
ठीक से पढ़ना और बायोप्सी के लिए अगर कुछ टेस्ट कराने पड़ें, तो टेस्ट कराना जरूरी है। इसके आधार पर कैंसर की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है। एक बार
कैंसर का निदान
होने पर देखा जाता है कि इसकी स्टेज क्या है। अगर कुछ तरह के कैंसर को छोड़ दिया जाए, तो कैंसर की आमतौर पर 4 स्टेज होती हैं। ऐसे में पहली , दूसरी और तीसरी स्टेज पर बीमारी को ठीक किया जा सकता है।
गाइडलाइन के हिसाब से होता है कैंसर ट्रीटमेंट

हर
गाइडलाइन के हिसाब से होता है। ब्रेस्ट कैंसर का उदाहरण लें, तो अकेले इसका निदान ही काफी नहीं है, बल्कि इसका टाइप क्या है, यह पता होना बहुत जरूरी है। इसके लिए AR/ PR, HER । इन टेस्ट के आधार पर यह पता लगाने में मदद मिलती है कि पहले
कीमो देना चाहिए या पहले सर्जरी
करनी चाहिए। ट्रीटमेंट कितना लंबा चलेगा, कीमो कितनी लंबी चलेगी इस तरह के सवालों के जवाब बायोप्सी में मिलते हैं।
कैंसर होने पर क्या करें-

डॉ. डबास के अनुसार, अपने शरीर पर ध्यान दें और
रैगुलर चेकअप कराएं।
बीमारी का निदान होने के बाद जल्द से जल्द इलाज कराएं। समय-समय पर फॉलो अप करें।
अगर आप इस बीमारी पर ध्यान देंगे, तो रैगलुर चेकअप कराकर बीमारी को जल्द पकड़ पाएंगे ऐसे में इलाज सफल होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। जटिलताएं कम होती हैं और पैसा भी कम खर्च होता है।
हर दिन कैंसर के इलाज में बदलाव आ रहे हैं। कैंसर में हर दिन रिसर्च चल रही है ताकि मरीज को कम से कम जटिलता वाला ट्रीटमेंट दिया जा सके। इन सबके बावजूद एक नागरिक होने के नाते हमारी जिम्मेदारी है कि हम खुद भी कैंसर के प्रति जागरूक हों और लोगों को भी इसके बारे में जागरूक करें। डॉक्टर्स के अनुसार, रैगलुर चेकअप कराकर ही कैंसर जैसी बीमारी के इलाज में सफलता हासिल की जा सकती है।
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