Opinion: आश्चर्य है कि एक साथ इतनी संख्या में लोगों को कैसे हिंदू धर्म अस्वीकार्य लगा?
सात अक्टूबर को राजधानी दिल्ली के आंबेडकर भवन का दृश्य निश्चित रूप से इस देश के ज्यादातर लोगों के जेहन में लंबे समय तक कायम रहेगा। आयोजकों का दावा है कि वहां 10 हजार दलितों ने हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म ग्रहण किया। संविधान व्यक्ति को अपनी मर्जी से किसी भी धर्म को त्यागने या अपनाने की स्वतंत्रता देता है। इस नाते जिन लोगों ने बौद्ध धर्म स्वीकार किया, यह उनकी व्यक्तिगत आस्था का विषय है। किंतु इसके साथ कुछ अन्य पहलू भी जुड़े हैं। दो-चार लोग या परिवार धर्मांतरण करते हैं तो ज्यादा आश्चर्य नहीं होता। एक साथ इतनी संख्या में लोगों को कैसे हिंदू धर्म अस्वीकार्य लगा और बौद्ध धर्म के प्रति उनकी आस्था घनीभूत हो गई?
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