OPINION : सलमान रुश्दी के खून के ये छींटे स्क्रीन पर नहीं, हम सब पर हैं...
भारत को सुनिश्चित करना होगा कि अब कोई गौरी लंकेश अपनी किताब के लिए न मारी जाएं। अब कोई मकबूल फिदा हुसैन अपनी कला के लिए देश छोड़ने के लिए मजबूर न किए जाएं। 'सर तन से जुदा' जैसे बर्बर नारों की किसी भी सभ्य समाज में जगह नहीं। भारत को अब कहना ही होगा- बहुत हुआ, अब और नहीं।
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