रिसर्च में दावा, इस चीज को सूंघने से जल्दी मर सकता है कोरोना, मरीज भी जल्दी हो सकते हैं ठीक
एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ लड़ाई में नाइट्रिक ऑक्साइड (Nitric oxide) सफल और किफायती गेमचेंजर हो सकता है। यह दावा कोच्चि के अमृता अस्पताल के डॉक्टरों और अमृता विश्व विद्यापीठम में स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में किया गया है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि नाइट्रिक ऑक्साइड को सूंघने से कोरोना को नाक में मारने में मदद मिल सकती है। यह अध्ययन इंफेक्शियस माइक्रोब्स एंड डिजीज जर्नल में प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि नाइट्रिक ऑक्साइड ने कोरोना वायरस को मार डाला था। इतना ही नहीं, यह मेजबान कोशिकाओं के लिए वायरस के प्रभावी लगाव को भी रोक सकता है। नाइट्रिक ऑक्साइड का उपयोग लंबे समय से चिकित्सा स्थितियों जैसे कि ब्लू बेबी सिंड्रोम (Blue Baby Syndrome) और लंग्स एंड हार्ट ट्रांसप्लांट के रोगियों के इलाज के लिए किया जाता है। अमृता अस्पताल में एक परीक्षण में पाया गया कि iNO (इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड) थेरेपी लेने वाले कोविड-19 रोगी उन मरीजों की तुलना में जल्दी ठीक हो थे, जिन्हें स्टैण्डर्ड ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। अध्ययन में यह भी पाया गया कि आईएनओ थेरेपी में मृत्यु दर भी शून्य थी।कोरोना वायरस का इलाज : अमृता अस्पताल में एक परीक्षण में पाया गया कि iNO (इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड) थेरेपी लेने वाले कोविड-19 रोगी उन मरीजों की तुलना में जल्दी ठीक हो थे, जिन्हें स्टैण्डर्ड ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। अध्ययन में यह भी पाया गया कि आईएनओ थेरेपी में मृत्यु दर भी शून्य थी।

एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ लड़ाई में
नाइट्रिक ऑक्साइड (Nitric oxide)
सफल और किफायती गेमचेंजर हो सकता है। यह दावा कोच्चि के अमृता अस्पताल के डॉक्टरों और अमृता विश्व विद्यापीठम में स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक अध्ययन में किया गया है। शोधकर्ताओं ने कहा है कि नाइट्रिक ऑक्साइड को सूंघने से कोरोना को नाक में मारने में मदद मिल सकती है। यह अध्ययन इंफेक्शियस माइक्रोब्स एंड डिजीज जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं ने अपने शोध में पाया कि नाइट्रिक ऑक्साइड ने
को मार डाला था। इतना ही नहीं, यह मेजबान कोशिकाओं के लिए वायरस के प्रभावी लगाव को भी रोक सकता है। नाइट्रिक ऑक्साइड का उपयोग लंबे समय से चिकित्सा स्थितियों जैसे कि
ब्लू बेबी सिंड्रोम (Blue Baby Syndrome)
और लंग्स एंड हार्ट ट्रांसप्लांट के रोगियों के इलाज के लिए किया जाता है।
अमृता अस्पताल में एक परीक्षण में पाया गया कि iNO (इनहेल्ड नाइट्रिक ऑक्साइड) थेरेपी लेने वाले
रोगी उन मरीजों की तुलना में जल्दी ठीक हो थे, जिन्हें स्टैण्डर्ड ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। अध्ययन में यह भी पाया गया कि आईएनओ थेरेपी में मृत्यु दर भी शून्य थी।
स्वीडिश रिसर्च से मिला आइडिया

अमृता स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी में प्रो बिपिन नायर
ने परीक्षणों के पीछे के विचार के बारे में कहा कि नाइट्रिक ऑक्साइड को
के उपचार के विकल्प के रूप में देखा जाना चाहिए। हमें इसका विचार एक स्वीडिश समूह द्वारा किए गए अध्ययन से आया है। उस अध्ययन में सुझाव दिया था गया कि गैस भी सार्स-को-2 वायरस को रोकने में कारगर साबित हो सकती है। यह जैव रासायनिक परिवर्तनों को प्रेरित करती है, जो सीधे वायरस के स्पाइक प्रोटीन को प्रभावित करते हैं।
कैसे हुआ अध्ययन

अमृता अस्पताल की टीम ने मरीजों के एक छोटे समूह पर परीक्षण किया। चुने गए 25 रोगियों में से 14 को स्टैण्डर्ड ट्रीटमेंट के साथ-साथ आईएनओ थेरेपी दी गई, जबकि 11 रोगियों को सिर्फ सरल उपचार ही दिया गया। रिजल्ट में सामने आया कि आईएनओ थेरेपी लेने वाले रोगियों में वायरल लोड काफी कम हुआ था।
ओमीक्रोन के लिए मजबूत हथियार हो सकता है

शोधकर्ताओं ने कहा कि नाइट्रिक ऑक्साइड कोरोना वायरस के खिलाफ एक बेहतर प्रभावी निवारक हो सकता है। इस थेरेपी से खासकर कोरोना के गंभीर रूप
के खिलाफ लड़ने में मदद मिल सकती है। अमृता स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी की डॉ गीता कुमार ने कहा कि नाइट्रिक ऑक्साइड का उपयोग महामारी के खिलाफ लड़ाई में गेमचेंजर साबित हो सकता है।
डॉक्टरों को होगा ज्यादा फायदा

डॉ गीता कुमार ने कहा कि इसका इस्तेमाल उन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए बेहतर साबित हो सकता है, जो लगातार कोरोना वायरस के संपर्क में रहते हैं और संक्रमित रोगियों का इलाज करते हैं।
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