पुतले बनाने में अब न तो पहले जैसा मुनाफा है और न ही वैसी मांग है, कैसे दूर होगा कारीगरों का दर्द
कोरोना महामारी की वजह से लगी पाबंदियां लगभग खत्म हो चुकी हैं। इस बार दो साल बाद पूरे उल्लास के साथ दशहरा मनाया जा रहा है। इसके बावजूद पुतला बनाने वाले कारीगरों का दर्द खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कारीगरों का कहना है कि अब रावण के पुतले बनाने में न तो पहले जैसा मुनाफा है और ना ही वैसी मांग है।
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