क्या कांग्रेस फिर से बड़ी ताकत बन सकती है?
क्या देश ने आजादी दिलाने का कांग्रेस का अहसान चुका दिया है? सवाल अजीब है। कांग्रेस तब हर तरह की विचारधारा के लोगों का जमावड़ा थी। यह कांग्रेस के उसी विचार की प्रासंगिकता है कि चुनावी लोकतंत्र में अपने सबसे उदास दिनों में भी उसका जिक्र होता है, फिक्र होती है। यह फिक्र दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का इत्र भी है, जिसकी महक रहनी चाहिए। इतिहास के विद्यार्थी के रूप में इस बात को देखना समझना-चाहता हूं क्योंकि देश की सोच कुछ क्षणों, महीनों या सालों में नहीं बनती। सदियों में, हजारों सालों में भी राष्ट्र की चेतना या उपचेतन मस्तिष्क रूप लेता है। किसी दल की चेतना का भी कमोबेश यही मिजाज है।
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