डिप्रेशन की तरफ धकेलती है बांझपन की समस्या, डॉ. से जानिए निपटने के 8 तरीके
हर साल 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (World Mental Health Day) मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के बारे में लोगों को को जागरूक करना है। दुनिया भर में, प्रजनन आयु वर्ग के 15% तक दंपत्ति बांझपन से जूझते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में प्राथमिक बांझपन की कुल आवृत्ति 3.9 से 16.8 प्रतिशत के बीच होने का अनुमान है। भारत में बांझपन सामाजिक प्रभाव के साथ एक चिकित्सा समस्या है। प्रजनन करने में असमर्थता, पुरुषों और महिलाओं दोनों में भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक पीड़ा पैदा करती है। जब किसी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करते हैं, तो इसमें भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कल्याण जैसे सभी पहलुओं सहित उनकी समग्र भलाई शामिल होती है। इंदिरा आईवीएफ के सीईओ और सह-संस्थापक डॉक्टर डॉक्टर क्षितिज मर्डिया के अनुसार, अधिकांश संस्कृतियों में, बांझपन और मानसिक स्वास्थ्य को वर्जित विषय माना जाता है, और उनके बारे में बातचीत करने से परहेज किया जाता है। एक और बड़ी बाधा यह है की इन चिंताओं को समझने की कमी भी आम लोगों के बीच है। मानसिक बीमारी के लक्षणों को अक्सर खारिज कर दिया जाता है, और जो लोग उन्हें प्रदर्शित करते हैं उन्हें समुदाय में अलग-अलग नामों से लेबल किया जाता है।
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